सूरजमुखी, सोयाबीन और मक्का का रकबा बढ़ा,महाराष्ट्र में 93% क्षेत्र में खरीफ बुवाई पूरी Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026

सूरजमुखी, सोयाबीन और मक्का का रकबा बढ़ा,महाराष्ट्र में 93% क्षेत्र में खरीफ बुवाई पूरी Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026

महाराष्ट्र में Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026 अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य में कुल 144.36 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले करीब 93 फीसदी क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। किसानों ने बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में सोयाबीन, मक्का और सूरजमुखी जैसी फसलों का रकबा बढ़ाया है। वहीं, जून में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण मूंग और उड़द की बुवाई प्रभावित हुई है। कुछ किसानों ने दलहनी फसलों की जगह सूरजमुखी, सोयाबीन और मक्का की खेती का रुख किया है।

सूरजमुखी की बुवाई में तेजी

Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026 के दौरान सूरजमुखी की खेती में इस बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1.16 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले करीब 83 फीसदी क्षेत्र में सूरजमुखी की बुवाई हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में सूरजमुखी की बुवाई सिर्फ 37 फीसदी क्षेत्र में हुई थी। इस बार बारिश की स्थिति और किसानों के फसल चयन में बदलाव के कारण सूरजमुखी का रकबा तेजी से बढ़ा है। Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026

मूंग और उड़द की बुवाई पिछड़ी

महाराष्ट्र में मूंग और उड़द की बुवाई इस सीजन काफी पीछे है। मूंग की बुवाई 3.02 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य का करीब 48 फीसदी क्षेत्र में हुई है। वहीं, उड़द की बुवाई 3.59 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य का करीब 48 फीसदी क्षेत्र में ही हो पाई है। कृषि विभाग के अनुसार, मूंग और उड़द की बुवाई के लिए जून के मध्य तक पर्याप्त नमी मिलना जरूरी होता है। बारिश में देरी के कारण किसानों को इन फसलों की बुवाई में परेशानी हुई। Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026

तुअर की बुवाई रही बेहतर

Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026 में तुअर की स्थिति अपेक्षाकृत अच्छी रही है। राज्य में 12.77 लाख हेक्टेयर से अधिक के लक्ष्य में से करीब 93 फीसदी क्षेत्र में तुअर की बुवाई हो चुकी है। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे के मुताबिक, मूंग और उड़द की तुलना में तुअर का खेती क्षेत्र अधिक है और इस साल इसकी बुवाई संतोषजनक रही है।

सोयाबीन और मक्का का रकबा बढ़ा

महाराष्ट्र के किसानों ने बेहतर बाजार भाव की उम्मीद में सोयाबीन और मक्का की खेती का रकबा बढ़ाया है। इन दोनों फसलों की बुवाई इस खरीफ सीजन अच्छी रही है। अगस्त में हुई अच्छी बारिश से फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है। पर्याप्त नमी से फसलों के अंकुरण और शुरुआती विकास में भी मदद मिल सकती है।

खरीफ बुवाई का आंकड़ा 3-4% और बढ़ने की उम्मीद

राज्य में Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026 अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। कृषि विभाग को उम्मीद है कि धान की रोपाई पूरी होने के बाद कुल खरीफ बुवाई का आंकड़ा 3 से 4 फीसदी तक और बढ़ सकता है। इस साल राज्य में खरीफ फसलों के लिए कुल 144.36 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से करीब 93 फीसदी क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। पिछले साल इसी समय तक करीब 98 फीसदी क्षेत्र में बुवाई हो गई थी। Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026

चार जिलों में घटा खरीफ फसलों का रकबा

नंदुरबार, गढ़चिरौली, सोलापुर और कोल्हापुर जिलों में पिछले साल की तुलना में इस बार खरीफ फसलों की बुवाई कम हुई है। बारिश की स्थिति और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के कारण इन जिलों में किसानों के फसल चयन पर असर पड़ा है। Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026

बारिश से खरीफ फसलों को राहत

जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दोबारा सक्रिय होने और अगस्त में कई जिलों में अच्छी बारिश होने से खरीफ फसलों को राहत मिली है। इससे खेतों में नमी की स्थिति बेहतर हुई है और फसलों के विकास में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मूंग और उड़द की शुरुआती बुवाई में हुई देरी के कारण इन फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई की स्थिति

Maharashtra Kharif Fasal Ki Buwai 2026 के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में खरीफ सीजन की बुवाई लगभग पूरी होने वाली है। सूरजमुखी, सोयाबीन, मक्का और तुअर जैसी फसलों की स्थिति अच्छी रही है, जबकि मूंग और उड़द की बुवाई बारिश की कमी के कारण पिछड़ी है। आने वाले दिनों में बारिश और मौसम की स्थिति खरीफ फसलों के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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