Kapas Ka Mandi Bhav: भारत में नई कपास की आवक शुरू हो गई है। कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में किसान नई खरीफ कपास लेकर मंडियों में पहुंचने लगे हैं। शुरुआती आवक के बीच कई मंडियों में कपास के भाव सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर बने हुए हैं। इससे किसानों को सीजन की शुरुआत में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
Kapas Ka Mandi Bhav 9,200 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल तक
कर्नाटक की रायचूर, बेल्लारी, आदोनी और येम्मिगनूर जैसी प्रमुख मंडियों में नई कपास का भाव करीब 9,200 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल तक बताया जा रहा है। हालांकि, मंडियों में कपास की कीमत उसकी गुणवत्ता और नमी के आधार पर तय की जा रही है। कम नमी और बेहतर गुणवत्ता वाली कपास को किसानों को अच्छा भाव मिलने की संभावना रहती है। मौजूदा Kapas Ka Mandi Bhav किसानों के लिए राहत देने वाला है, क्योंकि शुरुआती सीजन में ही कई जगह भाव MSP से ऊपर बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और घरेलू मांग को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है।
Kapas Ka Mandi Bhav: 2026-27 में कपास का MSP कितना है?
केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। मध्यम रेशे वाली कपास का MSP 8,267 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि लंबे रेशे वाली कपास का MSP 8,667 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। रायचूर समेत कुछ मंडियों में नई कपास का भाव फिलहाल सरकार के MSP से काफी ऊपर चल रहा है। अगर बाजार में मांग बनी रहती है और नई फसल की आवक बढ़ने के बावजूद कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं आता है, तो किसानों को MSP से बेहतर भाव मिलने का फायदा मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में कमजोरी
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में हाल के दिनों में कुछ कमजोरी देखने को मिली है। ICE कॉटन फ्यूचर्स करीब 87 सेंट प्रति पाउंड के आसपास चल रहा है, जबकि मंगलवार को यह करीब 93 सेंट प्रति पाउंड था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कपास खरीद भाव में करीब 2,000 रुपये प्रति कैंडी, यानी 356 किलो, की कमी की है। हालांकि, भारतीय कपास निगम (CCI) ने अपने भाव में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है। Kapas Ka Mandi Bhav
सूत की मांग कमजोर, कपड़ा मिलों की खरीदारी सीमित
कपास बाजार में इस समय यार्न यानी सूत की कमजोर मांग चिंता का विषय बनी हुई है। ऊंचे भाव पर सूत खरीदने वाले ग्राहक कम होने के कारण कपड़ा मिलें भी नई कपास की बड़ी मात्रा में खरीदारी करने से बच रही हैं। कई कपड़ा मिलों के पास पहले से ही कपास का स्टॉक मौजूद है। इसलिए मिलें फिलहाल बाजार की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं। अगर आने वाले दिनों में यार्न की मांग में सुधार होता है, तो कपास की खरीदारी बढ़ सकती है। इससे Kapas Ka Mandi Bhav भी मजबूत होने की संभावना बन सकती है। Kapas Ka Mandi Bhav
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गुजरात में भी नई कपास की आवक शुरू
गुजरात के कुछ हिस्सों में नई कपास की आवक छोटी मात्रा में शुरू हो गई है। राजकोट में कपास का भाव करीब 1,900 से 2,000 रुपये प्रति मन, यानी 20 किलो के आसपास बताया जा रहा है। इस साल कपास की बुवाई में देरी होने के कारण नई फसल की आवक भी करीब एक महीने पीछे चल रही है। फिलहाल देशभर में नई कपास की साप्ताहिक आवक करीब 50,000 गांठ है। एक गांठ का वजन लगभग 170 किलो होता है। अगले दो सप्ताह में आवक बढ़कर करीब 1 लाख गांठ प्रति सप्ताह होने की उम्मीद है। Kapas Ka Mandi Bhav
कपास की फसल के लिए बारिश जरूरी
इस समय कपास की फसल के लिए बारिश काफी महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में यदि एक-दो दौर की अच्छी बारिश होती है, तो इससे फसल की बढ़वार और पैदावार को फायदा मिल सकता है। हालांकि, अत्यधिक बारिश होने पर फसल को नुकसान का खतरा भी बना रह सकता है। कृषि मंत्रालय के 4 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 109.17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है। पिछले साल इसी समय यह रकबा 109.87 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल कपास का बुवाई क्षेत्र पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है।
आगे कैसा रहेगा Kapas Ka Mandi Bhav?
फिलहाल नई कपास की शुरुआती आवक के दौरान कई मंडियों में भाव MSP से ऊपर बने हुए हैं। आने वाले दिनों में नई फसल की आवक, यार्न की मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार और मौसम की स्थिति कपास की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। अगर यार्न की मांग में सुधार होता है और घरेलू बाजार में कपास की खरीदारी बढ़ती है, तो Kapas Ka Mandi Bhav में आगे तेजी देखने को मिल सकती है।
वहीं, नई फसल की आवक तेजी से बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी जारी रहने पर कीमतों पर दबाव भी बन सकता है। ऐसे में किसानों के लिए मंडी में अपनी कपास की गुणवत्ता के अनुसार भाव की तुलना करके बिक्री का फैसला करना बेहतर रहेगा।
