Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye: बारिश और बदलते मौसम में बकरियों में कई तरह की संक्रामक और जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पशुपालकों के लिए समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है। अगर आप भी सोच रहे हैं कि Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye, तो इसका जवाब बकरी की उम्र, मौसम और बीमारी के खतरे के आधार पर तय किया जाता है।
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के वैज्ञानिकों के अनुसार कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनका प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है। ऐसी बीमारियों को रोकने में वैक्सीनेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खासकर बरसात के मौसम में संक्रमण तेजी से फैल सकता है, इसलिए पशुपालकों को पहले से ही सावधानी बरतनी चाहिए।
मौसम बदलते ही बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा
पशुओं में कई बीमारियां मौसम के अनुसार सक्रिय होती हैं। बारिश के दौरान नमी, कीचड़ और गंदगी के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं गर्मी और सर्दी में भी अलग-अलग बीमारियां पशुओं को प्रभावित कर सकती हैं। सितंबर महीने में पशुओं को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस दौरान लंपी और खुरपका-मुंहपका (FMD) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। FMD खुर वाले पशुओं में होने वाली संक्रामक बीमारी है और बकरियां भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye
Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye?
अगर आप जानना चाहते हैं कि Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye, तो बकरी की उम्र के अनुसार टीकाकरण कराना चाहिए। CIRG की ओर से बताए गए टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार बकरियों को PPR, इन्टेरोटोक्समिया, FMD, बकरी चेचक और गलघोंटू जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं। पशुपालक अपने नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल में जाकर टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी ले सकते हैं। कई जरूरी टीके सरकारी पशु चिकित्सा केंद्रों पर निःशुल्क लगाए जाते हैं। Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye
PPR यानी बकरी प्लेग का टीका
PPR यानी बकरी प्लेग बकरियों में होने वाली गंभीर बीमारी है। इससे बचाव के लिए करीब 3 महीने की उम्र में टीका लगाया जाता है। सामान्य तौर पर इसके लिए बूस्टर की जरूरत नहीं होती। निर्धारित समय पर दोबारा टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye
इन्टेरोटोक्समिया से बचाव का टीका
इन्टेरोटोक्समिया से बचाव के लिए 3 से 4 महीने की उम्र में पहला टीका लगाया जाता है। इसके करीब 3 से 4 सप्ताह बाद बूस्टर डोज दी जाती है। इसके बाद पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित टीकाकरण कराया जाना चाहिए।
खुरपका-मुंहपका यानी FMD का टीका
खुरपका-मुंहपका (FMD) एक संक्रामक बीमारी है। इससे बचाव के लिए 3 से 4 महीने की उम्र में पहला टीका लगाया जाता है। इसके 3 से 4 सप्ताह बाद बूस्टर डोज दी जाती है। इसके बाद निर्धारित अंतराल पर दोबारा टीकाकरण कराया जाता है।
बकरी चेचक का टीका
बकरी चेचक से बचाव के लिए 3 से 5 महीने की उम्र में टीका लगाया जाता है। पहले टीके के करीब एक महीने बाद बूस्टर डोज दी जाती है। इसके बाद हर साल टीकाकरण कराने की सलाह दी जाती है।
गलघोंटू का टीका
गलघोंटू से बचाव के लिए करीब 3 महीने की उम्र में पहला टीका लगाया जाता है। इसके बाद लगभग 3 से 4 सप्ताह के अंतराल पर बूस्टर डोज दी जा सकती है। टीके की सही टाइमिंग के लिए स्थानीय पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
बकरियों में डिवार्मिंग भी है जरूरी
सिर्फ वैक्सीनेशन कराने से ही बकरियों को पूरी तरह स्वस्थ नहीं रखा जा सकता। पेट के कीड़ों और अन्य पैरासाइट से बचाव के लिए समय-समय पर दवा देना भी जरूरी है।
कुकडिया रोग से बचाव
कुकडिया रोग से बचाव के लिए करीब 2 से 3 महीने की उम्र में दवा दी जा सकती है। दवा की मात्रा और अवधि बकरी की स्थिति के अनुसार पशु चिकित्सक से तय करानी चाहिए।
डिवार्मिंग कब कराएं?
करीब 3 महीने की उम्र में डिवार्मिंग कराने के साथ बरसात शुरू होने और खत्म होने के समय भी पेट के कीड़ों की दवा देने की सलाह दी जाती है। पूरे झुंड की डिवार्मिंग पशु चिकित्सक की सलाह से कराएं।
डिपिंग से बाहरी पैरासाइट पर नियंत्रण
बकरियों में बाहरी पैरासाइट और त्वचा से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए डिपिंग कराई जाती है। इसे मौसम और पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार करना चाहिए। झुंड के सभी पशुओं का एक साथ उपचार करने से बेहतर नियंत्रण किया जा सकता है। Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye
बकरियों की नियमित जांच भी जरूरी
टीकाकरण के साथ बकरियों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है। इससे बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान की जा सकती है और संक्रमित पशु को समय रहते अलग किया जा सकता है।
ब्रुसेलोसिस की जांच
ब्रुसेलोसिस की जांच निर्धारित उम्र पर कराई जानी चाहिए। यदि कोई पशु संक्रमित पाया जाता है तो उसे स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और पशु चिकित्सक के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई करें।
जोहनीज डिजीज यानी JD
जोहनीज डिजीज की भी समय-समय पर जांच करानी चाहिए। संक्रमित पशु की पहचान होने पर उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए, ताकि संक्रमण पूरे झुंड में फैलने का खतरा कम हो।
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सरकारी पशु अस्पताल में मिल सकती है मुफ्त सुविधा
पशुपालकों के लिए राहत की बात यह है कि सरकारी पशु अस्पतालों और पशु चिकित्सा केंद्रों पर कई जरूरी टीकाकरण सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। पेट के कीड़ों की दवा भी कई सरकारी केंद्रों पर मुफ्त दी जाती है। इसलिए Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye इसकी जानकारी के लिए पशुपालक अपने नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल में संपर्क कर सकते हैं। टीकाकरण की तारीख और बकरी की उम्र के अनुसार सही वैक्सीन के बारे में पशु चिकित्सक से जानकारी लेना सबसे बेहतर रहेगा। Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye
समय पर टीकाकरण से सुरक्षित रहेगा बकरियों का झुंड
बकरियों में कई बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं और कुछ संक्रमण जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। ऐसे में बीमारी होने के बाद इलाज कराने की बजाय समय रहते बचाव करना ज्यादा जरूरी है। अगर पशुपालक Bakriyon Ko Kaun Se Tike Lagwaye इसकी सही जानकारी लेकर उम्र और मौसम के अनुसार टीकाकरण कराते हैं, साथ ही डिवार्मिंग, साफ-सफाई और नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देते हैं, तो बकरियों को कई गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है।
