खेती योग्य जमीन में कितनी कमी आई? सरकार ने जारी किए नए आंकड़े Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha

खेती योग्य जमीन में कितनी कमी आई? सरकार ने जारी किए नए आंकड़े Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha

Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha भारत में कृषि भूमि को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में देश की खेती योग्य जमीन में मामूली कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद फसलों का कुल बोया गया रकबा लगातार बढ़ा है। Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha की यह स्थिति बताती है कि किसान उपलब्ध कृषि भूमि का पहले की तुलना में अधिक प्रभावी इस्तेमाल कर रहे हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में भूमि उपयोग सांख्यिकी 2024-25 के आंकड़े साझा किए। आंकड़ों के अनुसार आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई और सरकारी नीतियों की मदद से किसानों ने एक ही जमीन पर साल में एक से अधिक फसल लेने की क्षमता बढ़ाई है। Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha

खेती योग्य जमीन में कितनी कमी आई?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में देश की कुल कृषि योग्य भूमि 179.98 मिलियन हेक्टेयर थी। वर्ष 2023-24 में यह घटकर 179.77 मिलियन हेक्टेयर और 2024-25 में 179.43 मिलियन हेक्टेयर रह गई।इस तरह पिछले तीन वर्षों में कृषि योग्य भूमि में मामूली कमी दर्ज की गई है। हालांकि, Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha का सबसे बड़ा कारण यह है कि किसान एक ही खेत में एक से अधिक फसलें लेने लगे हैं।

फसलों का कुल रकबा लगातार बढ़ा

Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha देश में कुल बोया गया फसल क्षेत्र पिछले एक दशक में काफी बढ़ा है। वर्ष 2014-15 में कुल बोया गया रकबा 198.28 मिलियन हेक्टेयर था, जो 2024-25 में बढ़कर 225.19 मिलियन हेक्टेयर हो गया।इससे स्पष्ट होता है कि खेती योग्य भूमि का क्षेत्रफल सीमित होने के बावजूद किसानों ने उपलब्ध जमीन का अधिक इस्तेमाल किया है। Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने में बहुफसली खेती की भूमिका सामने आती है।

फसल सघनता बढ़कर 159.7 प्रतिशत हुई

सरकार के अनुसार भारत में फसल सघनता में भी लगातार सुधार हुआ है। वर्ष 2014-15 में फसल सघनता 142.2 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 159.7 प्रतिशत हो गई।फसल सघनता का मतलब है कि एक ही कृषि भूमि पर साल में कितनी बार फसल उगाई जा रही है। फसल सघनता बढ़ने का मतलब है कि किसान उपलब्ध जमीन से अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इसी वजह से Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।आधुनिक बीज, सिंचाई सुविधाएं, कृषि मशीनरी, वैज्ञानिक खेती और बेहतर फसल प्रबंधन ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

खाद्यान्न उत्पादन में भी बड़ी बढ़ोतरी

भारत में कृषि भूमि सीमित होने के बावजूद खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 में देश का खाद्यान्न उत्पादन 252.02 मिलियन टन था।2025-26 के अग्रिम अनुमान के अनुसार खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर 376.56 मिलियन टन पहुंच गया है। Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha के साथ खाद्यान्न उत्पादन में यह वृद्धि कृषि क्षेत्र की बढ़ती उत्पादकता को दर्शाती है।बेहतर किस्मों, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कृषि तकनीक और किसानों द्वारा आधुनिक तरीकों को अपनाने से उत्पादन क्षमता बढ़ी है।

बागवानी उत्पादन भी बढ़ा

बागवानी क्षेत्र में भी भारत ने अच्छी प्रगति की है। वर्ष 2014-15 में देश का बागवानी उत्पादन 280.98 मिलियन टन था।2025-26 के अग्रिम अनुमान के अनुसार यह बढ़कर 377.77 मिलियन टन हो गया है। फल, सब्जियों और अन्य बागवानी फसलों की खेती में तकनीकी सुधार से किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिली है।यह आंकड़े बताते हैं कि Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha होने के बावजूद कृषि क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ रही है। Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha

