देश में खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 8 अगस्त 2026 तक के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल कुल खरीफ बुवाई क्षेत्रफल में पिछले साल की तुलना में कमी आई है। किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui और किन प्रमुख फसलों के रकबे में बढ़ोतरी या कमी दर्ज की गई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 8 अगस्त तक देश में कुल 967.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह क्षेत्रफल 985.89 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कुल बुवाई क्षेत्र में 17.96 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। कई क्षेत्रों में मानसून की देरी और बारिश के असमान वितरण को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
खरीफ फसलों की कुल बुवाई में आई कमी
अगर Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui की बात करें, तो 8 अगस्त तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 967.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में कम है। खरीफ सीजन में धान, मक्का, कपास, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज जैसी कई महत्वपूर्ण फसलें शामिल हैं। इस बार कई राज्यों में मानसून की स्थिति सामान्य नहीं रहने के कारण किसानों को बुवाई और रोपाई में देरी का सामना करना पड़ा है। इसका असर खास तौर पर धान और मक्का जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के रकबे पर दिखाई दे रहा है।
धान की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट
खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान के रकबे में इस साल बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। धान का बुवाई क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में 15 लाख हेक्टेयर से अधिक कम हुआ है। ऐसे में Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui के आंकड़ों में धान की कमी सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में शामिल है। धान की खेती के लिए पर्याप्त पानी और समय पर मानसूनी बारिश जरूरी होती है। बारिश में देरी होने के कारण कई क्षेत्रों में धान की रोपाई प्रभावित हुई है। यही वजह है कि इस साल कुल खरीफ बुवाई क्षेत्रफल में धान की हिस्सेदारी पर असर पड़ा है।
मोटे अनाज और मक्का की बुवाई घटी
मोटे अनाज यानी श्रीअन्न फसलों के कुल रकबे में भी गिरावट आई है। वर्ष 2025 में मोटे अनाज का कुल बुवाई क्षेत्रफल 173.21 लाख हेक्टेयर था, जो 2026 में घटकर 168.50 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी इस समूह की फसलों के रकबे में 4.71 लाख हेक्टेयर की कमी हुई है। मोटे अनाज में मक्का का रकबा सबसे ज्यादा घटा है। इस साल मक्का की बुवाई 3.48 लाख हेक्टेयर कम होकर 87.15 लाख हेक्टेयर रह गई है। वहीं ज्वार का क्षेत्रफल 0.22 लाख हेक्टेयर बढ़कर 12.82 लाख हेक्टेयर हुआ है। बाजरा का रकबा 0.55 लाख हेक्टेयर घटकर 62.44 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि रागी के क्षेत्रफल में 0.31 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।
दलहन की बुवाई में भी कमी
दलहन फसलों के बुवाई क्षेत्रफल में भी इस साल गिरावट देखने को मिली है। वर्ष 2025 में दलहन का कुल क्षेत्रफल 105.73 लाख हेक्टेयर था, जो 2026 में घटकर 103.78 लाख हेक्टेयर रह गया है। इस तरह दलहन फसलों के रकबे में 1.95 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। अरहर की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट आई है। अरहर का क्षेत्रफल 2.61 लाख हेक्टेयर घटकर 37.53 लाख हेक्टेयर रह गया है। मूंग का रकबा भी 1.84 लाख हेक्टेयर घटकर 31.37 लाख हेक्टेयर हुआ है। हालांकि, उड़द की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इसका क्षेत्रफल 2.57 लाख हेक्टेयर बढ़कर 22.86 लाख हेक्टेयर हो गया है।
तिलहन फसलों की बुवाई में बढ़ोतरी
खरीफ सीजन में तिलहन फसलों ने इस बार बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025 में तिलहन का कुल बुवाई क्षेत्रफल 175.01 लाख हेक्टेयर था, जो 2026 में बढ़कर 180.20 लाख हेक्टेयर हो गया है। इस तरह तिलहन फसलों के रकबे में 5.19 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। मूंगफली के रकबे में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। इसका क्षेत्रफल 3.71 लाख हेक्टेयर बढ़कर 46.82 लाख हेक्टेयर हो गया है। सोयाबीन का रकबा भी 0.26 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। इसके अलावा सूरजमुखी का क्षेत्रफल 0.43 लाख हेक्टेयर और तिल का क्षेत्रफल 1.44 लाख हेक्टेयर बढ़ा है।
गन्ना और कपास की बुवाई पर मानसून का असर
इस खरीफ सीजन में गन्ना और कपास जैसी महत्वपूर्ण फसलों की बुवाई पर भी मौसम की स्थिति का असर देखने को मिला है। मानसून की देरी और कुछ क्षेत्रों में कम बारिश के कारण किसानों की खेती संबंधी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। अलग-अलग राज्यों में बारिश और बुवाई की स्थिति अलग-अलग है। आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति खरीफ फसलों के अंतिम बुवाई क्षेत्र और उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। इसी कारण Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui से जुड़े आंकड़ों में आगे बदलाव की संभावना बनी हुई है।
खरीफ फसलों की बुवाई से क्या संकेत मिलते हैं
Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui के आंकड़े बताते हैं कि इस साल फसल पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है। धान, मक्का और दलहन जैसी फसलों के क्षेत्रफल में कमी आई है, जबकि तिलहन फसलों की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल खरीफ बुवाई क्षेत्रफल में 17.96 लाख हेक्टेयर की कमी के बावजूद तिलहन के रकबे में 5.19 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण है। इससे पता चलता है कि इस साल किसानों के फसल चयन में बदलाव देखने को मिला है।
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Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui, पूरी स्थिति समझें
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui का जवाब है कि 8 अगस्त तक देश में 967.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। पिछले साल के 985.89 लाख हेक्टेयर की तुलना में यह 17.96 लाख हेक्टेयर कम है। धान के रकबे में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जबकि मक्का और दलहन का क्षेत्रफल भी घटा है। दूसरी ओर, तिलहन फसलों की बुवाई में 5.19 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।
किसानों के लिए आगे क्या रहेगा महत्वपूर्ण
आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेगी। पर्याप्त बारिश होने पर कुछ क्षेत्रों में फसल की स्थिति बेहतर हो सकती है, जबकि बारिश में कमी रहने पर बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। कुल मिलाकर Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui की स्थिति से पता चलता है कि इस साल खरीफ सीजन में कुल बुवाई क्षेत्रफल घटा है, लेकिन तिलहन फसलों ने बढ़त हासिल की है। किसानों को अपने क्षेत्र की मौसम स्थिति और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार आगे की खेती की योजना बनानी चाहिए।
FAQ
Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 Mein Kitni Hui?
8 अगस्त 2026 तक देश में कुल 967.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है।
धान की बुवाई में कितनी कमी आई?
धान का बुवाई क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में 15 लाख हेक्टेयर से अधिक घटा है।
मक्का का रकबा कितना कम हुआ?
मक्का का क्षेत्रफल 3.48 लाख हेक्टेयर घटकर 87.15 लाख हेक्टेयर रह गया है।
तिलहन की बुवाई कितनी बढ़ी?
तिलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 5.19 लाख हेक्टेयर बढ़कर 180.20 लाख हेक्टेयर हो गया है।
दलहन का बुवाई क्षेत्रफल कितना रहा?
2026 में दलहन फसलों की कुल बुवाई 103.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है।
