Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se शुरू करने की मांग को लेकर राज्य के किसान संगठनों ने आवाज उठाई है। किसान संगठनों ने 15 अक्टूबर से चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस साल कम बारिश के कारण गन्ने में शुरुआती चीनी रिकवरी कम रह सकती है। ऐसे में पेराई जल्द शुरू होने से किसानों और चीनी मिलों, दोनों पर आर्थिक असर पड़ सकता है। Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se
किसान संगठनों ने मांग की है कि गन्ना पेराई का सीजन 15 अक्टूबर के बजाय 15 नवंबर के बाद शुरू किया जाए। संगठनों का कहना है कि नवंबर के बाद गन्ने की गुणवत्ता और चीनी रिकवरी में सुधार की संभावना रहती है। इसी मुद्दे को लेकर 8 अक्टूबर को पुणे स्थित गन्ना आयुक्त कार्यालय के सामने ‘आक्रोश मोर्चा’ निकालने की चेतावनी भी दी गई है।
महाराष्ट्र में गन्ना पेराई की तारीख को लेकर विवाद
Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se महाराष्ट्र में हर साल गन्ना पेराई का सीजन किसानों और चीनी मिलों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस बार पेराई 15 अक्टूबर से शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर किसान संगठन सहमत नहीं हैं। किसानों का कहना है कि इस साल कई क्षेत्रों में बारिश कम हुई है। कम बारिश की वजह से गन्ने की बढ़वार और उसमें मौजूद चीनी की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में अक्टूबर के मध्य से ही पेराई शुरू करने पर चीनी रिकवरी कम रहने की आशंका है। इसी वजह से Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se शुरू करने की मांग तेज हुई है। किसान संगठनों का तर्क है कि पेराई की शुरुआत कुछ समय आगे बढ़ाने से गन्ने को बेहतर तरीके से तैयार होने का समय मिल सकता है।
कम बारिश से चीनी रिकवरी पर असर की चिंता
किसान संगठनों के मुताबिक इस साल बारिश कम होने से गन्ना किसान पहले से दबाव में हैं। उनका कहना है कि गन्ने से चीनी की रिकवरी सीजन के अलग-अलग चरणों में अलग रह सकती है। संगठनों ने दावा किया है कि यदि अक्टूबर में पेराई शुरू की जाती है तो शुरुआती चरण में चीनी रिकवरी करीब 9 प्रतिशत रह सकती है। कम रिकवरी का सीधा असर चीनी उत्पादन की लागत पर पड़ सकता है। किसान नेताओं का कहना है कि जनवरी, फरवरी और मार्च के दौरान कई क्षेत्रों में गन्ने से बेहतर रिकवरी मिलती है। इसलिए Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se शुरू करने की मांग किसानों के हित से जुड़ी हुई है।
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 55 रुपये करने की मांग
गन्ना पेराई की तारीख के साथ किसान संगठनों ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाने की मांग भी की है। संगठनों ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 55 रुपये प्रति किलो करने की मांग रखी है।शिवसेना शेतकरी सेना के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. जलंदर पाटील के अनुसार, आयातित कच्ची चीनी की कीमत करीब 52 रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। इसके बाद परिवहन और प्रोसेसिंग का खर्च भी जुड़ता है। किसान संगठनों का कहना है कि लागत को देखते हुए घरेलू चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए। जलंदर पाटील ने घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए चीनी की अलग-अलग कीमत तय करने का सुझाव भी दिया है।
FRP भुगतान में देरी का मुद्दा
किसान संगठनों ने गन्ने के FRP भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया है। किसानों का कहना है कि चीनी मिलों की ओर से समय पर भुगतान नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। गन्ना आयुक्त डॉ. संजय कोल्टे के अनुसार, तय समय में FRP का भुगतान नहीं करने वाली या देरी की स्थिति में ब्याज का भुगतान नहीं करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (RRC) के तहत कार्रवाई की गई है। Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se
समय पर RSF रिपोर्ट जमा नहीं करने वाली मिलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। किसान नेता सावकर मदनाइक ने मांग की है कि FRP और ब्याज से संबंधित रिपोर्ट समय पर जमा नहीं करने वाली मिलों के जिम्मेदार अधिकारियों और निदेशक मंडल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने किसानों का बकाया जिम्मेदार लोगों की व्यक्तिगत संपत्ति से वसूलकर किसानों को देने की मांग भी की है। Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se
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हर जिले में सरकारी तौल केंद्र बनाने की मांग
गन्ने की तौल व्यवस्था को लेकर भी किसान संगठनों ने कई मांगें रखी हैं। जय शिवराय किसान संगठन के अध्यक्ष शिवाजी माने ने सरकार से हर जिले में सरकारी तौल कांटे लगाने की मांग की है। संगठन का सुझाव है कि प्रत्येक चीनी मिल के आसपास कम से कम 10 सरकारी तौल केंद्र बनाए जाएं। इन केंद्रों पर दर्ज गन्ने के वजन के आधार पर किसानों को भुगतान किया जाए। किसान संगठनों ने निजी तौल कांटों को बंद करने और गन्ने की चीनी रिकवरी के आधार पर किसानों को उचित मूल्य देने की मांग भी की है। Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se
8 अक्टूबर को ‘आक्रोश मोर्चा’ की चेतावनी
किसान संगठनों ने कहा है कि अगर पेराई शुरू करने की तारीख पर दोबारा विचार नहीं किया गया तो 8 अक्टूबर को पुणे में गन्ना आयुक्त कार्यालय के सामने ‘आक्रोश मोर्चा’ निकाला जाएगा। किसानों की प्रमुख मांग है कि Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se शुरू की जाए, ताकि कम बारिश की स्थिति में गन्ने की गुणवत्ता और चीनी रिकवरी को लेकर किसानों को नुकसान की आशंका कम हो सके। Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se
गन्ना आयुक्त से किसान संगठनों की मुलाकात
हाल ही में विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुणे में गन्ना आयुक्त डॉ. संजय कोल्टे से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में शिवसेना शेतकरी सेना, जय शिवराय किसान संगठन, शेतकरी-शेतमजूर संगठन, किसान मोर्चा, शरद जोशी से प्रेरित शेतकरी संगठन, स्वाभिमानी संभाजी ब्रिगेड और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल थे।
प्रतिनिधियों ने गन्ना पेराई की तारीख, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य, FRP भुगतान, ब्याज, गन्ने की तौल और किसानों के बकाये से जुड़े मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा। फिलहाल किसान संगठनों की मुख्य मांग Maharashtra Mein Ganna Perai 15 November Se शुरू करने की है। अब पेराई सीजन की तारीख को लेकर आगे क्या फैसला होता है, इस पर किसानों और चीनी उद्योग की नजर बनी हुई है।

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