Dhan Ki Katai Kab Karen: धान की फसल पकने के बाद किसानों के लिए सबसे जरूरी काम सही समय पर कटाई करना होता है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि Dhan Ki Katai Kab Karen, जिससे फसल की गुणवत्ता बनी रहे और दानों के झड़ने से होने वाला नुकसान कम हो। धान की कटाई बहुत जल्दी करने पर दाने अधपके रह सकते हैं, जबकि ज्यादा देरी करने पर पके हुए दाने खेत में झड़ने लगते हैं। इसलिए कटाई का निर्णय फसल की पकने की अवस्था, दानों की नमी और मौसम को देखकर लेना चाहिए।
Dhan Ki Katai Kab Karen, फसल पकने के इन संकेतों को पहचानें
जब खेत में करीब 80 से 90 प्रतिशत बालियां सुनहरी या पीली हो जाएं और अधिकांश दाने अच्छी तरह पककर सख्त हो जाएं, तब धान की फसल कटाई के लिए तैयार मानी जाती है। पकी हुई बालियां दानों के वजन के कारण नीचे की ओर झुकने लगती हैं। यह फसल की कटाई के लिए उपयुक्त अवस्था का प्रमुख संकेत माना जाता है। किसानों को Dhan Ki Katai Kab Karen का फैसला केवल फसल की उम्र के आधार पर नहीं करना चाहिए। अलग-अलग धान की किस्मों और मौसम के कारण पकने का समय अलग हो सकता है। इसलिए खेत में बालियों और दानों की वास्तविक अवस्था देखकर ही कटाई की तारीख तय करना बेहतर रहता है।
Dhan Ki Katai Kab Karen: कटाई से 10 से 15 दिन पहले बंद कर दें सिंचाई
धान की फसल पकने की अवस्था में पहुंचने के बाद कटाई से करीब 10 से 15 दिन पहले खेत में सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। अगर खेत में पानी जमा है तो उसकी निकासी भी कर दें। इससे खेत की अतिरिक्त नमी धीरे-धीरे कम होती है और मिट्टी कटाई के लिए उपयुक्त स्थिति में आ जाती है। खेत सूखने से कंबाइन हार्वेस्टर या मजदूरों के माध्यम से फसल काटने में आसानी होती है। गीली जमीन में मशीन चलाने पर पहिए धंस सकते हैं, जिससे कटाई में समय और ईंधन दोनों अधिक लग सकते हैं। मजदूरों के लिए भी गीले खेत में कटाई करना परेशानी भरा हो सकता है।
दानों में 20 से 25 प्रतिशत नमी पर कटाई करें
Dhan Ki Katai Kab Karen यह तय करते समय दानों में मौजूद नमी को भी ध्यान में रखना जरूरी है। कटाई के समय धान के दानों में करीब 20 से 25 प्रतिशत नमी होना उपयुक्त माना जाता है। इस अवस्था में कटाई और मड़ाई के दौरान दानों के टूटने तथा खेत में झड़ने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। किसान संभव हो तो नमी मापक यंत्र की सहायता से दानों की नमी की जांच कर सकते हैं। यदि नमी बहुत अधिक है तो कटाई के बाद धान को सुखाने में अधिक समय लग सकता है। वहीं, बहुत ज्यादा सूख जाने पर पकी बालियों से दाने झड़ने की समस्या बढ़ सकती है।
Dhan Ki Katai Kab Karen: बहुत जल्दी धान की कटाई करने से बचें
फसल पूरी तरह पकने से पहले कटाई करने पर कई दाने अधपके रह सकते हैं। इससे धान की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ उपज में भी कमी आ सकती है। अधपके दानों में नमी अधिक होने के कारण सुखाने और भंडारण के दौरान भी अतिरिक्त सावधानी रखनी पड़ती है। इसलिए Dhan Ki Katai Kab Karen का फैसला जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। खेत में अधिकांश बालियों के पीले या सुनहरे होने और दानों के सख्त होने का इंतजार करना बेहतर रहता है।
कटाई में ज्यादा देरी भी न करें
फसल पूरी तरह पकने के बाद कटाई में ज्यादा देरी करने से भी किसानों को नुकसान हो सकता है। लंबे समय तक खेत में खड़ी पकी फसल में तेज हवा, बारिश और पक्षियों के कारण दाने झड़ सकते हैं। इससे खेत में ही उपज का एक हिस्सा बर्बाद होने की आशंका रहती है। इसके अलावा, बारिश होने पर पकी बालियों में नमी बढ़ सकती है। इससे फफूंद लगने और दानों की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए फसल तैयार होने के बाद मौसम को ध्यान में रखते हुए समय पर कटाई करना जरूरी है। Dhan Ki Katai Kab Karen
मौसम का पूर्वानुमान देखकर बनाएं कटाई की योजना
