मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हृदेश राय और अभिषेक विश्वकर्मा ने आईटी सेक्टर की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर कृषि क्षेत्र में कदम रखा। दोनों ने वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद के कारोबार को चुना और किसानों को अपने बिजनेस मॉडल से जोड़कर आज एक सफल कंपनी खड़ी कर दी है। Vermicompost Business Success Story in MP की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी के बजाय कृषि आधारित व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान साल 2020 में जब देशभर में लोग अपने घरों में रहने को मजबूर थे, उसी समय हृदेश राय और अभिषेक विश्वकर्मा ने कृषि क्षेत्र में कारोबार शुरू करने का फैसला किया। आज उनकी कंपनी केंचुआ ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपये बताया जाता है। Vermicompost Business Success Story in MP
लाखों रुपये की नौकरी छोड़ कृषि से जुड़े दोनों युवा
हृदेश राय कोविड से पहले आईटी सेक्टर में नौकरी करते थे। नौकरी और अन्य निवेश से उनकी सालाना आय करीब 12 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी। वहीं, उनके बिजनेस पार्टनर अभिषेक विश्वकर्मा दिल्ली में सैमसंग कंपनी में कार्यरत थे और उनका सालाना पैकेज करीब 25 लाख रुपये बताया गया है। महामारी के दौरान दोनों ने किसानों को लगातार खेतों में काम करते हुए देखा। खेती से जुड़ने की इसी सोच ने उन्हें वर्मी कंपोस्ट के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया। यही Vermicompost Business Success Story in MP की शुरुआत थी।
YouTube से सीखी वर्मी कंपोस्ट बनाने की तकनीक
वर्मी कंपोस्टिंग का काम करने वाले एक परिचित से दोनों को शुरुआत में इस व्यवसाय की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई और YouTube वीडियो की मदद से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया सीखी। शुरुआत में दोनों ने छोटे स्तर पर खुद खाद बनाकर प्रयोग किया। धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि बाजार में वर्मी कंपोस्ट की मांग उनकी उत्पादन क्षमता से काफी ज्यादा है। Vermicompost Business Success Story in MP
इसके बाद उन्होंने अपना बिजनेस मॉडल बदलने का फैसला किया। यही बदलाव आगे चलकर Vermicompost Business Success Story in MP का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना, क्योंकि दोनों ने केवल खुद उत्पादन करने के बजाय किसानों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया।
किसानों को जोड़कर बनाया अनोखा बिजनेस मॉडल
हृदेश राय और अभिषेक विश्वकर्मा ने ऐसे किसानों से तैयार वर्मी कंपोस्ट खरीदना शुरू किया, जिन्हें अपनी खाद बेचने के लिए उचित बाजार नहीं मिल पा रहा था। कंपनी किसानों से तैयार खाद खरीदती है और गुणवत्ता की जांच करने के बाद उसे अलग-अलग बाजारों में सप्लाई करती है। जबलपुर के अलावा नागपुर, नीमच और अन्य क्षेत्रों के किसान भी इस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
किसानों का उत्पादन मिलाकर सालाना 6 हजार टन से अधिक वर्मी कंपोस्ट के कारोबार की जानकारी सामने आई है। किसानों के साथ मिलकर काम करने वाला यह मॉडल Vermicompost Business Success Story in MP को खास बनाता है। इससे किसानों को बाजार मिलता है और कंपनी को लगातार उत्पाद की उपलब्धता बनी रहती है।
2022 में रजिस्टर्ड कराई कंपनी
कारोबार को व्यवस्थित रूप देने के लिए हृदेश राय और अभिषेक विश्वकर्मा ने साल 2022 में केंचुआ ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी रजिस्टर्ड करवाई। शुरुआत में दोनों ने अपना प्लांट लगाकर वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन किया था। हालांकि, बाद में उन्होंने किसानों के साथ काम करने वाला मॉडल अपनाया। अब कंपनी किसानों से तैयार खाद खरीदती है और उसकी गुणवत्ता जांच के बाद ग्राहकों को सप्लाई करती है। यह बिजनेस मॉडल Vermicompost Business Success Story in MP में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि कृषि क्षेत्र में किसानों को सप्लाई चेन से जोड़कर भी बड़ा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है। Vermicompost Business Success Story in MP
एसेनिया फेटिडा केंचुओं से तैयार होती है खाद
वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए एसेनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुओं का इस्तेमाल किया जाता है। हृदेश के अनुसार भारतीय जलवायु में यह प्रजाति वर्मी कंपोस्टिंग के लिए अनुकूल मानी जाती है। कंपनी ने खाद की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अपना क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम भी तैयार किया है। किसानों से खाद खरीदने के बाद निर्धारित गुणवत्ता और सामग्री के मानकों के अनुसार उसकी जांच की जाती है। गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरने वाली खाद को ही बाजार में भेजा जाता है। गुणवत्ता पर ध्यान देना Vermicompost Business Success Story in MP की एक अहम वजह है, क्योंकि कृषि उत्पादों के कारोबार में ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
राजस्थान से दक्षिण भारत तक हो रही सप्लाई
