किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ABS?,जैव विविधता के लिए जारी हुए 3.79 करोड़ रुपये Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ABS?,जैव विविधता के लिए जारी हुए 3.79 करोड़ रुपये Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai

Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai भारत के खेतों में उगने वाली फसलें, पारंपरिक बीज, पौधे और देशी पशु नस्लें देश की महत्वपूर्ण जैविक संपदा हैं। इन संसाधनों का इस्तेमाल कंपनियां रिसर्च, नई किस्मों के विकास और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करती हैं। ऐसे इस्तेमाल से होने वाले लाभ का एक हिस्सा जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हित में खर्च किया जाता है।अगर आप जानना चाहते हैं कि Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai, तो आसान भाषा में समझें कि यह ऐसी व्यवस्था है, जिसमें जैविक संसाधनों के इस्तेमाल से मिलने वाले आर्थिक लाभ का एक हिस्सा उनके संरक्षण और संबंधित समुदायों तक पहुंचाया जाता है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने इसी व्यवस्था के तहत करीब 3.79 करोड़ रुपये की ABS राशि जारी की है। इसमें टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, तरबूज, करेला, लौकी, भिंडी और सरसों जैसी फसलों के आनुवंशिक संसाधनों के साथ साहीवाल गाय के आनुवंशिक संसाधन भी शामिल हैं। Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai

Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai?

Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai, इसे समझने के लिए जैविक संसाधनों को समझना जरूरी है। भारत में पाए जाने वाले पौधे, बीज, फसलें, पशु नस्लें और उनसे जुड़े आनुवंशिक संसाधन जैविक संसाधनों का हिस्सा हैं। जब कोई कंपनी या संस्था इन संसाधनों का इस्तेमाल रिसर्च या व्यावसायिक गतिविधियों में करती है और उससे आर्थिक लाभ प्राप्त होता है, तो नियमों के अनुसार उस लाभ का एक हिस्सा जैव विविधता संरक्षण के लिए साझा किया जा सकता है। Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai

इसी व्यवस्था को Access and Benefit Sharing यानी ABS कहा जाता है। सरल शब्दों में, Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai का जवाब है—जैविक संसाधनों के इस्तेमाल से मिलने वाले लाभ का वह हिस्सा, जिसे जैव विविधता संरक्षण और संबंधित हितधारकों के हित में साझा किया जाता है।

3.79 करोड़ रुपये की ABS राशि किन संसाधनों से जुड़ी है?

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने करीब 3.79 करोड़ रुपये की ABS राशि जारी की है। यह पैसा 33 राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्र शासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों और संबंधित संस्थानों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। इस राशि में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, तरबूज, करेला, लौकी, भिंडी और सरसों जैसी फसलों के आनुवंशिक संसाधन शामिल हैं।

इसके अलावा साहीवाल गाय के डीप-फ्रोजन सीमेन से जुड़ी राशि भी इसमें शामिल है। Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai यह जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसका सीधा संबंध भारत के जैविक संसाधनों के संरक्षण और उनके व्यावसायिक इस्तेमाल से मिलने वाले लाभ से है।

टमाटर और मिर्च से जुड़ी बड़ी राशि

जारी की गई ABS राशि में टमाटर और मिर्च से जुड़े आनुवंशिक संसाधनों की बड़ी हिस्सेदारी है। टमाटर के बीजों की किस्मों और हाइब्रिड के लिए करीब 86.56 लाख रुपये की राशि जारी की गई है।मिर्च के बीजों की किस्मों और हाइब्रिड के लिए करीब 83.76 लाख रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा फूलगोभी के लिए करीब 26.98 लाख रुपये, तरबूज के लिए 24.32 लाख रुपये और बैंगन के लिए करीब 7.18 लाख रुपये की राशि शामिल है। Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai

इन संसाधनों के संरक्षण और लाभ साझा करने की प्रक्रिया को समझने के लिए Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai एक महत्वपूर्ण सवाल है, खासकर किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए।