पहली बार दर्ज हुए मखाना उत्पादन के आंकड़े

सरकार ने मखाना उत्पादन से जुड़े आंकड़े भी जारी किए हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की बागवानी सांख्यिकी इकाई ने वर्ष 2024-25 से मखाना उत्पादन के आंकड़े दर्ज करना शुरू किया है।वर्ष 2024-25 में देश में 63,910 टन मखाने का उत्पादन हुआ और औसत उत्पादकता 2.03 टन प्रति हेक्टेयर रही।2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार मखाना उत्पादन बढ़कर 80,590 टन हो गया। इस दौरान औसत उत्पादकता 2.34 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई।

बिहार में सबसे ज्यादा मखाना उत्पादन

मखाना उत्पादन के मामले में बिहार देश का प्रमुख राज्य है। सरकार के अनुसार 2025-26 में बिहार में करीब 60,000 टन मखाने का उत्पादन हुआ।राज्य में औसत उत्पादकता करीब 2 टन प्रति हेक्टेयर रही। मखाना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नकदी फसल के रूप में भी उभर रहा है।

मखाना निर्यात के लिए अलग HSN कोड

पहले मखाना उत्पाद सामान्य HSN कोड के तहत दर्ज किए जाते थे। इससे मखाना के अलग-अलग निर्यात आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाते थे।वर्ष 2025 में DGFT ने फूले हुए मखाने और अन्य मखाना उत्पादों के लिए अलग HSN कोड जारी किया। इसके बाद मखाना निर्यात से जुड़े आंकड़ों को अलग से दर्ज करना संभव हुआ।वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,264.89 टन मखाना उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत करीब 192.96 करोड़ रुपये रही।

मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR के राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा ने मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए कई तकनीकें विकसित की हैं।केंद्र ने ‘स्वर्णा वैदेही’ नाम की अधिक उपज देने वाली मखाना किस्म विकसित की है। इसकी औसत उत्पादन क्षमता 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है, जबकि पारंपरिक खेती में करीब 14 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिलता है।ऐसी तकनीकों से कम भूमि में अधिक उत्पादन हासिल करने की संभावना बढ़ती है। इसलिए Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha के साथ उत्पादकता बढ़ाना कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

कांटारहित सिंघाड़ा और मखाना-मछली पालन

ICAR ने ‘स्वर्णा हरित’ और ‘स्वर्णा लोहित’ नाम की दो कांटारहित सिंघाड़ा किस्में भी विकसित की हैं। इनकी खेती मखाना की फसल कटने के बाद की जा सकती है।इससे किसान एक ही भूमि पर अलग-अलग समय में दो फसलें ले सकते हैं। इससे फसल सघनता बढ़ाने और अतिरिक्त आय प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।इसके अलावा मखाना-सह-मछली पालन मॉडल भी विकसित किया गया है। सरकार के अनुसार चौर भूमि में इस मॉडल से अकेले मखाना खेती की तुलना में किसानों की आय में 40 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।

कृषि भूमि का बेहतर इस्तेमाल बन रहा है नई ताकत

भारत में कृषि योग्य भूमि सीमित होने के बावजूद किसानों द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उत्पादन क्षमता में सुधार हो रहा है। Kheti Yogya Zameen Ghati Lekin Fasal Ka Rakba Badha के आंकड़े इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं।एक ही खेत में कई फसलें लेना, बेहतर सिंचाई व्यवस्था, उन्नत बीज, नई कृषि तकनीक, बागवानी और मखाना जैसी फसलों का विस्तार किसानों को सीमित भूमि से अधिक उत्पादन प्राप्त करने में मदद कर रहा है।आने वाले समय में कृषि भूमि का वैज्ञानिक प्रबंधन, फसल सघनता में बढ़ोतरी और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भारत के कृषि उत्पादन को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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