Deepika Gotia Success Story: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की दीपिका गोटिया ने मेहनत और लगन से अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया और आज अपने पोल्ट्री फार्म के साथ चूजों की सप्लाई और पशु आहार की दुकान भी चला रही हैं। Deepika Gotia Success Story ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो गांव में रहकर खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं। आज दीपिका न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं और किसानों को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
2019 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं दीपिका
Deepika Gotia Success Story की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई, जब दीपिका गोटिया जबलपुर जिले के कुंडम विकासखंड के पड़रिया गांव में सत्यसाईं स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। वह ग्रेजुएट हैं और गांव में रहकर अपना व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं। इसी उद्देश्य से उन्होंने स्वरोजगार के अवसर तलाशने शुरू किए। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता और आजीविका से संबंधित गतिविधियों की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने मुर्गी पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने का फैसला किया।
डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर शुरू किया मुर्गी पालन
दीपिका ने वर्ष 2024 में मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। इसके लिए उन्होंने स्वयं सहायता समूह से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और करीब 2.5 लाख रुपये की लागत से पोल्ट्री शेड तैयार किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित संख्या में मुर्गियों और चूजों के साथ काम शुरू किया। धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने के साथ उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। आज उनके फार्म में 500 से अधिक मुर्गियों और चूजों के पालन की व्यवस्था है। Deepika Gotia Success Story बताती है कि सही योजना, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार की शुरुआत की जा सकती है।
देशी, हाइब्रिड और सोनाली नस्ल की मुर्गियों का पालन
दीपिका के पोल्ट्री फार्म में देशी और हाइब्रिड मुर्गियों के साथ सोनाली नस्ल के मुर्गे-मुर्गियां और चूजे भी उपलब्ध हैं। वह मुर्गियों के पालन के साथ अंडों और बड़े मुर्गों की बिक्री से भी कमाई करती हैं। सीजन के दौरान उनके फार्म में उत्पादित अंडे जबलपुर में बिक्री के लिए भेजे जाते हैं। इससे उन्हें स्थानीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। मुर्गियों की नस्ल, उनकी देखभाल, आहार और बाजार की मांग के अनुसार व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। Deepika Gotia Success Story
मुर्गी पालन के साथ शुरू की पशु आहार की दुकान
अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए दीपिका ने वर्ष 2025 में पशु आहार की दुकान भी शुरू की। यहां वह मुर्गी पालकों को दाना, फीड और जरूरत के अनुसार पशुपालन से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा, वह किसानों को मुर्गियों की देखभाल, उचित आहार और पालन-पोषण से जुड़ी जानकारी भी देती हैं। इस तरह उन्होंने पोल्ट्री फार्म के साथ एक अतिरिक्त व्यवसाय खड़ा किया, जिससे आसपास के मुर्गी पालकों को भी सुविधा मिल रही है। Deepika Gotia Success Story
40 से अधिक किसानों को उपलब्ध करा रहीं चूजे और दाना
Deepika Gotia Success Story का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दीपिका अब अपने व्यवसाय के जरिए दूसरे किसानों की भी मदद कर रही हैं। वह आसपास के 40 से अधिक किसानों को चूजे, दाना, फीड और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। दीपिका के अनुसार, करीब 2 किलो वजन वाले मुर्गे की कीमत 1,000 रुपये तक मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक बिक्री मूल्य नस्ल, स्थानीय बाजार और मांग पर निर्भर करता है। वह किसानों को मुर्गी पालन शुरू करने और इसके प्रबंधन से जुड़ी जानकारी भी देती हैं।
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मुर्गी पालन से हर महीने 12 हजार रुपये की बचत
दीपिका के मुताबिक, मुर्गी पालन के व्यवसाय से वह हर महीने लगभग 12 हजार रुपये की बचत कर लेती हैं। इसके अतिरिक्त, वह पशु सखी के रूप में काम करती हैं और स्वयं सहायता समूह की अन्य गतिविधियों में भी भाग लेती हैं। इन सभी कार्यों से उनकी कुल मासिक आमदनी लगभग 18 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। यहां ध्यान देना जरूरी है कि मुर्गी पालन में वास्तविक मुनाफा चारे की लागत, मुर्गियों की मृत्यु दर, बीमारी, दवाइयों और बाजार में मिलने वाले भाव पर निर्भर करता है। Deepika Gotia Success Story
पशु सखी बनकर महिलाओं को दे रहीं प्रशिक्षण
Deepika Gotia Success Story केवल आर्थिक सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ाने की मिसाल भी है। दीपिका ने आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षण लिया है और अब दूसरी महिलाओं को भी गांव में रहकर पशुपालन तथा स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। पशु सखी के रूप में वह पशुओं की देखभाल और पशुपालन से जुड़ी जानकारी साझा करती हैं। उनके काम से आसपास की महिलाएं भी प्रोत्साहित हो रही हैं और व्यवसाय शुरू करने के नए अवसरों के बारे में सीख रही हैं।
400 से अधिक किसानों को जोड़ने की तैयारी
दीपिका अब अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं। इसके लिए वह मुर्गी पालन से जुड़े किसानों का क्लस्टर बनाने की कोशिश कर रही हैं। उनका लक्ष्य 400 से अधिक किसानों को जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। दीपिका को उम्मीद है कि इस पहल से किसानों को चूजे, दाना और अन्य जरूरी सामग्री आसानी से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। Deepika Gotia Success Story
साथ ही, वह अपनी मासिक आमदनी को बढ़ाकर करीब 30 हजार रुपये तक पहुंचाना चाहती हैं। Deepika Gotia Success Story से यह सीख मिलती है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर, प्रशिक्षण लेकर और छोटे स्तर से व्यवसाय शुरू करके महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। दीपिका की तरह ग्रामीण महिलाएं भी स्थानीय संसाधनों और बाजार की जरूरतों को समझकर अपने लिए आजीविका के नए रास्ते बना सकती हैं।

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