आजीविका मिशन से बदली सोनभद्र की निर्मला की जिंदगी, मजदूरी छोड़ कमा रहीं सालाना ढाई लाख रुपये Aajeevika Mission Mahila Success Story UP

आजीविका मिशन से बदली सोनभद्र की निर्मला की जिंदगी, मजदूरी छोड़ कमा रहीं सालाना ढाई लाख रुपये Aajeevika Mission Mahila Success Story UP

Aajeevika Mission Mahila Success Story UP: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की निर्मला की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। कभी परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करने वाली निर्मला आज अपना कारोबार चला रही हैं और सालाना करीब ढाई लाख रुपये कमा रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने, प्रशिक्षण लेने और सरकारी सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपने हुनर को रोजगार में बदल दिया।

Aajeevika Mission Mahila Success Story UP के तौर पर निर्मला की कहानी यह बताती है कि अगर ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बाजार का अवसर मिले तो वे भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। आज वह मोमबत्ती के साथ कई तरह के खाद्य उत्पाद तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं।

Aajeevika Mission Mahila Success Story UP बनी निर्मला की कहानी

सोनभद्र के बिचपई गांव की रहने वाली निर्मला बीए तक पढ़ी हैं। परिवार में पति, तीन बेटियां और एक बेटा है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें मजदूरी करनी पड़ती थी। घर की जिम्मेदारियों के साथ बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च संभालना आसान नहीं था। इसी दौरान निर्मला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। उन्होंने मोमबत्ती बनाने की ट्रेनिंग ली और इसी हुनर को कारोबार में बदलने का फैसला किया।

60 हजार रुपये की सीड मनी से शुरू हुआ कारोबार

निर्मला के प्रयासों को देखते हुए उद्यमिता विकास परियोजना की टीम ने उन्हें 60 हजार रुपये की सीड मनी यानी शुरुआती आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इस राशि से उन्होंने अलग-अलग डिजाइन की मोमबत्तियां बनाने के लिए सांचे खरीदे। इसके बाद उन्होंने दीपावली और अन्य त्योहारों के दौरान आकर्षक मोमबत्तियां बनाकर बेचनी शुरू कीं। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ी और उन्होंने इसे नियमित व्यवसाय का रूप दे दिया। फूल, पेड़ और दूसरी सजावटी आकृतियों वाली रंग-बिरंगी मोमबत्तियां उनकी पहचान बन गईं। स्थानीय बाजार में मांग बढ़ने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता गया। Aajeevika Mission Mahila Success Story UP

मोमबत्ती के साथ शुरू किए कई और काम

निर्मला ने कारोबार को बढ़ाने के लिए नए उत्पादों को भी अपने व्यवसाय से जोड़ा। खादी ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग से उन्हें पॉपकॉर्न मशीन मिली। इससे उनके पास कमाई का एक और साधन जुड़ गया। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से दो महीने की ट्रेनिंग लेकर उन्होंने खाद्य उत्पाद तैयार करना सीखा। अब वह गुलाब का गुलकंद, शरबत और गाजर का मुरब्बा भी तैयार करती हैं। मौसम और बाजार की मांग के अनुसार वह अलग-अलग उत्पादों का उत्पादन करती हैं। इससे उनकी आमदनी के कई स्रोत बन गए हैं और कारोबार पहले के मुकाबले अधिक मजबूत हुआ है। Aajeevika Mission Mahila Success Story UP

सालाना ढाई लाख रुपये तक पहुंची कमाई

निर्मला की मेहनत और सरकारी सहायता का असर उनकी आमदनी पर भी दिखाई दिया। कभी मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाने वाली निर्मला आज अपने कारोबार से सालाना करीब ढाई लाख रुपये कमा रही हैं। Aajeevika Mission Mahila Success Story UP में उनकी कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने एक छोटे स्तर से कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे कई उत्पादों को अपने व्यवसाय से जोड़ लिया। अब निर्मला अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे ऑनलाइन बाजार तक पहुंचाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य कारोबार का विस्तार करने के साथ ज्यादा ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचाना है। Aajeevika Mission Mahila Success Story UP

निर्मला की सफलता से गांव की महिलाएं भी हुईं प्रेरित

निर्मला की सफलता का असर बिचपई गांव की दूसरी महिलाओं पर भी पड़ा है। उनके काम से प्रेरित होकर करीब 12 से 15 महिलाएं रोजगार और अपना व्यवसाय शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं का आर्थिक गतिविधियों से जुड़ना परिवार की आय बढ़ाने के साथ उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत करता है। निर्मला के मुताबिक, पहले गांव की कई महिलाएं घर और घूंघट तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब वे काम करने और रोजगार से जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं। आमदनी बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल रही है। निर्मला के पति भी उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। Aajeevika Mission Mahila Success Story UP

Aajeevika Mission Mahila Success Story UP से मिला आत्मनिर्भरता का संदेश

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके जरिए महिलाएं कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, पशुपालन और अन्य छोटे कारोबार शुरू कर रही हैं। सोनभद्र की निर्मला इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल हैं।

Aajeevika Mission Mahila Success Story UP यह दिखाती है कि सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण और महिला की मेहनत का सही मेल हो तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की महिला भी सफल उद्यमी बन सकती है। मजदूरी से शुरू हुआ निर्मला का सफर आज अपने कारोबार और सालाना ढाई लाख रुपये की कमाई तक पहुंच चुका है। उनकी सफलता अब गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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