राजस्थान में रबी फसल की किस्में, कम पानी में इन किस्मों की करें बुवाई Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein

राजस्थान में रबी फसल की किस्में, कम पानी में इन किस्मों की करें बुवाई Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein

Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein: राजस्थान में रबी सीजन के दौरान सिंचाई पानी की उपलब्धता किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय रहती है। कमजोर मानसून और जलस्तर में कमी की स्थिति में किसानों के लिए ऐसी फसलों और किस्मों का चयन करना जरूरी हो जाता है, जिनमें कम पानी की आवश्यकता हो। Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein जानना किसानों के लिए इसलिए भी जरूरी है, ताकि वे अपनी जमीन, सिंचाई सुविधा और बुवाई के समय के अनुसार सही फसल का चुनाव कर सकें।

कृषि विभाग ने सीमित सिंचाई संसाधनों वाले क्षेत्रों में सरसों, चना और जौ जैसी कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा देने की सलाह दी है। इसके अलावा गेहूं की कुछ ऐसी किस्में भी हैं, जिन्हें सीमित सिंचाई में उगाया जा सकता है।

राजस्थान में सरसों की प्रमुख किस्में

राजस्थान के कई क्षेत्रों में सरसों प्रमुख रबी फसल है। सरसों की किस्म का चुनाव खेत की मिट्टी और बुवाई के समय के अनुसार करना चाहिए। भारी जमीन और समय पर बुवाई के लिए आरएच-1975 और आरएच-1706 किस्में अपनाई जा सकती हैं। सेम प्रभावित भूमि के लिए सीएस-58, सीएस-60 और सीएस-62 किस्मों का विकल्प दिया गया है। वहीं रेतीली और टिब्बा भूमि में आरएच-1424, आरएच-725 और आरएच-761 किस्मों की बुवाई की जा सकती है। यदि सरसों की बुवाई में देरी हो जाए तो आरजीएन-236 उपयोगी विकल्प हो सकती है।

Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein राजस्थान में चने की उपयुक्त किस्में

कम पानी वाले क्षेत्रों में चना किसानों के लिए महत्वपूर्ण रबी फसल है। चने की किस्म का चयन सिंचाई सुविधा और बुवाई के समय को ध्यान में रखकर करना चाहिए। सिंचित क्षेत्र में समय पर बुवाई के लिए जीएनजी-2171 यानी मीरा किस्म का चयन किया जा सकता है। पछेती बुवाई के लिए जीएनजी-2261 यानी केशव किस्म उपयोगी है। वहीं असिंचित क्षेत्रों में जीएनजी-2461 यानी मूमल किस्म अपनाने की सलाह दी गई है। Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein

Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein जौ की डीडब्ल्यूआरबी-223 किस्म

सीमित पानी वाले किसानों के लिए जौ भी अच्छा फसल विकल्प हो सकता है। कृषि विभाग ने छिलका रहित जौ की डीडब्ल्यूआरबी-223 किस्म को उपयोगी बताया है। इस किस्म में गेहूं की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कम पानी और उर्वरक की जरूरत पड़ने की जानकारी दी गई है। इसे लवणीय और क्षारीय जमीन में भी उगाया जा सकता है। इसकी औसत उपज करीब 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसके दानों का उपयोग रोटी, दलिया और बिस्किट जैसे खाद्य पदार्थ बनाने में किया जा सकता है। पोषण की दृष्टि से भी छिलका रहित जौ में फाइबर, प्रोटीन, लोहा, जस्ता और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।

कम पानी में गेहूं की खेती के लिए किस्में

जिन किसानों के पास सिंचाई के सीमित साधन हैं, उनके लिए गेहूं की ऐसी किस्मों का चुनाव महत्वपूर्ण है, जिन्हें कम सिंचाई में तैयार किया जा सके। कृषि विभाग ने डब्ल्यूएच-1402, डब्ल्यूएच-1142 और डीबीडब्ल्यू-296 जैसी किस्मों को सीमित सिंचाई परिस्थितियों में उपयोगी बताया है। इन किस्मों का चयन करते समय खेत की मिट्टी, पानी की उपलब्धता और स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना चाहिए। Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein

Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein डब्ल्यूएच-1402 में दो सिंचाई का विकल्प

डब्ल्यूएच-1402 सीमित पानी में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए एक विकल्प है। इसमें सामान्य तौर पर दो सिंचाई की योजना अपनाई जा सकती है। पहली सिंचाई बुवाई के करीब 25 दिन बाद और दूसरी 70 से 80 दिन के बीच करने की सलाह दी जाती है। यह किस्म करीब 147 दिन में तैयार हो सकती है। इसकी औसत उपज लगभग 12 क्विंटल प्रति बीघा बताई गई है, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में उत्पादन 17 क्विंटल प्रति बीघा तक पहुंच सकता है। Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein

डीबीडब्ल्यू-296 यानी करण ऐश्वर्या

डीबीडब्ल्यू-296 को करण ऐश्वर्या के नाम से भी जाना जाता है। सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में गेहूं की खेती के लिए यह किस्म भी उपयोगी हो सकती है। कृषि विभाग के अनुसार, इसमें दो से तीन सिंचाई के साथ फसल तैयार की जा सकती है। इसकी औसत उपज करीब 14 क्विंटल प्रति बीघा और अनुकूल परिस्थितियों में उत्पादन 20 क्विंटल प्रति बीघा तक बताया गया है। यह किस्म सूखे और अधिक तापमान जैसी परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता के लिए भी उपयोगी मानी जाती है। Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein

सही किस्म का चयन क्यों जरूरी है?

Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein चुनते समय केवल उत्पादन क्षमता को नहीं देखना चाहिए। किसान को अपनी जमीन की प्रकृति, सिंचाई सुविधा, बुवाई का समय और स्थानीय मौसम को भी ध्यान में रखना चाहिए। कम पानी वाले क्षेत्रों में सरसों, चना और जौ जैसी फसलों को शामिल करने से पानी की जरूरत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। वहीं गेहूं की खेती करने वाले किसान सीमित सिंचाई के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन कर सकते हैं। Rajasthan Mein Rabi Fasal Ki Kismein

किसानों के लिए जरूरी सलाह

रबी सीजन की बुवाई से पहले किसान अपने खेत और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का आकलन करें। जहां पानी की कमी की संभावना है, वहां फसल विविधीकरण अपनाना उपयोगी हो सकता है। सरसों, चना और जौ के साथ कम सिंचाई वाली गेहूं की किस्मों को फसल योजना में शामिल किया जा सकता है। किसी भी किस्म का अंतिम चयन स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना बेहतर रहेगा, क्योंकि मिट्टी, मौसम और सिंचाई की स्थिति के अनुसार फसल का प्रदर्शन अलग-अलग हो सकता है।

author
Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

Related Articles

1 Comment

Avarage Rating:
  • 0 / 10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *