Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein: आम को फलों का राजा कहा जाता है और देशभर में इसकी कई उन्नत किस्मों की खेती की जाती है। किसान और बागवान अक्सर ऐसी आम की किस्म लगाना चाहते हैं, जिसके फल स्वादिष्ट होने के साथ अच्छी गुणवत्ता वाले भी हों। ऐसे में ग्राफ्टिंग तकनीक काफी उपयोगी हो सकती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, तो साइड ग्राफ्टिंग विधि को समझना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
साइड ग्राफ्टिंग की मदद से देसी आम के पौधे पर अच्छी किस्म के आम की स्वस्थ शाखा लगाकर कलमी पौधा तैयार किया जाता है। इस तकनीक में देसी पौधा रूटस्टॉक और अच्छी किस्म के पेड़ की शाखा सायन के रूप में इस्तेमाल होती है। छतरपुर के नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार ने भी इस विधि से कलमी आम के पौधे तैयार करने का तरीका बताया है। Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, पहले समझें साइड ग्राफ्टिंग क्या है?
साइड ग्राफ्टिंग आम के पौधे तैयार करने की एक ऐसी विधि है, जिसमें देसी या बीजू आम के पौधे पर किसी अच्छी किस्म के आम की शाखा को जोड़ा जाता है। इसमें नीचे का हिस्सा देसी आम का होता है, जबकि ऊपर लगाई गई शाखा मनपसंद किस्म के आम के पेड़ से ली जाती है। इस विधि का मुख्य उद्देश्य अच्छी किस्म के पेड़ के गुणों को नए पौधे में बनाए रखना होता है। ग्राफ्टिंग के दौरान रूटस्टॉक और सायन के बीच सही संपर्क होना बेहद जरूरी है। दोनों हिस्सों के जुड़ने के बाद नई ग्रोथ शुरू होती है और धीरे-धीरे पौधा विकसित होने लगता है।
कलमी आम का पौधा तैयार करने के लिए क्या चाहिए?
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इसकी प्रक्रिया शुरू करने से पहले जरूरी सामग्री तैयार कर लेना चाहिए। इसके लिए एक स्वस्थ देसी आम का पौधा, अच्छी किस्म के आम के पेड़ की स्वस्थ शाखा, तेज और साफ चाकू या ग्राफ्टिंग ब्लेड तथा ग्राफ्टिंग टेप या साफ प्लास्टिक पन्नी की जरूरत होती है। ग्राफ्टिंग में इस्तेमाल होने वाले सभी औजार साफ होने चाहिए। गंदे या संक्रमित औजारों के इस्तेमाल से पौधे में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह सायन के लिए भी स्वस्थ और रोगमुक्त शाखा का ही चयन करना चाहिए।
1. देसी आम के पौधे को रूटस्टॉक के रूप में तैयार करें
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इसका पहला चरण मजबूत रूटस्टॉक तैयार करना है। इसके लिए आम की गुठली या बीज को अच्छी मिट्टी वाली क्यारी में लगाया जा सकता है। गुठली लगाने के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें और पौधे को शुरुआती अवस्था में उचित देखभाल दें। करीब डेढ़ महीने के बाद गुठली से नया पौधा निकल सकता है। जब पौधा थोड़ा विकसित हो जाए तो उसे सावधानीपूर्वक निकालकर पॉलिथीन बैग में लगाया जा सकता है।
पॉलिथीन बैग में पौधे को लगाने से उसकी देखभाल और ग्राफ्टिंग के लिए उसे एक जगह रखना आसान हो जाता है। जब यह पौधा लगभग एक से डेढ़ साल का हो जाए और इसके तने की मोटाई पेन या पेंसिल के बराबर हो जाए, तब इसे ग्राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। रूटस्टॉक मजबूत और स्वस्थ होना चाहिए।
2. अच्छी किस्म के आम की शाखा का करें चुनाव