हृदेश राय के मुताबिक उनकी केंचुआ खाद की मांग केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। उनकी कंपनी राजस्थान, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और जम्मू-कश्मीर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में वर्मी कंपोस्ट की सप्लाई कर रही है। विभिन्न कंपनियों और संस्थानों को भी वर्मी कंपोस्ट उपलब्ध कराया गया है। कारोबार बढ़ने के साथ ऑर्डर लेने और सप्लाई का ज्यादातर काम फोन के जरिए होने लगा है।
हृदेश के अनुसार करीब 90 फीसदी ऑर्डर फोन पर ही मिल जाते हैं। कारोबार बढ़ने के बाद उन्होंने जबलपुर के आधारताल क्षेत्र में अपना कार्यालय बंद कर दिया और अब घर से ही कारोबार का संचालन कर रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंची यह सप्लाई Vermicompost Business Success Story in MP को एक बड़े कृषि व्यवसाय के रूप में सामने लाती है।
सालाना 1.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर
हृदेश राय के अनुसार केंचुआ ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपये है। इसमें से करीब 20 से 25 लाख रुपये का मुनाफा होने की बात बताई गई है। बाकी राशि कच्चे माल, उत्पादन, किसानों से खरीद, मार्केटिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियों में खर्च होती है। इस तरह दोनों युवाओं ने अपनी नौकरी छोड़कर कृषि क्षेत्र में ऐसा कारोबार खड़ा किया, जिसका नेटवर्क अब कई राज्यों तक पहुंच चुका है। 1.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर Vermicompost Business Success Story in MP को युवाओं के लिए एक उल्लेखनीय कृषि उद्यम की कहानी बनाता है।
10 लाख रुपये के लोन से बढ़ाया कारोबार
कारोबार को विस्तार देने के लिए साल 2022 में हृदेश राय ने आईडीबीआई बैंक से करीब 10 लाख रुपये का लोन लिया। यह ऋण भारत सरकार की क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज यानी CGTMSE योजना के तहत लिया गया था। इस वित्तीय सहायता ने कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद की। छोटे स्तर पर शुरू हुआ वर्मी कंपोस्ट का व्यवसाय धीरे-धीरे किसानों के बड़े नेटवर्क और देशभर में सप्लाई तक पहुंच गया। वित्तीय सहायता और बेहतर बिजनेस मॉडल का संयोजन Vermicompost Business Success Story in MP से यह सीख देता है कि सही योजना के साथ कृषि आधारित छोटे व्यवसाय को भी बड़े स्तर तक ले जाया जा सकता है।
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किसानों के लिए भी बना बाजार का मजबूत जरिया
हृदेश और अभिषेक का मॉडल केवल वर्मी कंपोस्ट बेचने तक सीमित नहीं है। इसमें किसानों को भी कारोबार की मुख्य कड़ी बनाया गया है। किसान वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं और कंपनी उनके तैयार माल को खरीदकर बाजार तक पहुंचाती है। इससे किसानों को तैयार खाद बेचने के लिए अलग-अलग ग्राहकों की तलाश नहीं करनी पड़ती। कंपनी गुणवत्ता जांच, मार्केटिंग और सप्लाई का काम संभालती है। इस तरह दोनों पक्षों के बीच एक व्यवस्थित कारोबारी नेटवर्क तैयार हुआ है। किसानों के साथ बनाया गया यह नेटवर्क Vermicompost Business Success Story in MP को दूसरे कृषि उद्यमियों के लिए भी एक उपयोगी उदाहरण बनाता है।
नौकरी से बिजनेस तक का सफर युवाओं के लिए प्रेरणा
हृदेश राय और अभिषेक विश्वकर्मा की कहानी बताती है कि कृषि क्षेत्र में रोजगार और बिजनेस के नए अवसर मौजूद हैं। दोनों ने आईटी सेक्टर की अच्छी नौकरी छोड़कर वर्मी कंपोस्ट का व्यवसाय चुना और शुरुआत में खुद उत्पादन करने के बाद किसानों को जोड़कर अपना कारोबार बढ़ाया। आज उनका कारोबार कई राज्यों तक पहुंच चुका है और कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपये बताया गया है। Vermicompost Business Success Story in MP उन युवाओं के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक है, जो कृषि क्षेत्र में कुछ नया करने और किसानों के साथ मिलकर व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं।
FAQ
हृदेश राय और अभिषेक विश्वकर्मा ने कौन सा बिजनेस शुरू किया?
दोनों ने वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद का कारोबार शुरू किया और बाद में किसानों को अपने नेटवर्क से जोड़कर व्यवसाय का विस्तार किया।
Vermicompost Business Success Story in MP किसकी है?
यह कहानी मध्य प्रदेश के जबलपुर के हृदेश राय और उनके बिजनेस पार्टनर अभिषेक विश्वकर्मा की है, जिन्होंने आईटी की नौकरी छोड़कर वर्मी कंपोस्ट व्यवसाय शुरू किया।
उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर कितना है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार केंचुआ ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपये है।
वर्मी कंपोस्ट के लिए किस केंचुए का इस्तेमाल होता है?
वर्मी कंपोस्ट तैयार करने में एसेनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुओं का इस्तेमाल किया जाता है।
वर्मी कंपोस्ट की सप्लाई कहां होती है?
कंपनी के अनुसार राजस्थान, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई हिस्सों में वर्मी कंपोस्ट की सप्लाई की जाती है।
इस बिजनेस में किसानों की क्या भूमिका है?
किसान कंपनी के लिए वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं। कंपनी उनसे तैयार खाद खरीदती है, गुणवत्ता की जांच करती है और इसके बाद बाजार में सप्लाई करती है।
