MP Mein 600 MW Floating Solar Project: मध्यप्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत प्रदेश में तीन बड़ी नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को तकनीकी और वित्तीय सहयोग के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। इनमें ओंकारेश्वर का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।
MP Mein 600 MW Floating Solar Project के जरिए मध्यप्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा देने की तैयारी है। प्रदेश सरकार लंबे समय से सौर और पवन ऊर्जा की संभावनाओं को देखते हुए नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। अब सरकार का फोकस केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि एनर्जी स्टोरेज, ट्रांसमिशन और 24×7 बिजली उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था विकसित करने पर भी है। MP Mein 600 MW Floating Solar Project
ओंकारेश्वर में 600 MW फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की तैयारी
ओंकारेश्वर जलाशय में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। समझौते के तहत 278 मेगावाट क्षमता वाले ओंकारेश्वर फेज को आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके अलावा जलाशय क्षेत्र में करीब 300 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी जल क्षेत्र और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध बताया गया है। इस तरह ओंकारेश्वर में कुल मिलाकर करीब 600 मेगावाट तक की फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने की संभावना है। MP Mein 600 MW Floating Solar Project
MP Mein 600 MW Floating Solar Project की खासियत यह है कि सोलर पैनल जमीन पर लगाने के बजाय जलाशय की सतह पर लगाए जाएंगे। इससे बड़े भू-भाग की जरूरत कम होगी और उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। ओंकारेश्वर परियोजना को लेकर पहले ही सर्वे, प्री-फिजिबिलिटी स्टडी और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट से संबंधित अध्ययन किए जा चुके हैं। अब तकनीकी और वित्तीय सहयोग मिलने से परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट से क्या होगा फायदा?
फ्लोटिंग सोलर तकनीक में सोलर पैनल को पानी की सतह पर विशेष संरचना के जरिए स्थापित किया जाता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें खेती योग्य या अन्य उपयोगी जमीन की आवश्यकता कम पड़ती है। जलाशय की सतह का इस्तेमाल होने से सीमित भूमि संसाधनों वाले क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन किया जा सकता है। इसके अलावा पानी की सतह पर पैनल लगाए जाने से कुछ परिस्थितियों में पैनलों का तापमान कम रखने में मदद मिल सकती है, जिससे ऊर्जा उत्पादन की दक्षता पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
सोलर ऊर्जा के साथ एनर्जी स्टोरेज पर जोर
मध्यप्रदेश सरकार अब केवल सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर ही निर्भर नहीं रहना चाहती। सौर ऊर्जा दिन के समय अधिक उपलब्ध होती है, जबकि बिजली की मांग कई बार शाम और रात के समय भी अधिक रहती है। ऐसे में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत 2 घंटे के को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम वाले फ्लोटिंग सोलर पीवी प्रोजेक्ट के लिए प्रति मेगावाट 1 करोड़ रुपये तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान बताया गया है। MP Mein 600 MW Floating Solar Project
स्टोरेज सिस्टम की मदद से दिन में पैदा होने वाली बिजली को बाद में जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है। MP Mein 600 MW Floating Solar Project
24×7 ग्रीन बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य केवल नवकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता बढ़ाना नहीं है। इसके साथ ऐसी व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी है, जिससे स्वच्छ बिजली विश्वसनीय, सस्ती और लगातार उपलब्ध हो सके। इसके लिए सोलर और विंड एनर्जी के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क और एनर्जी स्टोरेज क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे बिजली ग्रिड में अधिक मात्रा में नवकरणीय ऊर्जा को शामिल करने और पीक डिमांड के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। MP Mein 600 MW Floating Solar Project
ADB से मिलेगा तकनीकी सहयोग
RUMSL और एशियन डेवलपमेंट बैंक के बीच हुए समझौते के तहत ADB तीन नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बिना शुल्क ट्रांजेक्शन एडवाइजरी सर्विस उपलब्ध कराएगा। इसका उद्देश्य परियोजनाओं की बेहतर योजना और ऐसी कारोबारी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे लंबे समय के निवेश को आकर्षित किया जा सके। MP Mein 600 MW Floating Solar Project जैसी बड़ी परियोजना के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश से जुड़ी सलाह मिलने से परियोजना की तैयारी और क्रियान्वयन को मजबूती मिल सकती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रदेश में ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निजी और संस्थागत निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
ये भी देखे: मौसम बदलते ही बकरियों पर अटैक करेंगी ये 2 बड़ी बीमारियां, जानें बचाव के उपाय
ग्रीन एनर्जी से रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
मध्यप्रदेश सरकार नवकरणीय ऊर्जा को सिर्फ बिजली उत्पादन का जरिया नहीं मान रही है। सरकार इसे औद्योगिक विकास, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले क्षेत्र के रूप में भी देख रही है। बड़े सोलर और विंड प्रोजेक्ट के साथ उपकरण निर्माण, संचालन, रखरखाव, तकनीकी सेवाओं और अन्य सहायक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे प्रदेश में ग्रीन एनर्जी से जुड़े नए उद्योगों और निवेश को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। MP Mein 600 MW Floating Solar Project
मध्यप्रदेश की ग्रीन एनर्जी में मजबूत होती पहचान
मध्यप्रदेश में सौर और पवन ऊर्जा की अच्छी संभावनाओं को देखते हुए सरकार आने वाले वर्षों में नवकरणीय ऊर्जा क्षमता को और बढ़ाने की तैयारी कर रही है। बड़े प्रोजेक्ट के साथ नई तकनीक और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ओंकारेश्वर का प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। MP Mein 600 MW Floating Solar Project के पूरा होने पर प्रदेश की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को मजबूती मिल सकती है और जलाशय आधारित सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की पहचान और मजबूत हो सकती है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीनों परियोजनाओं के लिए तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर एशियन डेवलपमेंट बैंक का आभार जताया। साथ ही RUMSL और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की पहल की सराहना की। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में ग्रीन एनर्जी के जरिए प्रदेश की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
