Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP खेती में बढ़ती लागत और सीमित जमीन के बीच किसान ऐसी तकनीक की तलाश करते हैं, जिससे कम जगह में अधिक उत्पादन लिया जा सके। मध्य प्रदेश के सागर जिले के आकाश चौरसिया ने बहुस्तरीय यानी मल्टीलेयर खेती को अपनाकर खेती का एक अलग मॉडल तैयार किया है। इसमें एक ही खेत में अलग-अलग ऊंचाई पर कई प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
आकाश चौरसिया की खेती का मॉडल केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसमें देशी बीज, स्थानीय संसाधनों, पशुपालन और वर्मी कंपोस्ट जैसे तरीकों को भी शामिल किया गया है। इससे किसान खेती के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत भी तैयार कर सकता है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
डॉक्टर बनने का था सपना
आकाश चौरसिया का सपना डॉक्टर बनने का था। वह लोगों की सेहत सुधारना चाहते थे। लेकिन बदलते खान-पान और जीवनशैली को देखकर उनके मन में यह विचार आया कि लोगों को बेहतर और प्राकृतिक भोजन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने खेती को अपना मिशन बनाया। उनका उद्देश्य खेती के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना रहा। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
क्या है मल्टीलेयर खेती?
मल्टीलेयर खेती को बहुस्तरीय खेती भी कहा जाता है। इसमें एक ही खेत में अलग-अलग ऊंचाई और स्तर पर कई फसलें उगाई जाती हैं। उदाहरण के तौर पर जमीन के अंदर अदरक जैसी फसल लगाई जा सकती है। इसके ऊपर चौलाई जैसी फसल उगाई जाती है। खेत में कुछ दूरी पर पपीते के पौधे लगाए जा सकते हैं। वहीं बांस के सहारे कुंदरू जैसी बेल वाली फसल को ऊपर चढ़ाया जा सकता है। इस तरह जमीन के नीचे, जमीन के पास और ऊपर अलग-अलग स्तरों का उपयोग करके कई फसलें उगाने का प्रयास किया जाता है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
आकाश चौरसिया की मल्टीलेयर खेती तकनीक
आकाश चौरसिया के खेती मॉडल में फसलों का चयन और उनका संयोजन महत्वपूर्ण है। ऐसी फसलों को एक साथ लगाने का प्रयास किया जाता है, जिनकी ऊंचाई और जड़ प्रणाली अलग-अलग हो तथा वे एक-दूसरे के विकास में अधिक बाधा न बनें। अदरक जमीन के अंदर तैयार होती है, जबकि चौलाई जमीन के ऊपर कम ऊंचाई पर बढ़ती है। पपीता ऊंचाई पर फल देता है और कुंदरू जैसी बेल को सहारे के ऊपर चढ़ाया जा सकता है। इस तरह किसान एक ही खेत की अलग-अलग जगह और ऊंचाई का उपयोग करने की कोशिश करता है।
देशी बीजों का इस्तेमाल
आकाश चौरसिया खेती में देशी बीजों के इस्तेमाल पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बीज क्षेत्र के मौसम और वातावरण के साथ बेहतर तरीके से अनुकूल हो सकते हैं। खासकर कम पानी वाले क्षेत्रों में किसान को ऐसी फसलों और बीजों का चुनाव करना चाहिए, जो स्थानीय जलवायु के अनुसार उपयुक्त हों। हालांकि बीज का चयन करते समय उसकी गुणवत्ता और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
पॉलीहाउस की जगह प्राकृतिक मंडप
मल्टीलेयर खेती में फसलों को सहारा देने और मौसम से कुछ सुरक्षा देने के लिए मंडप तैयार किया जा सकता है। आकाश चौरसिया के मॉडल में बांस और घास जैसे स्थानीय संसाधनों से मंडप तैयार करने की बात कही जाती है। इस तरह की संरचना बेल वाली फसलों को सहारा देने के साथ तेज धूप, बारिश और ओलावृष्टि से कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है। स्थानीय संसाधनों का उपयोग करने से संरचना पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
मल्टीलेयर खेती में इन बातों का रखें ध्यान
मल्टीलेयर खेती शुरू करने से पहले फसलों का सही संयोजन करना बेहद जरूरी है। किसान को पौधों की ऊंचाई, जड़ों की गहराई, पानी की जरूरत और फसल की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। यदि जमीन के अंदर अदरक जैसी फसल लगी है, तो उसके ऊपर वाली फसल को निकालते समय सावधानी बरतनी चाहिए। गलत तरीके से फसल निकालने पर नीचे मौजूद मुख्य फसल की जड़ों को नुकसान हो सकता है। खेत की नियमित निगरानी, निराई-गुड़ाई और जरूरत के अनुसार सिंचाई भी जरूरी है। किसी भी रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर समय रहते कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
जमीन को ढककर रखने से खरपतवार पर नियंत्रण
