खरीफ बुवाई में 18.91 लाख हेक्टेयर की कमी, धान का रकबा 14.36 लाख हेक्टेयर घटा, दलहन ने दिखाया दम Kharif Fasal Ki Buwai 2026

खरीफ बुवाई में 18.91 लाख हेक्टेयर की कमी, धान का रकबा 14.36 लाख हेक्टेयर घटा, दलहन ने दिखाया दम Kharif Fasal Ki Buwai 2026

देश में Kharif Fasal Ki Buwai 2026 इस साल पिछले वर्ष की तुलना में पीछे चल रही है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 28 अगस्त 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई 1071.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1090.01 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल खरीफ फसलों का रकबा 18.91 लाख हेक्टेयर कम रहा है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026

देश में खरीफ फसलों का सामान्य बुवाई क्षेत्र 1104.25 लाख हेक्टेयर है। इस लिहाज से मौजूदा आंकड़ा सामान्य स्तर से भी कम है। कमजोर मॉनसून और कई राज्यों में असमान बारिश को खरीफ बुवाई में आई कमी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

Kharif Fasal Ki Buwai 2026 में धान का रकबा सबसे ज्यादा घटा

Kharif Fasal Ki Buwai 2026 के आंकड़ों में सबसे बड़ी गिरावट धान के क्षेत्रफल में देखने को मिली है। 28 अगस्त तक देश में 414.10 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 428.46 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया था। इस तरह धान का रकबा 14.36 लाख हेक्टेयर घट गया है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026

कर्नाटक में धान की बुवाई में सबसे ज्यादा 3.61 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा तेलंगाना, झारखंड, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी धान का क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में कम रहा। हालांकि, असम, हरियाणा और कुछ अन्य राज्यों में धान की बुवाई बढ़ी है, लेकिन इन राज्यों में हुई बढ़ोतरी देशभर में आई कमी को पूरा नहीं कर सकी। Kharif Fasal Ki Buwai 2026

दलहन की बुवाई में बढ़ोतरी, अरहर और उड़द का रकबा बढ़ा

जहां कई प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई कम हुई है, वहीं दलहन किसानों के लिए राहत की खबर लेकर आई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस साल 28 अगस्त तक दलहन फसलों की बुवाई 115.05 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में दलहन का रकबा 113.66 लाख हेक्टेयर था। यानी दलहन की बुवाई में 1.39 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।

दलहन में अरहर और उड़द की बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है। अरहर का रकबा 0.28 लाख हेक्टेयर और उड़द का क्षेत्रफल 2.57 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। दूसरी तरफ मूंग की बुवाई में 1.06 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में दलहन की बुवाई बढ़ी है। इससे महाराष्ट्र, कर्नाटक और ओडिशा में हुई कमी का असर कुछ हद तक कम हुआ है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026

मोटे अनाज की बुवाई 4.21 लाख हेक्टेयर घटी

खरीफ सीजन में श्री अन्न और अन्य मोटे अनाजों के क्षेत्रफल में भी कमी दर्ज की गई है। 28 अगस्त तक इन फसलों की कुल बुवाई 177.90 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह क्षेत्र 182.11 लाख हेक्टेयर था। इस तरह मोटे अनाज का रकबा 4.21 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। मक्का के क्षेत्रफल में 3.88 लाख हेक्टेयर और रागी में 2.38 लाख हेक्टेयर की कमी इसका प्रमुख कारण रही। हालांकि ज्वार और बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कर्नाटक में मोटे अनाजों की बुवाई में 7.16 लाख हेक्टेयर की सबसे बड़ी कमी आई है, जबकि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इन फसलों का क्षेत्र बढ़ा है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026

सोयाबीन समेत तिलहन फसलों का रकबा भी कम

Kharif Fasal Ki Buwai 2026 के दौरान तिलहन फसलों के क्षेत्रफल में भी मामूली गिरावट देखने को मिली है। 28 अगस्त तक देश में कुल 190.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन की बुवाई हुई है। पिछले साल इसी अवधि में तिलहन का रकबा 191.45 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल तिलहन का क्षेत्र 1 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। सोयाबीन की बुवाई में 1.23 लाख हेक्टेयर और अरंडी के क्षेत्र में 1.19 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। वहीं सूरजमुखी और तिल की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। राजस्थान और गुजरात में तिलहन क्षेत्र में कमी देखने को मिली है, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में तिलहन की बुवाई बढ़ी है। Kharif Fasal Ki Buwai 2026

गन्ना और कपास की बुवाई भी पिछले साल से पीछे

खरीफ बुवाई के ताजा आंकड़ों में गन्ना और कपास का रकबा भी पिछले साल की तुलना में कम दर्ज किया गया है। गन्ने का क्षेत्रफल 0.41 लाख हेक्टेयर घटकर 58.46 लाख हेक्टेयर रह गया है। इसी तरह कपास का रकबा भी 0.43 लाख हेक्टेयर कम होकर 108.80 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। दूसरी ओर जूट और मेस्ता के क्षेत्रफल में 0.10 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।

खरीफ फसलों की बुवाई से क्या संकेत मिलते हैं?

कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो Kharif Fasal Ki Buwai 2026 में पिछले साल की तुलना में 18.91 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। धान के क्षेत्र में आई बड़ी गिरावट चिंता का विषय है, जबकि दलहन की बढ़ती बुवाई एक सकारात्मक संकेत है। मॉनसून और बारिश का वितरण खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में बारिश की स्थिति फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर असर डाल सकती है। फिलहाल कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि धान, मोटे अनाज, तिलहन, गन्ना और कपास जैसी कई प्रमुख फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में कम है, जबकि दलहन किसानों की पसंद में मजबूती दिखा रही है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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