Hari Mirch Ke Kam Bhav मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में हरी मिर्च की खेती करने वाले किसानों की परेशानी बढ़ गई है। Hari Mirch Ke Kam Bhav के कारण किसानों के लिए खेती की लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। टांडा बरुड़ के किसान प्रदीप रामकृष्ण कुमरावत ने कम बाजार भाव और फसल में वायरस की समस्या से परेशान होकर दो एकड़ में खड़ी हरी मिर्च की फसल पर रोटावेटर चला दिया।
किसान के मुताबिक, मंडी में हरी मिर्च का भाव इस समय करीब 7 से 8 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। वहीं फसल की तुड़ाई पर ही 5 से 6 रुपये प्रति किलो तक खर्च हो रहा है। खाद, बीज, सिंचाई, कीटनाशक, मजदूरी और परिवहन का खर्च जोड़ने के बाद किसानों के लिए मुनाफा कमाना तो दूर, लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। Hari Mirch Ke Kam Bhav
Hari Mirch Ke Kam Bhav ने बढ़ाई किसानों की चिंता
खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर टांडा बरुड़ के किसान प्रदीप कुमरावत ने बताया कि मौजूदा भाव में फसल की तुड़ाई कर बाजार तक पहुंचाने से फायदा नहीं हो रहा है। इसी वजह से उन्होंने दो एकड़ की खड़ी फसल को खेत में ही नष्ट करने का फैसला लिया। किसान का कहना है कि उत्पादन पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है। इसके बाद यदि फसल को तोड़ने के लिए मजदूरी और परिवहन का खर्च भी जोड़ दिया जाए, तो कम कीमत पर मिर्च बेचने से नुकसान और बढ़ जाता है। Hari Mirch Ke Kam Bhav
तुड़ाई की मजदूरी ही 5 से 6 रुपये प्रति किलो
हरी मिर्च की खेती में तुड़ाई पर किसानों को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। किसान प्रदीप के अनुसार, मजदूरों को मिर्च तोड़ने के लिए 5 से 6 रुपये प्रति किलो तक देना पड़ रहा है। जब बाजार में मिर्च का भाव केवल 7 से 8 रुपये प्रति किलो मिल रहा हो, तो तुड़ाई के बाद किसान के पास बहुत कम रकम बचती है। इसमें खाद, बीज, पानी और कीटनाशक का खर्च शामिल करने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है। Hari Mirch Ke Kam Bhav
फसल में वायरस की समस्या ने बढ़ाई परेशानी
कम बाजार भाव के साथ हरी मिर्च की फसल में वायरस की समस्या भी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। किसान प्रदीप कुमरावत ने अपनी फसल में वायरस लगने की जानकारी दी है। वायरस के कारण फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। बीमारी से बचाव के लिए किसानों को अतिरिक्त कृषि खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में पहले से Hari Mirch Ke Kam Bhav से परेशान किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है।
फसल की जांच के लिए भेजी जाएगी टीम
उद्यानिकी विभाग के उप संचालक केके गिरवाल ने बताया कि हरी मिर्च में वायरस की समस्या की सूचना विभाग को मिली है। उन्होंने कहा कि देवली क्षेत्र में टीम भेजकर फसल की स्थिति की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में वायरस से फसल को नुकसान होने की पुष्टि होती है, तो वैज्ञानिकों की मदद से भी इसकी जांच कराई जाएगी। इससे फसल में बीमारी की वास्तविक स्थिति और नुकसान का पता लगाने में मदद मिलेगी। Hari Mirch Ke Kam Bhav
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किसानों ने सरकार से राहत की मांग की
देवली के किसान दशरथ राठौर ने बताया कि हरी मिर्च की खेती में तुड़ाई के साथ खाद, पानी और कीटनाशक पर भी काफी खर्च होता है। कम भाव और बीमारी के कारण किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि फसल खराब होने की स्थिति में उन्हें पर्याप्त राहत या मुआवजा नहीं मिल पाता। उन्होंने सरकार से हरी मिर्च उत्पादक किसानों को राहत देने और फसल में वायरस की समस्या का समाधान कराने की मांग की है। Hari Mirch Ke Kam Bhav
कम भाव ने बढ़ाई हरी मिर्च की खेती की मुश्किलें
खरगोन में Hari Mirch Ke Kam Bhav ने किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। एक ओर उत्पादन और तुड़ाई की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर बाजार में मिर्च की कीमत कम मिल रही है। ऐसे में किसानों के लिए फसल को खेत से बाजार तक पहुंचाना चुनौती बन गया है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार और संबंधित विभाग बाजार भाव, फसल रोग और खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं पर जल्द ध्यान देंगे, ताकि हरी मिर्च की खेती करने वाले किसानों को राहत मिल सके।