एक कंपनी से कई फसलों के लिए 1.48 करोड़ रुपये

ABS व्यवस्था में Advanta Enterprises Limited से जुड़े जैविक संसाधनों का भी बड़ा हिस्सा शामिल है। कंपनी द्वारा करेला, लौकी, बैंगन, फूलगोभी, हॉट पेपर, भिंडी और टमाटर के जर्मप्लाज्म यानी पौधों की आनुवंशिक सामग्री तक पहुंच के लिए करीब 1.48 करोड़ रुपये की ABS राशि तय हुई है।

इसके अलावा सरसों की किस्मों से जुड़े संसाधनों के लिए करीब 57 हजार रुपये ICAR-NBPGR, नई दिल्ली को दिए गए हैं।साहीवाल गाय के डीप-फ्रोजन सीमेन से संबंधित संसाधन के लिए करीब 98 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है। यह राशि हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से हिसार बोवाइन स्पर्म स्टेशन एंड रिसर्च सेंटर को दी गई है।

Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai और पैसा कहां खर्च होगा?

Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai के साथ यह जानना भी जरूरी है कि इस पैसे का इस्तेमाल कहां किया जाता है। ABS के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग जैव विविधता संरक्षण से जुड़े कार्यों में किया जा सकता है। इसमें People’s Biodiversity Registers यानी पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) तैयार करना और उन्हें अपडेट करना शामिल है। इन रजिस्टरों में किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले पौधों, पशुओं और अन्य जैविक संसाधनों की जानकारी दर्ज की जाती है। Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai

इसके अलावा स्थानीय पौधों और पशु संसाधनों को उनके प्राकृतिक क्षेत्र में संरक्षित करना, बीज और आनुवंशिक संसाधनों को सुरक्षित रखना, Biodiversity Heritage Sites को मजबूत करना और Biodiversity Management Committees की क्षमता बढ़ाना भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

राज्यों को खेती के क्षेत्रफल के आधार पर मिला हिस्सा

ABS राशि अलग-अलग राज्यों में संबंधित फसलों के खेती क्षेत्रफल को ध्यान में रखकर बांटी गई है। जिस राज्य में किसी फसल की खेती का क्षेत्र अधिक है, वहां उस फसल से संबंधित ABS राशि का हिस्सा भी उसी आधार पर निर्धारित किया गया है। इस वितरण में मध्य प्रदेश को 46.93 लाख रुपये मिले हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल को 44.76 लाख रुपये और ओडिशा को 44.08 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

गुजरात को 34.76 लाख रुपये, आंध्र प्रदेश को 29.21 लाख रुपये और बिहार को 29.20 लाख रुपये मिले हैं। कर्नाटक को 21.34 लाख रुपये, छत्तीसगढ़ को 18.49 लाख रुपये, तमिलनाडु को 16.57 लाख रुपये और उत्तर प्रदेश को 16.24 लाख रुपये दिए गए हैं। महाराष्ट्र को 16.15 लाख रुपये, तेलंगाना को 9.24 लाख रुपये, हरियाणा को 8.76 लाख रुपये, असम को 8.49 लाख रुपये, झारखंड को 8.14 लाख रुपये और पंजाब को 7.41 लाख रुपये मिले हैं। राजस्थान के लिए करीब 5.17 लाख रुपये की राशि जारी की गई है।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ABS?