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इसमें सायन यानी कलम का चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण है। जिस किस्म का आम आप तैयार करना चाहते हैं, उसी किस्म के स्वस्थ और अच्छे फल देने वाले पेड़ से पेंसिल की मोटाई के आसपास की शाखा चुनें। शाखा बहुत ज्यादा कोमल या कमजोर नहीं होनी चाहिए। इसमें किसी तरह का रोग या कीट का प्रकोप भी नहीं होना चाहिए। शाखा चुनने के बाद उस पर लगी पत्तियों को सावधानीपूर्वक हटा दें। विशेषज्ञों के अनुसार, कलम के लिए अच्छे और स्वस्थ पेड़ का चयन करना जरूरी है, क्योंकि इसी शाखा से तैयार होने वाले पौधे में उस किस्म के गुण विकसित होने की उम्मीद रहती है।
3. रूटस्टॉक में सही तरीके से लगाएं चीरा
अब Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इसका सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू होता है। सबसे पहले रूटस्टॉक यानी देसी आम के पौधे के ऊपरी हिस्से पर साफ और तेज चाकू से करीब 1 से 1.5 इंच का चीरा लगाएं। चीरा लगाते समय ध्यान रखें कि कट साफ हो और पौधे को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे। इसके बाद चुनी गई सायन शाखा के निचले हिस्से को दोनों तरफ से हल्का छीलकर V आकार का बना लें। Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein
अब इस V आकार की शाखा को देसी पौधे में बनाए गए चीरे के अंदर अच्छी तरह फिट करें। कोशिश करें कि सायन और रूटस्टॉक की छाल का हिस्सा आपस में अच्छी तरह मिल जाए। ग्राफ्टिंग की सफलता में यह मिलान काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein
4. ग्राफ्टिंग वाले हिस्से को पन्नी से बांध दें
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इसमें चौथा चरण ग्राफ्टिंग वाले हिस्से को सुरक्षित करना है। सायन को रूटस्टॉक के चीरे में लगाने के बाद जोड़ वाले हिस्से को ग्राफ्टिंग टेप या साफ प्लास्टिक पन्नी से अच्छी तरह बांध दें। पन्नी या टेप इस तरह लगाएं कि जोड़ हिले नहीं। साथ ही जोड़ के अंदर हवा और अतिरिक्त पानी जाने की संभावना कम रहे। हालांकि बांधते समय इतना दबाव भी नहीं डालना चाहिए कि पौधे का तना या शाखा क्षतिग्रस्त हो जाए। ग्राफ्टिंग के बाद पौधे को कुछ समय तक स्थिर रखना जरूरी होता है, इसलिए उसे बार-बार हिलाने या जोड़ को खोलकर देखने से बचें।
ग्राफ्टिंग के बाद पौधे की देखभाल कैसे करें?
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, यह जानने के साथ ग्राफ्टिंग के बाद की देखभाल समझना भी जरूरी है। ग्राफ्टिंग के तुरंत बाद पौधे को तेज धूप में रखने से बचें। इसे ऐसी जगह रखें जहां हल्की या छनकर आने वाली धूप मिले। मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन पौधे में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए। ज्यादा पानी से जड़ और ग्राफ्टिंग वाले हिस्से में समस्या पैदा हो सकती है। पौधे पर पानी देते समय कोशिश करें कि ग्राफ्टिंग वाले जोड़ पर सीधे पानी न पड़े। इसके अलावा पौधे से निकलने वाली अनावश्यक नई शाखाओं को समय-समय पर हटाना पड़ सकता है, ताकि पौधे की ऊर्जा मुख्य ग्राफ्टेड शाखा की वृद्धि में जा सके।
कितने दिन में निकलती है नई कोंपल?
सही तरीके से ग्राफ्टिंग होने पर करीब 10 से 15 दिनों के बाद नई ग्रोथ दिखाई देना शुरू हो सकती है। हालांकि यह समय मौसम, तापमान, नमी, रूटस्टॉक की स्थिति और सायन की गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। नई कोंपल निकलने का मतलब यह हो सकता है कि ग्राफ्टिंग वाला हिस्सा सक्रिय रूप से बढ़ना शुरू कर रहा है। इस दौरान पौधे को पर्याप्त लेकिन नियंत्रित नमी और उचित वातावरण देना चाहिए। Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein
आम की ग्राफ्टिंग के लिए बारिश का मौसम क्यों है उपयोगी?
