402 करोड़ की योजना से 8,926 किसानों को मिलेगा लाभ , अब हर खेत तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी Haryana Micro Irrigation Scheme 2026

402 करोड़ की योजना से 8,926 किसानों को मिलेगा लाभ , अब हर खेत तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी Haryana Micro Irrigation Scheme 2026

हरियाणा सरकार ने किसानों की सिंचाई संबंधी समस्याओं को कम करने और खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 की शुरुआत की है। इस योजना पर 402.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत सौर ऊर्जा आधारित ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे किसानों को कम पानी में बेहतर सिंचाई की सुविधा मिलेगी। सरकार का मानना है कि Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 राज्य में जल संरक्षण और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

महेंद्रगढ़ को मिला सबसे बड़ा बजट

Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 में सबसे अधिक 114.78 करोड़ रुपये महेंद्रगढ़ जिले के लिए स्वीकृत किए गए हैं। यह जिला हरियाणा के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है और यहां औसतन 500 मिमी से भी कम वर्षा होती है। कम बारिश और लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण यहां के किसान लंबे समय से सिंचाई की समस्या का सामना कर रहे हैं। इस योजना के लागू होने से नहरों का पानी आधुनिक तकनीक के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे खेती अधिक आसान और लाभदायक बन सकेगी।

भूजल संकट को कम करने पर रहेगा फोकस

हरियाणा में लगातार बढ़ते भूजल दोहन को देखते हुए सरकार ने Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 को प्राथमिकता दी है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार राज्य में भूजल दोहन की दर 135.74 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वहीं राज्य के 143 ब्लॉकों में से 88 ब्लॉक ‘अति-शोषित’ श्रेणी में शामिल हैं। महेंद्रगढ़ के नारनौल और नांगल चौधरी सहित छह विकास खंडों में भूजल की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक मानी गई है। नई योजना का उद्देश्य भूजल के बजाय नहरों के पानी का अधिक उपयोग करना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।

चार जिलों में लागू होगी योजना

राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति ने माइक्रो इरिगेशन एंड कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MICADA) के तहत चार सामुदायिक सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं को मंजूरी दी है। Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 के पहले चरण में महेंद्रगढ़, झज्जर, भिवानी और कुरुक्षेत्र जिलों को शामिल किया गया है। इन जिलों में आधुनिक सिंचाई नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

सौर ऊर्जा से चलेगी ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई

Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिंचाई प्रणाली को सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा। खेतों तक नहरों का पानी पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाया जाएगा और ड्रिप व स्प्रिंकलर तकनीक से फसलों की सिंचाई होगी। इससे पानी की बचत होगी, सिंचाई की लागत कम होगी और किसानों को बिजली या डीजल पर कम खर्च करना पड़ेगा। आधुनिक सिंचाई तकनीक से फसलों को आवश्यक मात्रा में ही पानी मिलेगा, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना भी रहेगी।

94 गांवों के 8,926 किसानों को मिलेगा लाभ

Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 के तहत चार जिलों के 20 ब्लॉकों, 61 नहर आउटलेट, 94 गांवों और 11,040 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को शामिल किया गया है। इस परियोजना से लगभग 8,926 किसानों को सीधे लाभ मिलने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा पहुंचाना है, जहां पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

जिलावार बजट आवंटन

योजना के लिए कुल 402.41 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। जिलों के अनुसार बजट इस प्रकार है—

  • महेंद्रगढ़ – 114.78 करोड़ रुपये
  • झज्जर – 114.68 करोड़ रुपये
  • भिवानी – 95.78 करोड़ रुपये
  • कुरुक्षेत्र – 77.17 करोड़ रुपये

इन चारों जिलों में परियोजनाओं का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

कृषि मंत्री ने क्या कहा?

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि राज्य सरकार खेती को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 का उद्देश्य किसानों की अनियमित बारिश और भूजल पर निर्भरता कम करना है। सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था से खेती की लागत घटेगी, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

किसानों को क्या होंगे प्रमुख फायदे?

Haryana Micro Irrigation Scheme 2026 के लागू होने से किसानों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक के कारण कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव होगी। सौर ऊर्जा के उपयोग से बिजली और डीजल की लागत कम होगी। भूजल दोहन घटने से भविष्य के लिए जल संसाधनों का संरक्षण होगा। साथ ही आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार होने की उम्मीद है। योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए लाभदायक साबित होगी, जो लंबे समय से पानी की कमी के कारण खेती में नुकसान झेल रहे हैं।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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