देश में सुपारी उत्पादन के मामले में कर्नाटक सबसे महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है। हालांकि Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 से जुड़े ताजा सरकारी आंकड़ों ने कृषि क्षेत्र के सामने एक नई चुनौती को उजागर किया है। पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य में सुपारी की खेती का रकबा लगातार बढ़ा है, लेकिन प्रति हेक्टेयर पैदावार और कुल उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति बताती है कि केवल खेती का क्षेत्र बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादकता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
पांच वर्षों में 32 प्रतिशत बढ़ा सुपारी का रकबा
लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 के तहत वर्ष 2021-22 में राज्य में 6.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सुपारी की खेती की जा रही थी। वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान तक यह रकबा बढ़कर 7.99 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। यानी पांच वर्षों में लगभग 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि किसानों का सुपारी की खेती की ओर रुझान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया।
प्रति हेक्टेयर पैदावार में 37 प्रतिशत की गिरावट
रकबा बढ़ने के बावजूद Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 में प्रति हेक्टेयर उत्पादन लगातार घटा है। वर्ष 2021-22 में जहां औसत पैदावार 2.24 टन प्रति हेक्टेयर थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह घटकर केवल 1.42 टन प्रति हेक्टेयर रह गई। लगभग 37 प्रतिशत की यह गिरावट किसानों की आय और राज्य की कुल कृषि अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव, रोगों का प्रकोप और कृषि प्रबंधन की चुनौतियां इसकी प्रमुख वजह हो सकती हैं।
कुल उत्पादन भी पांच साल पहले के स्तर से कम
Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2021-22 में राज्य में लगभग 13.5 लाख टन सुपारी का उत्पादन हुआ था। इसके बाद अगले वर्ष उत्पादन घटकर 10.2 लाख टन रह गया। बाद के वर्षों में कुछ सुधार देखने को मिला और 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार कुल उत्पादन लगभग 11.3 लाख टन तक पहुंचा, लेकिन यह अब भी पांच वर्ष पहले की तुलना में करीब 16 प्रतिशत कम है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी दी कि उत्पादन में गिरावट के बावजूद कर्नाटक आज भी देश का सबसे बड़ा सुपारी उत्पादक राज्य बना हुआ है। पिछले पांच वर्षों में देश के कुल सुपारी क्षेत्रफल का लगभग 71.56 प्रतिशत और कुल उत्पादन का 75.47 प्रतिशत हिस्सा अकेले कर्नाटक से आया है।Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026
शिवमोग्गा जिले में रकबा बढ़ा, लेकिन उत्पादन घटा
राज्य के सबसे बड़े सुपारी उत्पादक जिले शिवमोग्गा में भी Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 के दौरान यही स्थिति देखने को मिली। यहां खेती का रकबा 1.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.35 लाख हेक्टेयर हो गया, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.13 टन से घटकर 1.11 टन रह गया। इसका सीधा असर कुल उत्पादन पर पड़ा और उत्पादन लगभग 2.38 लाख टन से घटकर करीब 1.50 लाख टन रह गया। यह दर्शाता है कि खेती का विस्तार होने के बावजूद उत्पादकता में गिरावट बनी हुई है।
दक्षिण कन्नड़, उडुपी और उत्तर कन्नड़ में भी दिखा यही रुझान
कर्नाटक के प्रमुख सुपारी उत्पादक जिलों में भी Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 के दौरान खेती का रकबा बढ़ा, लेकिन पैदावार और कुल उत्पादन दोनों में कमी दर्ज की गई। दक्षिण कन्नड़ जिले में खेती का क्षेत्र बढ़ने के बावजूद प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.70 टन से घटकर 1.31 टन रह गया, जिससे कुल उत्पादन लगभग आधा हो गया। उडुपी जिले में भी प्रति हेक्टेयर उत्पादन 3.12 टन से घटकर 1.50 टन रह गया और कुल उत्पादन 72 हजार टन से घटकर लगभग 40 हजार टन रह गया। उत्तर कन्नड़ जिले में भी रकबा बढ़ने के बावजूद उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
कुछ जिलों में बेहतर प्रदर्शन भी देखने को मिला
हालांकि पूरे राज्य में स्थिति एक जैसी नहीं रही। Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 के दौरान चिक्कमगलुरु जिले में उत्पादन में सुधार दर्ज किया गया है। वहीं हावेरी और हासन जिलों में पिछले पांच वर्षों के दौरान खेती का क्षेत्र और कुल उत्पादन दोनों बढ़े हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बेहतर कृषि प्रबंधन, अनुकूल मौसम और आधुनिक तकनीकों का उपयोग उत्पादन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
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सरकार सुपारी उत्पादन बढ़ाने के लिए कर रही है प्रयास
सुपारी की घटती पैदावार को देखते हुए केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 को मजबूत बनाने के लिए लीफ स्पॉट रोग, फल सड़न रोग और जड़ कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही नई बौनी एवं संकर सुपारी किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को मिश्रित खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा मौसम आधारित रोग पूर्वानुमान प्रणाली भी विकसित की जा रही है ताकि समय रहते फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
किसानों के सामने बढ़ रही हैं नई चुनौतियां
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, रोगों का बढ़ता प्रकोप और मिट्टी की उर्वरता में कमी जैसी समस्याएं सुपारी की उत्पादकता को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में Karnataka Me Supari Ki Kheti 2026 को अधिक लाभदायक बनाने के लिए किसानों को वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषण प्रबंधन, उन्नत किस्मों का चयन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना होगा। यदि इन उपायों पर गंभीरता से काम किया गया तो आने वाले वर्षों में सुपारी की पैदावार और किसानों की आय दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है।