अगर आप Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai समझना चाहते हैं, तो इसका किसानों से संबंध भी जानना जरूरी है। किसानों के खेतों में मौजूद पारंपरिक बीज, स्थानीय फसल किस्में और पशु नस्लें देश की जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कई पारंपरिक किस्मों में ऐसे प्राकृतिक गुण हो सकते हैं, जो भविष्य में बेहतर फसल विकसित करने, बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने और कृषि अनुसंधान में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसी कारण इन संसाधनों का संरक्षण जरूरी है। ABS व्यवस्था के जरिए जैविक संसाधनों के व्यावसायिक इस्तेमाल से मिलने वाले आर्थिक लाभ का एक हिस्सा संरक्षण कार्यों में लगाने की कोशिश की जाती है।

साहीवाल गाय के आनुवंशिक संसाधन भी शामिल

भारत की जैव विविधता केवल फसलों और पौधों तक सीमित नहीं है। देश की अलग-अलग पशु नस्लें भी महत्वपूर्ण आनुवंशिक संसाधन हैं। साहीवाल गाय देश की प्रमुख देशी पशु नस्लों में शामिल है। इसके आनुवंशिक संसाधनों का इस्तेमाल रिसर्च और पशुधन सुधार से जुड़ी गतिविधियों में किया जा सकता है। इसी वजह से ABS व्यवस्था में साहीवाल गाय के सीमेन से जुड़ी राशि भी शामिल की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai का दायरा खेती के साथ-साथ पशुपालन और पशु आनुवंशिक संसाधनों तक भी फैला हुआ है।

जैव विविधता कानून में क्या है प्रावधान?

भारत में जैविक संसाधनों के इस्तेमाल और लाभ साझा करने की व्यवस्था Biological Diversity Act, 2002 के तहत विकसित की गई थी। इसके बाद कानून में संशोधन और नए नियम लागू किए गए हैं।राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के माध्यम से जैविक संसाधनों तक पहुंच और उनसे होने वाले लाभ को साझा करने की व्यवस्था संचालित की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य जैविक संसाधनों के संरक्षण और उनके इस्तेमाल से होने वाले आर्थिक लाभ के बीच संतुलन बनाना है।इसीलिए Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai का जवाब किसानों, कंपनियों, रिसर्च संस्थानों और स्थानीय समुदायों सभी के लिए महत्वपूर्ण है।

जैव विविधता संरक्षण में कैसे मदद मिलेगी?

ABS राशि का इस्तेमाल स्थानीय जैव विविधता की पहचान और संरक्षण को मजबूत करने में किया जा सकता है। इसके जरिए पारंपरिक बीजों और स्थानीय फसल किस्मों का दस्तावेजीकरण किया जा सकता है। स्थानीय पशु नस्लों के संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाने और महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों को संरक्षित करने में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। स्थानीय समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े कार्यों को भी इस व्यवस्था के माध्यम से सहयोग मिल सकता है।

भारत में ABS व्यवस्था क्यों जरूरी है?

भारत कृषि और जैव विविधता की दृष्टि से दुनिया के महत्वपूर्ण देशों में शामिल है। यहां अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में कई प्रकार के पौधे, फसलें और पशु नस्लें पाई जाती हैं।इन संसाधनों का इस्तेमाल रिसर्च और व्यावसायिक क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai का महत्व इसी वजह से बढ़ जाता है, क्योंकि यह व्यवस्था जैविक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले आर्थिक लाभ को संरक्षण कार्यों से जोड़ती है।

3.79 करोड़ रुपये की राशि से क्या संदेश मिलता है?

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की ओर से जारी 3.79 करोड़ रुपये की ABS राशि यह बताती है कि भारत में कृषि फसलों, पारंपरिक संसाधनों और पशु आनुवंशिक संपदा के संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है। टमाटर, मिर्च, फूलगोभी, बैंगन, तरबूज, सरसों और साहीवाल गाय जैसे संसाधनों से जुड़ी राशि का संरक्षण कार्यों में इस्तेमाल होने से स्थानीय जैव विविधता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

आसान भाषा में Access And Benefit Sharing ABS Rashi Kya Hai को समझें तो यह जैविक संसाधनों के इस्तेमाल से मिलने वाले लाभ को साझा करने की ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए रिसर्च और कारोबार से प्राप्त लाभ का एक हिस्सा जैव विविधता और स्थानीय समुदायों के हित में वापस लगाया जाता है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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