Renu Devi Prakritik Kheti Success Story: उत्तर प्रदेश के बहराइच की रेनू देवी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। कभी घर की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली रेनू देवी आज अपनी मेहनत से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। साल 2025 में कृषि सखी बनने के बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का काम शुरू किया और अपने क्लस्टर के 125 किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी देने की जिम्मेदारी संभाली।
Renu Devi Prakritik Kheti Success Story इस बदलाव की कहानी है, जिसमें एक महिला ने प्रशिक्षण और अवसर का लाभ उठाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि दूसरे किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए जागरूक करना शुरू किया।
बहराइच की रेनू देवी कैसे बनीं कृषि सखी?
रेनू देवी बहराइच जिले के पयागपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत सोहला की रहने वाली हैं। साल 2025 में कृषि विभाग की प्राकृतिक खेती योजना के तहत उनका चयन क्लस्टर स्तर पर कृषि सखी के रूप में किया गया। कृषि सखी बनने के बाद उन्हें अपने क्लस्टर के 125 किसानों को प्राकृतिक खेती और कृषि से जुड़ी तकनीकी जानकारी देने की जिम्मेदारी मिली। विभाग से प्रशिक्षण लेने के बाद रेनू देवी किसानों के खेतों तक पहुंचने लगीं और उन्हें खेती के अलग-अलग तरीकों की जानकारी देने लगीं। Renu Devi Prakritik Kheti Success Story
125 किसानों को प्राकृतिक खेती की दे रहीं जानकारी
रेनू देवी अपने क्लस्टर के 125 किसानों के साथ लगातार संपर्क में रहती हैं। वह किसानों को खेती में रासायनिक खाद और दवाओं पर निर्भरता कम करने तथा प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने के बारे में जानकारी देती हैं। वह किसानों को जैविक संसाधनों को स्थानीय स्तर पर तैयार करने के तरीके भी समझाती हैं। Renu Devi Prakritik Kheti Success Story
इसके अलावा फसलों को कीटों से बचाने के लिए प्राकृतिक तरीके से कीटनाशक तैयार करने और उनके उपयोग की जानकारी भी किसानों तक पहुंचाती हैं। इसी वजह से Renu Devi Prakritik Kheti Success Story में उनकी भूमिका केवल एक कृषि सखी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने क्षेत्र के किसानों के बीच प्राकृतिक खेती की जानकारी पहुंचाने का काम भी कर रही हैं।
ट्रेनिंग के बाद किसानों के खेतों तक पहुंचीं रेनू देवी
कृषि विभाग से प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग मिलने के बाद रेनू देवी ने सीखी गई तकनीकों को अपने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने क्लस्टर के किसानों से संपर्क किया और उन्हें प्राकृतिक खेती के तरीकों के बारे में समझाना शुरू किया। वह किसानों को खेती में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की जानकारी देती हैं। उनका प्रयास है कि किसान अपनी जरूरत के अनुसार जैविक संसाधन तैयार करें और खेती में अनावश्यक खर्च को कम करने के विकल्पों को समझें। Renu Devi Prakritik Kheti Success Story
कृषि सखी बनकर शुरू की अपनी कमाई
रेनू देवी के लिए कृषि सखी बनना उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव लेकर आया। पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। कृषि विभाग से जुड़े अवसर के बाद उन्होंने अपनी मेहनत से कमाई शुरू की। आज वह अपनी जरूरतों का खर्च खुद उठाने के साथ खेती से जुड़े कामों में भी अपनी आय का इस्तेमाल कर रही हैं। Renu Devi Prakritik Kheti Success Story की खास बात यह है कि उनकी कमाई ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ खेती के काम में भी मदद की है।
अपनी कमाई से खरीदा छोटा ट्रैक्टर
रेनू देवी ने अपनी मेहनत से कमाई का इस्तेमाल खेती के काम को आसान बनाने के लिए किया। उन्होंने अपनी कमाई से एक छोटा ट्रैक्टर खरीदा है। छोटे ट्रैक्टर की मदद से खेती से जुड़े कई काम आसानी से किए जा सकते हैं। रेनू देवी के लिए यह ट्रैक्टर केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और मेहनत का प्रतीक भी है।
ये भी देखे: दूध दुहने का सही तरीका, न लात मारने का डर, न डंडा लेकर खड़े होने की जरूरत, अपनाएं ये तरीका
किसानों को खेती की लागत कम करने की जानकारी
रेनू देवी किसानों को प्राकृतिक खेती के माध्यम से खेती की लागत को कम करने के विकल्पों के बारे में भी बताती हैं। उनका जोर स्थानीय और जैविक संसाधनों के इस्तेमाल पर रहता है। वह किसानों को समझाती हैं कि उपलब्ध संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल करके खेती में बाहर से खरीदे जाने वाले कुछ इनपुट पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़े विभिन्न तरीकों की जानकारी भी दी जाती है। Renu Devi Prakritik Kheti Success Story
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश
रेनू देवी का मानना है कि महिलाओं को नए अवसरों के बारे में जानकारी हासिल करके आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि अगर महिलाओं को सही प्रशिक्षण और काम करने का अवसर मिले तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कृषि सखी बनने के बाद रेनू देवी ने खुद को आर्थिक रूप से मजबूत किया और अब वह दूसरे किसानों के लिए भी काम कर रही हैं। उनकी कहानी ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को कृषि क्षेत्र में नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करती है। Renu Devi Prakritik Kheti Success Story
रेनू देवी की कहानी बनी किसानों और महिलाओं के लिए प्रेरणा
बहराइच की रेनू देवी ने कृषि सखी के रूप में अपनी नई पहचान बनाई है। वह 125 किसानों तक प्राकृतिक खेती की जानकारी पहुंचा रही हैं और खुद भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। Renu Devi Prakritik Kheti Success Story यह दिखाती है कि प्रशिक्षण, अवसर और मेहनत के जरिए ग्रामीण महिलाएं कृषि क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। रेनू देवी आज किसानों को प्राकृतिक खेती की जानकारी देने के साथ अपनी मेहनत से खेती के काम को भी आगे बढ़ा रही हैं।

1 Comment