मध्य प्रदेश के 4 हजार से ज्यादा पटवारियों की बहाली तक रजिस्ट्रियां बंद, जानें पूरा मामला Swamitva Yojana Madhya Pradesh

मध्य प्रदेश के 4 हजार से ज्यादा पटवारियों की बहाली तक रजिस्ट्रियां बंद, जानें पूरा मामला Swamitva Yojana Madhya Pradesh

Swamitva Yojana Madhya Pradesh के तहत संपत्तियों की रजिस्ट्री का काम एक बार फिर प्रभावित हो गया है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक निलंबित और बर्खास्त किए गए 4 हजार से अधिक पटवारियों की बहाली के आदेश जारी नहीं होते, तब तक वे योजना के तहत रजिस्ट्री का काम नहीं करेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी आवासीय संपत्तियों के दस्तावेज प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

पटवारी संघ का कहना है कि सरकार की ओर से कानूनी संरक्षण से संबंधित आदेश जारी किए जाने के बावजूद जिला स्तर पर पटवारियों की बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसी कारण संघ ने योजना के काम से दूर रहने का फैसला किया है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।

Swamitva Yojana Madhya Pradesh में क्यों रुका रजिस्ट्री का काम?

Swamitva Yojana Madhya Pradesh के तहत रजिस्ट्री का काम दोबारा शुरू करने को लेकर 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पटवारी संघ के बीच बैठक हुई थी। बैठक के बाद संघ ने 12 अक्टूबर से योजना का काम शुरू करने की घोषणा की थी। हालांकि, बहाली के आदेश जारी नहीं होने के कारण अब यह प्रक्रिया फिर से अटक गई है। पटवारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 218 के तहत कानूनी संरक्षण से संबंधित आदेश जारी किया।

इसके बावजूद संघ का कहना है कि प्रभावित पटवारियों की बहाली के आदेश जारी होना अभी बाकी है। संघ की मांग है कि 17 सितंबर के बाद पटवारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को समाप्त करने के संबंध में सहमति के अनुसार आदेश जारी किए जाएं। जब तक इस मामले का समाधान नहीं होता, तब तक योजना के तहत रजिस्ट्री का काम शुरू करने पर सहमति नहीं बनी है।

मध्य प्रदेश में 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री का लक्ष्य

राज्य सरकार ने Swamitva Yojana Madhya Pradesh के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक लगभग 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी आवासीय संपत्तियों से संबंधित अधिकारों के दस्तावेज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

इस योजना की खास बात यह है कि हितग्राहियों से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इन खर्चों का वहन सरकार कर रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों को संपत्ति के दस्तावेज प्राप्त करने में आर्थिक राहत मिल सके। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। इनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। रजिस्ट्री का काम प्रभावित होने से निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में चुनौती आ सकती है। Swamitva Yojana Madhya Pradesh

क्या है स्वामित्व योजना और ग्रामीणों को क्या मिलेगा लाभ?

स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत गांवों के आबादी क्षेत्रों में स्थित आवासीय संपत्तियों का सर्वे किया जाता है। ड्रोन तकनीक की मदद से संपत्तियों की पहचान और मानचित्रण कर संबंधित रिकॉर्ड तैयार किए जाते हैं। Swamitva Yojana Madhya Pradesh का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्तियों के अधिकारों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराना है।

इससे संपत्ति के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और स्वामित्व से संबंधित विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है। संपत्ति के दस्तावेज होने से पात्र लोगों को बैंक ऋण के लिए आवेदन करते समय भी सुविधा मिल सकती है, बशर्ते संबंधित संपत्ति और दस्तावेज बैंक के नियमों के अनुसार स्वीकार्य हों। हालांकि, केवल दस्तावेज जारी होने से हर प्रकार का भूमि विवाद अपने आप समाप्त नहीं होता। Swamitva Yojana Madhya Pradesh

पटवारी संघ को किस बात पर है आपत्ति?

Swamitva Yojana Madhya Pradesh के तहत तैयार किए जा रहे दस्तावेजों में पटवारियों की भूमिका और उनकी कानूनी जिम्मेदारी को लेकर विवाद सामने आया है। पटवारी संघ का कहना है कि दस्तावेजों में पटवारी को ‘विक्रेता/निष्पादक’ और ग्रामीण को ‘क्रेता’ की भूमिका में दिखाए जाने से भविष्य में कानूनी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।

संघ के अनुसार, पटवारी संबंधित जमीन का मालिक नहीं होता। ऐसे में जमीन की सीमा, हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर विवाद होने पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले पटवारी की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं। पटवारी संघ चाहता है कि सरकार इस प्रक्रिया में पटवारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट करे और उन्हें आवश्यक कानूनी संरक्षण प्रदान करे। संघ का कहना है कि योजना से उसे आपत्ति नहीं है, लेकिन दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में जिम्मेदारी और अधिकारों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए। Swamitva Yojana Madhya Pradesh

गुना में जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप

स्वामित्व योजना को लेकर पटवारी संघ ने जमीन के रिकॉर्ड में विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया है। संघ का आरोप है कि गुना जिले में कुछ मामलों में वास्तविक कब्जे और दस्तावेजों में दर्ज नामों के बीच अंतर पाया गया है। उदाहरण के तौर पर, कुछ मामलों में जमीन पर कब्जा एक भाई का होने के बावजूद पट्टे में तीन भाइयों के नाम दर्ज होने की बात कही गई है।

ऐसी स्थिति में भविष्य में संपत्ति के स्वामित्व, हिस्सेदारी और बंटवारे को लेकर विवाद हो सकता है। संघ की मांग है कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले ऐसे मामलों में रिकॉर्ड की जांच की जाए। इसके साथ ही पटवारियों की कानूनी जिम्मेदारी और निजी पहचान से जुड़े डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। Swamitva Yojana Madhya Pradesh

पटवारियों की बहाली और वेतन विसंगति पर भी मांग

पटवारी संघ ने बहाली के अलावा वेतन विसंगति का मुद्दा भी उठाया है। पहले हुई बैठक में वेतन संबंधी मांगों पर आयोग के गठन के बाद विचार करने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 अक्टूबर को प्रस्तावित महासम्मेलन में पटवारियों की आर्थिक मांगों पर घोषणा करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, फिलहाल संघ की प्रमुख मांग निलंबित और बर्खास्त पटवारियों की बहाली के आदेश जारी करना है। संघ का कहना है कि जब तक प्रभावित कर्मचारियों की बहाली और कानूनी जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक योजना के तहत रजिस्ट्री का काम शुरू करना मुश्किल है। Swamitva Yojana Madhya Pradesh

Swamitva Yojana Madhya Pradesh की रजिस्ट्रियों पर आगे क्या होगा?

मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का काम दोबारा कब शुरू होगा, यह सरकार और जिला प्रशासन के फैसले पर निर्भर करेगा। पटवारी संघ की मांगें पूरी नहीं होने से ग्रामीण परिवारों को संपत्ति संबंधी दस्तावेज मिलने में देरी हो सकती है।

यदि जल्द ही बहाली के आदेश जारी होते हैं और पटवारी संघ के साथ सहमति बनती है, तो रजिस्ट्री की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल, इस संबंध में आगे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। ग्रामीणों के लिए जरूरी है कि वे अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और आवेदन की स्थिति की जानकारी संबंधित राजस्व कार्यालय से लेते रहें। इससे रजिस्ट्री शुरू होने पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में आसानी हो सकती है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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