मूंग-उड़द में पीतशिरा रोग और फली छेदक कीट से बचाव, कृषि वैज्ञानिकों ने बताए फसल बचाने के उपाय Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav

मूंग-उड़द में पीतशिरा रोग और फली छेदक कीट से बचाव, कृषि वैज्ञानिकों ने बताए फसल बचाने के उपाय Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav

Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में मूंग और उड़द की फसल में पीतशिरा रोग और फली छेदक कीट का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है। पाटन विकासखंड के ग्राम रोंझा में किसानों ने फसल में बीमारी और कीट के प्रकोप की जानकारी कृषि विभाग की टीम को दी।

इसके बाद कृषि अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने खेतों का निरीक्षण कर किसानों को Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav के जरूरी उपाय बताए। कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि फसल में रोग या कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पहचान करें और समय रहते नियंत्रण के उपाय अपनाएं। इससे फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav के लिए जरूरी सलाह

क्षेत्र भ्रमण के दौरान किसानों ने बताया कि मूंग और उड़द के खेतों में पीतशिरा रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह से संपर्क किया। वैज्ञानिक ने खेत की स्थिति के अनुसार किसानों को रोग और कीट प्रबंधन की जानकारी दी। पीतशिरा रोग से प्रभावित पौधों को समय रहते खेत से निकालना जरूरी बताया गया। किसानों को सलाह दी गई कि रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबा दें, ताकि बीमारी के आगे फैलने की संभावना कम हो सके।

पीतशिरा रोग से प्रभावित पौधों को खेत से हटाएं

कृषि अधिकारियों के अनुसार पीतशिरा रोग दिखाई देने पर प्रभावित पौधों को खेत में छोड़ने के बजाय उखाड़कर मिट्टी में दबा देना चाहिए। इसके साथ ही रोग के प्रसार को रोकने के लिए विभागीय सलाह के अनुसार बुप्रोफेजिन 32 प्रतिशत + क्लोथियानिडिन 12 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 100 ग्राम अथवा थायमेथोक्साम 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 80 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव की सलाह दी गई। Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav

किसानों को यह भी बताया गया कि किसी भी कृषि दवा का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा से अधिक नहीं करना चाहिए। दवा के उपयोग से पहले उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि विभाग की नवीनतम अनुशंसा की जांच करना जरूरी है। Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav

Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav में फली छेदक पर भी दें ध्यान

मूंग और उड़द की फसल में फली छेदक कीट का प्रकोप भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। यह कीट फलियों को नुकसान पहुंचाकर दानों के विकास को प्रभावित कर सकता है। समय पर नियंत्रण नहीं होने पर फसल की उपज पर इसका असर पड़ सकता है। फली छेदक कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को क्विनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी की 150 मिली प्रति एकड़ मात्रा को 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई। Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav

इसके अलावा क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 9.3 प्रतिशत + लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 4.6 प्रतिशत जेडसी की 80 मिली अथवा नोवाल्यूरॉन 5.25 प्रतिशत + इंडोक्साकार्ब 4.5 प्रतिशत एससी की 330 मिली प्रति एकड़ मात्रा को 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव की जानकारी दी गई। हालांकि, किसानों को किसी भी कीटनाशक के इस्तेमाल से पहले वर्तमान पंजीकृत लेबल-अनुशंसा और स्थानीय कृषि विभाग की सलाह की पुष्टि करने की सलाह दी गई है। Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav

धान की फसल में फुदका और अन्य कीटों से बचाव

क्षेत्र भ्रमण के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों को धान की फसल में कीट प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी। धान में भूरा, सफेद और हरा फुदका जैसे कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके नियंत्रण के लिए पायरीप्रॉक्सीफेन 11.3 प्रतिशत + इमिडाक्लोप्रिड 1.9 प्रतिशत कीटनाशी की 400 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव की सलाह दी गई। धान में पत्ती मोड़क और तना छेदक जैसे कीटों की निगरानी करने तथा प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विभाग की अनुशंसित दवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह किसानों को दी गई।

मक्का में फॉल आर्मीवर्म से फसल बचाने की सलाह

मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म के संभावित प्रकोप को देखते हुए किसानों को इसके नियंत्रण की जानकारी भी दी गई। इसके लिए डेल्टामेथ्रिन 18.18 प्रतिशत एससी की 100 मिली अथवा क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 6.5 प्रतिशत + थायमेथोक्साम 5 प्रतिशत की 300 मिली प्रति एकड़ जैसी अनुशंसित कीटनाशियों के उपयोग की जानकारी दी गई। कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि मक्का में फॉल आर्मीवर्म के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें और फसल की अवस्था के अनुसार नियंत्रण उपाय अपनाएं।

बीमारी या कीट दिखे तो तुरंत कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि मूंग, उड़द, धान या मक्का की फसल में रोग और कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर उन्हें नजरअंदाज न करें। समय पर पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि कीटनाशक और फफूंदनाशक का इस्तेमाल निर्धारित मात्रा, फसल की अवस्था और उत्पाद के लेबल के अनुसार ही करें। Moong Urad Mein Peetshirsha Rog Aur Fali Chedak Keet Se Bachav के लिए स्थानीय कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र की ताजा सलाह को प्राथमिकता देना किसानों के लिए बेहतर रहेगा।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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