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इसमें सही मौसम का चुनाव भी महत्वपूर्ण है। आम में ग्राफ्टिंग के लिए सामान्य तौर पर बारिश का मौसम अनुकूल माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी रहती है और पौधों में वृद्धि की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। हालांकि अत्यधिक बारिश, लगातार पानी या बहुत ज्यादा नमी भी नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए स्थानीय मौसम की स्थिति देखकर ग्राफ्टिंग करनी चाहिए। अगर क्षेत्र में मौसम अनुकूल नहीं है तो स्थानीय उद्यानिकी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
क्या एक देसी पौधे से कई कलमी पौधे तैयार किए जा सकते हैं?
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इस तकनीक का एक फायदा यह है कि अच्छी किस्म की स्वस्थ शाखा से कई सायन तैयार किए जा सकते हैं। इन्हें अलग-अलग उपयुक्त रूटस्टॉक पर ग्राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ग्राफ्टिंग सफल हो, यह जरूरी नहीं है। सफलता के लिए रूटस्टॉक की उम्र, सायन की गुणवत्ता, मौसम, कट की सही स्थिति और ग्राफ्टिंग के बाद की देखभाल महत्वपूर्ण होती है। Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein
ये भी देखे: गाय-भैंस देने वाली है बच्चा? प्रसव से पहले कर लें ये जरूरी तैयारी, बाद में नहीं होगी परेशानी
ग्राफ्टिंग के लिए कितने साल पुराने पेड़ की शाखा लें?
अच्छी किस्म के आम के परिपक्व पेड़ से स्वस्थ शाखा का चुनाव किया जाता है। डॉ. कमलेश अहिरवार के बताए तरीके के अनुसार, करीब 6 साल पुराने आम के पेड़ की शाखा का इस्तेमाल किया जा सकता है। शाखा से पत्तियां हटाने से पौधे में मौजूद भोजन का संचित भाग शाखा और तने में रहने में मदद कर सकता है। इसके बाद उपयुक्त समय पर शाखा को काटकर तैयार रूटस्टॉक के चीरे में लगाया जाता है। शाखा का चयन करते समय पेड़ की सेहत और उसकी फल देने की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
ग्राफ्टिंग करते समय किन गलतियों से बचें?
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इसकी प्रक्रिया में कुछ छोटी गलतियां ग्राफ्टिंग की सफलता को प्रभावित कर सकती हैं। सबसे पहले गंदे औजारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कट लगाने के लिए साफ और तेज ब्लेड का प्रयोग करें। सायन और रूटस्टॉक की छाल का संपर्क सही होना चाहिए। अगर दोनों हिस्से ठीक से नहीं मिलेंगे तो जुड़ने में परेशानी हो सकती है। ग्राफ्टिंग के बाद पौधे को तेज धूप, अत्यधिक पानी और अनावश्यक हिलाने से बचाना चाहिए। इसके अलावा ग्राफ्टिंग वाले जोड़ को समय से पहले खोलने से भी बचें। नई ग्रोथ दिखाई देने तक पौधे की नियमित निगरानी करते रहें।
घर पर कलमी आम तैयार करने में किन बातों का रखें ध्यान?
Kalmi Aam Ka Paudha Kaise Taiyar Karein, इसकी पूरी प्रक्रिया में धैर्य और सावधानी जरूरी है। रूटस्टॉक स्वस्थ होना चाहिए और उसकी उम्र व तने की मोटाई ग्राफ्टिंग के लिए उपयुक्त होनी चाहिए। सायन के लिए अच्छी किस्म के स्वस्थ पेड़ की शाखा चुनें। कट लगाने और शाखा को जोड़ने का काम साफ तरीके से करें। ग्राफ्टिंग के बाद पौधे को उचित नमी और हल्की रोशनी वाली जगह पर रखें। अगर पहली बार में ग्राफ्टिंग सफल नहीं होती है तो इसका कारण समझकर दोबारा प्रयास किया जा सकता है। बड़े स्तर पर पौधे तैयार करने से पहले कुछ पौधों पर तकनीक का अभ्यास करना भी उपयोगी हो सकता है।

1 Comment