कमजोर मॉनसून से खरीफ बुवाई पिछड़ी, 21 लाख हेक्टेयर कम हुआ रकबा Kharif Fasalon Ki Buwai 2026

कमजोर मॉनसून से खरीफ बुवाई पिछड़ी, 21 लाख हेक्टेयर कम हुआ रकबा Kharif Fasalon Ki Buwai 2026

Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 देश में इस साल कमजोर मॉनसून और बारिश के असमान वितरण का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर दिखाई दे रहा है। Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 14 अगस्त तक देश में कुल 1016.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। पिछले साल इसी अवधि में 1037.52 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। इस तरह इस साल कुल खरीफ रकबा करीब 20.95 लाख हेक्टेयर कम है।

Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 में कितनी हुई?

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 में धान, दलहन, श्री अन्न, तिलहन, गन्ना और कपास जैसी प्रमुख फसलों के रकबे में अलग-अलग बदलाव देखने को मिले हैं। कुछ फसलों का क्षेत्रफल घटा है, जबकि कुछ राज्यों में बुवाई बढ़ी है। कमजोर मॉनसून और बारिश के असमान वितरण के कारण कई क्षेत्रों में किसान समय पर बुवाई नहीं कर पाए। हालांकि आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति बेहतर रहने पर खरीफ बुवाई के आंकड़ों में सुधार हो सकता है।

धान की बुवाई 14.37 लाख हेक्टेयर कम

Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 में धान का रकबा सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ों में शामिल है। 14 अगस्त तक देश में 379.07 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है। पिछले साल इसी अवधि में धान का क्षेत्रफल 393.44 लाख हेक्टेयर था। इस तरह धान की बुवाई 14.37 लाख हेक्टेयर कम हुई है। कर्नाटक में 2.86 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 2.26 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 2.25 लाख हेक्टेयर और ओडिशा में 2.09 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। Kharif Fasalon Ki Buwai 2026

असम में धान का रकबा बढ़ा

जहां कई राज्यों में धान का रकबा घटा है, वहीं असम में स्थिति बेहतर रही है। यहां पिछले साल की तुलना में धान का क्षेत्रफल 3.93 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। उत्तराखंड में भी 0.35 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पता चलता है कि Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 पर बारिश की स्थिति का राज्यवार अलग-अलग असर पड़ा है।

दलहन की बुवाई में मामूली गिरावट

दलहन की बुवाई 14 अगस्त तक 108.14 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 108.49 लाख हेक्टेयर था। इस तरह दलहन का रकबा 0.35 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। कर्नाटक में दलहन का रकबा 4.16 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 2.70 लाख हेक्टेयर घटा है। ओडिशा, तमिलनाडु और बिहार में भी दलहन की बुवाई पिछले साल की तुलना में कम रही।

उत्तर प्रदेश में दलहन की बुवाई बढ़ी

दलहन के मामले में उत्तर प्रदेश में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। यहां पिछले साल की तुलना में 4.25 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में दलहन की बुवाई हुई है। राजस्थान में 0.93 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 0.40 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 0.35 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 के दौरान इन राज्यों में दलहन किसानों की ओर से बेहतर रकबा दर्ज किया गया है।

श्री अन्न और मोटे अनाज का रकबा घटा

श्री अन्न और मोटे अनाज की बुवाई का कुल क्षेत्रफल 172.96 लाख हेक्टेयर रहा है। पिछले साल इसी अवधि में यह 177.13 लाख हेक्टेयर था। यानी इस श्रेणी में 4.17 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। कर्नाटक में सबसे अधिक 7 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है। महाराष्ट्र में 2.46 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में 0.59 लाख हेक्टेयर का रकबा घटा है।

राजस्थान में मोटे अनाज की बुवाई बढ़ी

राजस्थान में मोटे अनाज की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पिछले साल की तुलना में 2.15 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में मोटे अनाज की बुवाई हुई है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में भी मोटे अनाज का रकबा बढ़ा है। हालांकि मक्का का क्षेत्रफल 3.67 लाख हेक्टेयर घटकर 88.39 लाख हेक्टेयर रह गया है। दूसरी ओर ज्वार और बाजरे के रकबे में 0.69-0.69 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। Kharif Fasalon Ki Buwai 2026

तिलहन की बुवाई 0.89 लाख हेक्टेयर कम

तिलहन फसलों का कुल रकबा 184.46 लाख हेक्टेयर रहा है। पिछले साल इसी अवधि में यह 185.36 लाख हेक्टेयर था। इस तरह तिलहन की बुवाई 0.89 लाख हेक्टेयर कम हुई है। राजस्थान में तिलहन का रकबा सबसे ज्यादा 3.40 लाख हेक्टेयर घटा है। गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी कमी दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में तिलहन का क्षेत्रफल 3.89 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। मध्य प्रदेश में 0.68 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 के आंकड़ों में मूंगफली और तिल की बुवाई में बढ़ोतरी भी देखने को मिली है।

मूंगफली और तिल का रकबा बढ़ा

तिलहन फसलों में मूंगफली का रकबा 1.02 लाख हेक्टेयर और तिल का रकबा 1.63 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। दूसरी ओर सोयाबीन का क्षेत्रफल 1.76 लाख हेक्टेयर और अरंडी का रकबा 2.35 लाख हेक्टेयर घटा है। इससे साफ है कि तिलहन क्षेत्र में सभी फसलों का रुझान एक जैसा नहीं रहा है।

गन्ने की बुवाई भी थोड़ी कम

गन्ने का क्षेत्रफल इस साल 58.31 लाख हेक्टेयर रहा है। पिछले साल इसी अवधि में यह 58.62 लाख हेक्टेयर था। यानी गन्ने का रकबा 0.31 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पंजाब और मध्य प्रदेश में गन्ने का रकबा घटा है। वहीं उत्तर प्रदेश में 0.36 लाख हेक्टेयर और हरियाणा में 0.11 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।

कपास की बुवाई भी पीछे

कपास का क्षेत्रफल 14 अगस्त तक 107.30 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 108.26 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कपास का रकबा 0.96 लाख हेक्टेयर कम है। राजस्थान में कपास का रकबा 1.09 लाख हेक्टेयर, हरियाणा में 0.90 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 0.43 लाख हेक्टेयर घटा है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी कपास का क्षेत्रफल कम हुआ है।

तेलंगाना में कपास की बुवाई बढ़ी

तेलंगाना में कपास का रकबा पिछले साल की तुलना में 1.25 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। गुजरात में भी 0.64 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद देश में कपास का कुल क्षेत्रफल पिछले साल से कम है। Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 में कपास की स्थिति भी मॉनसून और राज्यवार बारिश के प्रभाव को दर्शाती है।

जूट-मेस्ता का रकबा बढ़ा

जूट और मेस्ता का कुल रकबा 6.34 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल के 6.23 लाख हेक्टेयर से 0.11 लाख हेक्टेयर अधिक है। बिहार में इस बढ़ोतरी में प्रमुख योगदान रहा है।

Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 पर मॉनसून का असर

कुल आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल मॉनसून की धीमी शुरुआत और बारिश के असमान वितरण का असर खरीफ बुवाई पर पड़ा है। धान, मक्का, श्री अन्न, तिलहन और कपास जैसी कई प्रमुख फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में कम है। हालांकि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, असम और तेलंगाना जैसे राज्यों में कुछ प्रमुख फसलों के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी भी हुई है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और बची हुई बुवाई के आधार पर Kharif Fasalon Ki Buwai 2026 की अंतिम तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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