मल्टीलेयर खेती में जब ऊपर वाली फसलें अच्छी तरह विकसित हो जाती हैं, तो खेत की जमीन का काफी हिस्सा पौधों और पत्तियों से ढक जाता है। इससे खाली जगह कम हो सकती है और खरपतवार के विकास को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि हर खेत की मिट्टी और मौसम अलग होता है, इसलिए किसान को नियमित रूप से खेत की निगरानी करनी चाहिए।
वर्मी कंपोस्ट से अतिरिक्त कमाई
आकाश चौरसिया खेती के साथ पशुपालन को भी जोड़ते हैं। उनके पास गाय हैं और उनसे मिलने वाले गोबर तथा मूत्र का इस्तेमाल खेती से जुड़े कार्यों में किया जाता है। गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जा सकता है। वहीं गोमूत्र का इस्तेमाल जैविक कृषि इनपुट तैयार करने में किया जाता है। इससे किसान अपनी खेती के लिए जैविक खाद तैयार करने के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत भी बना सकता है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
मल्टीलेयर खेती से लाखों की कमाई
आकाश चौरसिया के अनुसार, मल्टीलेयर खेती से उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त होती है। इसके अलावा वर्मी कंपोस्ट और दूध की बिक्री से भी आय होती है। मल्टीलेयर खेती में किसान एक ही जमीन से अलग-अलग फसलों का उत्पादन लेकर आय के कई अवसर तैयार कर सकता है। हालांकि हर किसान की कमाई समान नहीं होगी। जमीन का आकार, फसल का चयन, उत्पादन, लागत, मौसम और बाजार भाव जैसे कई कारक कमाई को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी भी खेती मॉडल को अपनाने से पहले उसकी लागत और संभावित बाजार को समझना जरूरी है।
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एक खेत से कई फसलों का उत्पादन
मल्टीलेयर खेती की खासियत यह है कि किसान एक ही जमीन पर अलग-अलग स्तरों का उपयोग करके कई फसलें लेने का प्रयास करता है। यदि एक फसल का बाजार भाव कम हो जाए, तो दूसरी फसल से आय मिलने की संभावना बनी रह सकती है। इससे किसान की एक ही फसल पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि इसके लिए फसल चयन के साथ-साथ बाजार की मांग, बिक्री व्यवस्था और उत्पादन लागत का भी ध्यान रखना जरूरी है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
किसानों के लिए क्यों खास है यह खेती मॉडल?
मल्टीलेयर खेती किसानों को सीमित जमीन के बेहतर उपयोग का विकल्प देती है। इसमें फसल विविधता बढ़ाने और खेती से आय के कई स्रोत तैयार करने की संभावना रहती है।यदि किसान मल्टीलेयर खेती के साथ पशुपालन, वर्मी कंपोस्ट और स्थानीय संसाधनों का उपयोग भी करता है, तो खेती को एक एकीकृत कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है।आकाश चौरसिया की मल्टीलेयर खेती की कहानी किसानों के लिए प्रेरणादायक है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
एक ही खेत में अलग-अलग स्तर पर फसलें उगाने के साथ पशुपालन और वर्मी कंपोस्ट जैसी गतिविधियों को जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि यह मॉडल हर किसान के लिए बिल्कुल एक जैसा नहीं हो सकता। किसानों को अपनी मिट्टी, पानी, मौसम और स्थानीय बाजार के अनुसार फसल संयोजन तय करना चाहिए। छोटे क्षेत्र से शुरुआत करके परिणाम देखने और कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेने के बाद खेती का विस्तार करना बेहतर विकल्प हो सकता है। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
FAQs
मल्टीलेयर खेती क्या है?
मल्टीलेयर खेती एक बहुस्तरीय खेती पद्धति है, जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग ऊंचाई और स्तर पर कई प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
आकाश चौरसिया की खेती कहां है?
आकाश चौरसिया मध्य प्रदेश के सागर जिले से जुड़े हैं और उन्होंने मल्टीलेयर खेती का मॉडल विकसित किया है।
मल्टीलेयर खेती में कौन-कौन सी फसलें लगाई जा सकती हैं?
क्षेत्र और मौसम के अनुसार अदरक, चौलाई, पपीता और कुंदरू जैसी फसलों का संयोजन किया जा सकता है।
क्या मल्टीलेयर खेती से लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं?
इस खेती से आय बढ़ाने की संभावना हो सकती है, लेकिन वास्तविक कमाई जमीन, उत्पादन, लागत, फसल चयन और बाजार भाव पर निर्भर करती है।
क्या मल्टीलेयर खेती कम लागत में की जा सकती है?
स्थानीय संसाधनों जैसे बांस और घास का उपयोग करके संरचना की लागत को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा सकता है। वास्तविक लागत क्षेत्र और खेती के मॉडल के अनुसार अलग-अलग होगी। Success Story of Multilayer Farming Aakash Chaurasia in MP
