लंपी और FMD बीमारी का बढ़ा खतरा, 350 से ज्यादा जिलों में अलर्ट,दूध की सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है असर Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai?

लंपी और FMD बीमारी का बढ़ा खतरा, 350 से ज्यादा जिलों में अलर्ट,दूध की सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है असर Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai?

Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai: देशभर में गाय और भैंस पालने वाले पशुपालकों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai, इसे लेकर देश के कई राज्यों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। सरकारी अलर्ट के अनुसार, खुरपका-मुंहपका यानी FMD के लिए 359 जिलों और लंपी बीमारी के लिए 220 जिलों को संवेदनशील माना गया है।

इन दोनों बीमारियों का सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ दूध उत्पादन पर भी पड़ सकता है। पशु विशेषज्ञों के मुताबिक, बीमारी की चपेट में आने पर पशुओं का दूध उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। कुछ गंभीर मामलों में पशु दूध देना पूरी तरह बंद भी कर सकता है। ऐसे में बीमारी का असर बढ़ने पर दूध की सप्लाई और कीमतों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है। Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai

350 से ज्यादा जिलों में बीमारी का अलर्ट

Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai, यह सवाल इस समय पशुपालकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। उपलब्ध सरकारी अलर्ट के अनुसार, लंपी बीमारी को लेकर 29 राज्यों के करीब 220 जिलों को अलर्ट पर रखा गया है। वहीं खुरपका-मुंहपका यानी FMD को लेकर केंद्र शासित प्रदेशों समेत 35 राज्यों के 359 जिलों में बीमारी का खतरा बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लक्षद्वीप को छोड़कर लगभग सभी राज्यों में FMD को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई है। Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai

लंपी और FMD से दूध उत्पादन में आ सकती है बड़ी गिरावट

लंपी और FMD दोनों ही पशुओं के लिए गंभीर संक्रामक बीमारियां हैं। बीमारी होने के बाद पशु कमजोर हो जाता है और उसका खान-पान प्रभावित होता है। इसका सीधा असर दूध देने की क्षमता पर पड़ सकता है। सेंट्रल बफैलो रिसर्च इंस्टीट्यूट, हिसार के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सज्जन सिंह के मुताबिक, किसी भी बीमारी का असर पशु के दूध उत्पादन पर दिखाई देता है। वहीं लंपी और FMD जैसी बीमारियों में दूध उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। कुछ पशु बीमारी के दौरान दूध देना पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं।

बारिश के मौसम में बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा

बारिश के मौसम में पशुओं के आसपास नमी बढ़ने के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा मक्खी और मच्छरों की संख्या बढ़ने से लंपी जैसी बीमारी के प्रसार की आशंका रहती है। ऐसे में पशुपालकों को पशुशाला की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai

लंपी बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा किन राज्यों में है?

अब सवाल उठता है कि Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai और किन राज्यों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। सरकारी अलर्ट में लंपी बीमारी के लिए करीब 220 जिलों का उल्लेख किया गया है। बिहार के 27 जिले लंपी को लेकर संवेदनशील बताए गए हैं। इसके बाद तमिलनाडु के 25 जिले, जबकि राजस्थान, झारखंड और कर्नाटक के 18-18 जिले अलर्ट सूची में शामिल हैं। इसके अलावा मणिपुर के 12, गोवा के 11 और मध्य प्रदेश के 10 जिलों में भी लंपी बीमारी का खतरा बताया गया है। पश्चिम बंगाल के 9, उत्तर प्रदेश के 7 और हिमाचल प्रदेश के 2 जिले भी संवेदनशील जिलों की सूची में हैं। Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai

FMD बीमारी का इन राज्यों में ज्यादा खतरा

खुरपका-मुंहपका यानी FMD को लेकर भी कई राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक के 28 जिले FMD को लेकर संवेदनशील बताए गए हैं। तमिलनाडु के 24, झारखंड के 23, जबकि असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के 21-21 जिलों में FMD का खतरा बताया गया है। इसके अलावा तेलंगाना के 18, छत्तीसगढ़ के 16 और मणिपुर के 15 जिले अलर्ट सूची में हैं। महाराष्ट्र के 14 तथा केरल और उत्तराखंड के 12-12 जिलों में भी FMD को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

पशुपालक बीमारी से बचाव के लिए क्या करें?

Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai, यह जानने के साथ पशुपालकों के लिए बीमारी से बचाव की जानकारी रखना भी जरूरी है। पशुओं को साफ और सूखी जगह पर रखना चाहिए। पशुशाला की नियमित सफाई करनी चाहिए और मक्खी-मच्छरों की रोकथाम के उपाय करने चाहिए। अगर किसी पशु में बुखार, शरीर पर गांठें, मुंह में छाले, ज्यादा लार आना, पैरों में घाव या चलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर दें। इसके बाद पशु चिकित्सक से संपर्क कर उचित उपचार और सलाह लें।

दूध की सप्लाई और कीमत पर पड़ सकता है असर

लंपी और FMD के बढ़ते मामलों का सबसे बड़ा असर पशुपालकों के दूध उत्पादन पर पड़ सकता है। अगर बड़ी संख्या में गाय और भैंस बीमारी की चपेट में आती हैं और उनका दूध उत्पादन कम होता है, तो स्थानीय स्तर पर दूध की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। दूध उत्पादन में कमी के कारण मांग और आपूर्ति के हिसाब से कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि दूध के दाम पर बीमारी के अलावा चारा, परिवहन, मौसम और बाजार की स्थिति जैसे कई दूसरे कारकों का भी असर पड़ता है। Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai

पशुपालकों के लिए क्यों जरूरी है सतर्क रहना?

Lumpy Aur FMD Bimari Ka Khatra Kin Jilon Mein Hai, इसकी जानकारी पशुपालकों को समय रहते मिलना जरूरी है, ताकि वे अपने पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी कदम उठा सकें। बीमारी के लक्षण नजर आने पर देरी करने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सक की मदद लेना चाहिए। समय पर पहचान, संक्रमित पशु को अलग रखना, साफ-सफाई और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार टीकाकरण जैसे उपाय बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा तो दूध उत्पादन भी प्रभावित होने से बचाया जा सकता है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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