Pashuon Ki Sehat Aur Wajan Ke Liye Pashuaahar: पशुओं की अच्छी सेहत, वजन और दूध उत्पादन के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार देना बहुत जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बहराइच में महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी एफपीओ की ओर से खास पशुआहार तैयार किया जा रहा है। Pashuon Ki Sehat Aur Wajan Ke Liye Pashuaahar में मक्का, गेहूं, चना, खली और राइस ब्रान समेत 11 तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
11 चीजों को मिलाकर तैयार होता है पशुआहार
TCL संस्था से जुड़े ब्लॉक मोबिलाइजर हसीब अहमद के मुताबिक, पशुआहार तैयार करने के लिए सबसे पहले मक्के की दरिया बनाई जाती है। इसकी मोटाई पशु की पाचन क्षमता के अनुसार रखी जाती है। भैंस और दूसरे बड़े पशुओं के लिए मक्के की दरिया महीन रखी जाती है, जबकि बकरे और बकरियों के लिए इसे थोड़ा मोटा तैयार किया जाता है। इसके बाद सभी सामग्री को साफ करके मशीन में अन्य घटकों के साथ मिलाया जाता है। इस पशुआहार में मक्का, गेहूं, चने का मिश्रण, खली, चूनी, राइस ब्रान, चूना, मिनरल मिक्सचर और नमक समेत कई सामग्री शामिल होती हैं। इसके अलावा प्राकृतिक औषधीय सामग्री भी मिलाई जाती है।
Pashuon Ki Sehat Aur Wajan Ke Liye Pashuaahar कैसे करता है मदद?
Pashuon Ki Sehat Aur Wajan Ke Liye Pashuaahar में शामिल अलग-अलग सामग्री पशुओं को ऊर्जा, प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करती है। इसे पशुओं के रोजाना चारे के साथ दिया जा सकता है। एफपीओ की ओर से किए गए एक परीक्षण में एक बकरे को करीब एक महीने तक निर्धारित मात्रा में यह दाना दिया गया। इसके बाद उसके वजन में बदलाव देखा गया। हालांकि, किसी पशु के वजन और स्वास्थ्य पर आहार का असर उसकी नस्ल, उम्र, वजन, अन्य आहार और देखभाल पर भी निर्भर करता है।
पशुओं को कितनी मात्रा में दें पशुआहार?
इस पशुआहार को सामान्य तौर पर सुबह और शाम दो बार देने की बात बताई गई है। समूह के अनुसार, 2 से 3 महीने के छोटे पशुओं को करीब 150 ग्राम सुबह और 150 ग्राम शाम दिया जा सकता है। वहीं बड़े पशुओं और मवेशियों के लिए करीब 250 से 300 ग्राम सुबह और इतनी ही मात्रा शाम को देने की जानकारी दी गई है। इसे सूखे भूसे में मिलाकर भी पशुओं को खिलाया जा सकता है। पशु की उम्र, वजन, नस्ल और स्वास्थ्य के अनुसार इसकी मात्रा में बदलाव की जरूरत हो सकती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।
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हर छह महीने में होती है पशुआहार की लैब जांच
Pashuon Ki Sehat Aur Wajan Ke Liye Pashuaahar समूह से जुड़े लोगों के मुताबिक, पशुआहार की गुणवत्ता की जांच के लिए हर छह महीने में लखनऊ की लैब में इसका परीक्षण कराया जाता है। लैब रिपोर्ट के आधार पर आहार की गुणवत्ता की जांच की जाती है। इससे पशुआहार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी गुणवत्ता पर निगरानी रखने में मदद मिलती है।
पशुपालकों को टीकाकरण और डीवर्मिंग की भी जानकारी
Pashuon Ki Sehat Aur Wajan Ke Liye Pashuaahar महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सदस्य केवल पशुआहार तैयार करने का काम नहीं करती हैं, बल्कि पशुपालकों को पशुओं के टीकाकरण और डीवर्मिंग के बारे में भी जानकारी देती हैं। पशुओं को पौष्टिक आहार देने के साथ समय पर टीकाकरण, डीवर्मिंग, साफ पानी और स्वच्छ वातावरण भी जरूरी है। इन सभी चीजों का पशुओं की सेहत पर असर पड़ता है।
संतुलित आहार से रखें पशुओं की सेहत का ध्यान
पशुओं की उम्र, नस्ल, वजन और दूध उत्पादन के अनुसार उनकी पोषण संबंधी जरूरत अलग-अलग हो सकती है। इसलिए पशुपालकों को पशुओं की जरूरत के अनुसार संतुलित आहार देना चाहिए। Pashuon Ki Sehat Aur Wajan Ke Liye Pashuaahar में इस्तेमाल होने वाली मक्का, गेहूं, चना, खली और राइस ब्रान जैसी सामग्री पशुओं के रोजाना आहार में पोषक तत्वों की पूर्ति में मदद कर सकती है। हालांकि, पशुआहार की सही मात्रा पशु की उम्र, वजन और स्वास्थ्य के अनुसार तय करना बेहतर होता है।

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