पराली जलाने के नुकसान, मिट्टी के पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं प्रभावित, जानिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह Parali Jalane Ke Nuksan

पराली जलाने के नुकसान, मिट्टी के पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं प्रभावित, जानिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह Parali Jalane Ke Nuksan

Parali Jalane Ke Nuksan: धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली को साफ करने के लिए कई किसान उसमें आग लगा देते हैं। इससे खेत जल्दी साफ हो जाता है और अगली फसल की बुवाई करना आसान हो जाता है। लेकिन खेत में पराली जलाने से मिट्टी की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। Parali Jalane Ke Nuksan केवल मिट्टी की उर्वरता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे पर्यावरण और फसल उत्पादन भी प्रभावित हो सकते हैं।

गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ प्रोफेसर आर. आर. सिंह के मुताबिक, पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों के साथ जैविक कार्बन और कई पोषक तत्व प्रभावित होते हैं। लगातार खेत में पराली जलाने से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता कमजोर हो सकती है। आइए जानते हैं Parali Jalane Ke Nuksan क्या हैं और किसानों को पराली का प्रबंधन किस तरह करना चाहिए।

Parali Jalane Ke Nuksan से मिट्टी के कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं खत्म?

पराली में कई जरूरी पोषक तत्व और जैविक पदार्थ मौजूद होते हैं, जो मिट्टी की सेहत बनाए रखने में मदद करते हैं। जब किसान खेत में पराली जलाते हैं, तो आग की गर्मी और दहन की प्रक्रिया से इन पोषक तत्वों का नुकसान हो सकता है। पराली जलाने से मुख्य रूप से जैविक कार्बन, नाइट्रोजन और सल्फर जैसे तत्वों का नुकसान होता है। वहीं, फास्फोरस और पोटेशियम का कुछ हिस्सा राख में बच सकता है। हालांकि, इससे मिट्टी में पोषक तत्वों का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। यही Parali Jalane Ke Nuksan का एक बड़ा कारण है।

Parali Jalane Ke Nuksan से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं नष्ट

मिट्टी में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया और फंगस खेत की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों को सड़ाकर पौधों के लिए उपयोगी पोषक तत्वों में बदलते हैं। इसके अलावा मिट्टी में पोषक तत्वों के चक्र को बनाए रखने में भी मदद करते हैं। प्रोफेसर आर. आर. सिंह के मुताबिक, सामान्य तौर पर 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर मिट्टी के कई लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय रहते हैं। लेकिन पराली जलाने के दौरान मिट्टी की सतह का तापमान 50 से 100 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक तक पहुंच सकता है। इससे मिट्टी की ऊपरी परत में मौजूद कई सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकते हैं या उनकी सक्रियता कम हो सकती है।

Parali Jalane Ke Nuksan से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता होती है कमजोर

खेत में लगातार पराली जलाने से मिट्टी में जैविक कार्बन और जैविक पदार्थों की मात्रा कम हो सकती है। जैविक पदार्थ मिट्टी की संरचना सुधारने, नमी बनाए रखने और पौधों को पोषण उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। जब मिट्टी में इनकी कमी होने लगती है, तो उसकी प्राकृतिक उर्वरता प्रभावित हो सकती है। इसके कारण किसानों को फसल की अच्छी पैदावार लेने के लिए रासायनिक खाद और उर्वरकों पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है। इसलिए Parali Jalane Ke Nuksan को समझना और समय रहते इसका सही विकल्प अपनाना जरूरी है।

पराली जलाने से मिट्टी की नमी और संरचना पर पड़ता है असर

पराली जलाने से मिट्टी की ऊपरी सतह का तापमान बढ़ जाता है। इससे मिट्टी की नमी और उसमें रहने वाले सूक्ष्मजीव प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थों की कमी से उसकी पानी रोकने की क्षमता भी कमजोर हो सकती है। मिट्टी की संरचना खराब होने से फसल की जड़ों के विकास और पौधों को पोषक तत्व मिलने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। लगातार पराली जलाने से होने वाले ये नुकसान लंबे समय में खेती की लागत बढ़ा सकते हैं।

Parali Jalane Ke Nuksan के बजाय किसान अपनाएं ये तरीके

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, पराली को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना चाहिए। इससे मिट्टी की सेहत बनाए रखने और अगली फसल की बुवाई करने में मदद मिल सकती है।

खेत में पराली मिलाएं

किसान सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसे कृषि यंत्रों की मदद से पराली को खेत में मिलाकर अगली फसल की बुवाई कर सकते हैं। इससे खेत में जैविक पदार्थों को बनाए रखने में मदद मिलती है।

पराली से कम्पोस्ट खाद बनाएं

पराली को उचित तरीके से सड़ाकर जैविक कम्पोस्ट खाद तैयार की जा सकती है। इस खाद का इस्तेमाल खेत में करने से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।

पराली का पशुओं के चारे में करें उपयोग

जहां पराली की गुणवत्ता और फसल अवशेष पशुओं के चारे के लिए उपयुक्त हों, वहां किसान उसका इस्तेमाल चारे के रूप में कर सकते हैं। इससे पराली का उपयोग भी हो जाता है और खेत में आग लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

पराली से करें मल्चिंग

किसान पराली को खेत में बिछाकर मल्चिंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे मिट्टी की नमी बनाए रखने, खरपतवार नियंत्रित करने और मिट्टी को तेज धूप से बचाने में मदद मिल सकती है।

किसानों को क्यों नहीं जलानी चाहिए पराली?

पराली जलाने से खेत कुछ समय के लिए साफ जरूर हो जाता है, लेकिन इससे मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव, जैविक कार्बन और जरूरी पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं। लगातार ऐसा करने से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता कमजोर होने की आशंका रहती है। इसलिए किसानों को Parali Jalane Ke Nuksan को ध्यान में रखते हुए पराली जलाने से बचना चाहिए। इसके बजाय पराली को खेत में मिलाना, कम्पोस्ट खाद बनाना और कृषि यंत्रों की मदद से उसका वैज्ञानिक प्रबंधन करना बेहतर विकल्प है। इससे मिट्टी की सेहत बनाए रखने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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