धान की कटाई के लिए साफ और बारिश रहित मौसम बेहतर माना जाता है। कटाई शुरू करने से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर देख लें। अगर फसल पक चुकी है और आने वाले दिनों में बारिश की संभावना है, तो किसान उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कटाई की तैयारी कर सकते हैं। Dhan Ki Katai Kab Karen इसका निर्णय लेते समय मौसम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कटाई के बाद धान को सुखाने के लिए पर्याप्त धूप और सूखी जगह की जरूरत होती है। इसलिए कटाई से पहले ही धान को सुखाने और सुरक्षित रखने की व्यवस्था कर लेना बेहतर रहेगा।
कटाई से पहले खेत का अच्छी तरह करें निरीक्षण
कटाई शुरू करने से पहले किसान को पूरे खेत का निरीक्षण कर लेना चाहिए। खेत में मौजूद खरपतवार, सूखी बालियां और कमजोर या रोगग्रस्त पौधों की पहचान करें। जिन बालियों पर फफूंद, काले धब्बे या सड़न के लक्षण दिखाई दे रहे हों, उन्हें स्वस्थ फसल से अलग रखना चाहिए। रोगग्रस्त पौधों के अवशेष खेत में छोड़ने से रोगजनक अगली फसल को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ऐसे पौधों और अवशेषों को खेत से हटाकर उचित तरीके से नष्ट या प्रबंधित करना जरूरी है। Dhan Ki Katai Kab Karen
गीले खेत में कंबाइन चलाने से हो सकता है नुकसान
अगर खेत में अधिक पानी जमा है तो सबसे पहले उसकी निकासी सुनिश्चित करें। मिट्टी को कुछ हद तक सूखने के बाद ही मशीन से कटाई करना बेहतर रहता है। बहुत गीली जमीन में कंबाइन हार्वेस्टर चलाने पर मशीन के पहिए मिट्टी में धंस सकते हैं और कटाई की गति प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही मशीन के बार-बार फंसने से ईंधन की खपत बढ़ सकती है और खेत में मिट्टी की स्थिति भी खराब हो सकती है। इसलिए Dhan Ki Katai Kab Karen के साथ खेत की नमी और मशीन चलाने की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
कटाई के बाद धान को ज्यादा देर तक खेत में न रखें
धान की कटाई और मड़ाई के बाद उपज को लंबे समय तक खेत में ढेर लगाकर नहीं रखना चाहिए। दानों को साफ करने के बाद अच्छी तरह सुखाना जरूरी है। यदि मौसम में नमी है तो धान को खुले में रखने के बजाय हवादार और सुरक्षित स्थान पर रखें। भंडारण से पहले धान की नमी को सुरक्षित स्तर तक कम करना जरूरी है। अधिक नमी रहने पर भंडारण के दौरान फफूंद लगने, दानों की गुणवत्ता खराब होने और अनाज में गर्मी पैदा होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। Dhan Ki Katai Kab Karen
धान की कटाई के लिए पहले से तैयार रखें मशीन और मजदूर
फसल पकने से कुछ दिन पहले ही किसान को कटाई की व्यवस्था कर लेनी चाहिए। यदि कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करनी है तो मशीन की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित कर लें। वहीं, हाथ से कटाई करने वाले किसान मजदूरों की व्यवस्था समय रहते कर सकते हैं। फसल पूरी तरह पकने के बाद अगर कटाई की व्यवस्था समय पर नहीं हो पाती है तो मौसम बदलने या तेज हवा चलने की स्थिति में नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए Dhan Ki Katai Kab Karen के साथ यह भी जरूरी है कि कटाई के लिए मशीन, मजदूर और धान सुखाने की जगह पहले से तैयार हो।
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कटाई के बाद मड़ाई और सुखाने में न करें लापरवाही
कटाई के बाद मड़ाई का काम समय पर करना चाहिए। मड़ाई के बाद दानों को साफ करके कचरा और अन्य अवशेष अलग करें। इसके बाद धान को उचित तरीके से सुखाएं ताकि भंडारण के दौरान नमी से होने वाली समस्याओं से बचा जा सके। अगर धान को लंबे समय तक अधिक नमी के साथ रखा जाता है तो दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसान कटाई से पहले ही यह योजना बना लें कि फसल काटने के बाद उसे कहां और किस तरह सुखाया जाएगा। Dhan Ki Katai Kab Karen
सही समय पर कटाई से कम होगा फसल नुकसान
Dhan Ki Katai Kab Karen यह तय करने के लिए किसानों को बालियों का रंग, दानों की कठोरता, नमी और मौसम इन सभी बातों पर ध्यान देना चाहिए। जब करीब 80 से 90 प्रतिशत बालियां सुनहरी या पीली हो जाएं और अधिकांश दाने सख्त हो जाएं, तब कटाई शुरू करना उचित रहता है। कटाई से 10 से 15 दिन पहले सिंचाई बंद करने, खेत से अतिरिक्त पानी निकालने, दानों की नमी जांचने और मौसम का पूर्वानुमान देखने से फसल नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। सही समय पर कटाई के साथ उचित सुखाने और सुरक्षित भंडारण से धान की गुणवत्ता भी बेहतर बनाए रखी जा सकती है।
