Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang: चीनी उद्योग से जुड़ी कंपनियों और गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने केंद्र सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाने की मांग की है। संगठन चाहता है कि चीनी का मौजूदा न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किलो किया जाए। Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang के पीछे संगठन का तर्क है कि पिछले कई वर्षों से चीनी की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है, जबकि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।
इसके साथ ही संगठन ने गन्ना किसानों को भुगतान करने के लिए दो विकल्प वाला मॉडल लागू करने का सुझाव दिया है। इथेनॉल उत्पादन करने वाली चीनी मिलों को कर्ज में राहत देने की मांग भी की गई है। इन प्रस्तावों का असर चीनी मिलों और गन्ना किसानों दोनों पर पड़ सकता है।
चीनी का MSP 31 से बढ़ाकर 42 रुपये करने की मांग
ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने सरकार से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किलो करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, फरवरी 2019 से चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है। पिछले कई वर्षों में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस दौरान चीनी मिलों की उत्पादन लागत, बिजली, मजदूरी और परिवहन जैसे खर्चों में वृद्धि हुई है। ऐसे में मौजूदा कीमत पर चीनी बेचने से मिलों के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है। Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang
इसी वजह से Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang को उद्योग के लिए जरूरी बताया जा रहा है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, AISTA के चेयरमैन प्रफुल्ल विठलानी ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 4,200 रुपये प्रति क्विंटल करने का सुझाव दिया है। संगठन का मानना है कि इससे चीनी मिलों को उत्पादन लागत के अनुसार बेहतर कीमत मिल सकेगी।
गन्ने का FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल तय
केंद्र सरकार ने पेराई सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह दर 10.25 प्रतिशत की बेसिक चीनी रिकवरी के आधार पर तय की गई है। AISTA ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि गन्ने का FRP तय करते समय संबंधित पक्षों ने इस कीमत को स्वीकार किया था। इसलिए फिलहाल गन्ने के मौजूदा भाव को लेकर संगठन को कोई आपत्ति नहीं है। Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang
हालांकि, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई गन्ना किसान अपनी मांगों और भुगतान से जुड़ी समस्याओं को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। किसानों की शिकायतों पर विचार करने के लिए सरकार ने चार सदस्यीय समिति बनाई है, जिसकी अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद कर रहे हैं।
गन्ना किसानों को भुगतान के लिए मिलेंगे दो विकल्प
AISTA ने गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए गुजरात में अपनाए जा रहे भुगतान मॉडल की तर्ज पर दो विकल्प देने का सुझाव दिया है। संगठन का मानना है कि इससे किसानों को अपनी आर्थिक जरूरत के अनुसार भुगतान का तरीका चुनने की सुविधा मिलेगी। पहले विकल्प के तहत किसान गन्ना मिल को गन्ने की आपूर्ति करने के 7 से 14 दिनों के भीतर पूरी FRP राशि प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों को खेती के खर्च और घरेलू जरूरतों के लिए समय पर पैसा मिल सकेगा। Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang
दूसरे विकल्प में किसानों को निर्धारित FRP के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि देने का प्रस्ताव है। हालांकि, इस विकल्प में भुगतान एक साथ करने के बजाय तीन किस्तों में किया जाएगा। Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang के साथ किसानों के भुगतान की यह व्यवस्था भी चीनी उद्योग में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, यह अभी AISTA का सुझाव है और सरकार ने इसे लागू करने का फैसला नहीं किया है।
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इथेनॉल बनाने वाली चीनी मिलों को कर्ज में राहत देने की मांग
Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang चीनी मिलों ने इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में डिस्टिलरी स्थापित की हैं। इसके लिए कई मिलों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज भी लिया है। केंद्र सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। लेकिन खराब मौसम और गन्ने की उपलब्धता में संभावित कमी के कारण आने वाले सीजन में इथेनॉल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
इससे चीनी मिलों की कमाई पर असर पड़ सकता है और कर्ज चुकाने में परेशानी आ सकती है। AISTA का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में इथेनॉल परियोजनाओं को आर्थिक राहत देना जरूरी है। संगठन ने प्रभावित चीनी मिलों के लिए कर्ज की किस्तों में राहत देने का प्रस्ताव रखा है।
दो साल तक कर्ज की किस्तों पर रोक लगाने का सुझाव
Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang: AISTA ने इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी प्रभावित परियोजनाओं के लिए दो साल तक कर्ज के मूलधन और ब्याज की किस्तों के भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है। इसके अलावा संगठन ने कर्ज पर मिलने वाली सरकारी ब्याज छूट को मौजूदा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है। संगठन का मानना है कि इससे चीनी मिलों पर वित्तीय बोझ कम होगा और उनके डिफॉल्टर होने की आशंका घट सकती है। इस प्रस्ताव के साथ Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang चीनी उद्योग की प्रमुख मांगों में शामिल हो गई है।
चीनी मिलों और गन्ना किसानों को क्या होगा फायदा?
अगर सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 42 रुपये प्रति किलो करने की मांग स्वीकार करती है, तो चीनी मिलों को अपनी लागत के अनुसार बेहतर बिक्री मूल्य मिल सकता है। इससे मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना है। वहीं, गन्ना किसानों के लिए दो विकल्प वाला भुगतान मॉडल लागू होने पर उन्हें भुगतान प्राप्त करने में अधिक सुविधा मिल सकती है।
किसान अपनी जरूरत के अनुसार जल्दी पूरा भुगतान या अतिरिक्त राशि के साथ किस्तों में भुगतान का विकल्प चुन सकेंगे। फिलहाल Sugar Ka MSP 42 Rupaye Kilo Karne Ki Mang पर सरकार का अंतिम फैसला आना बाकी है। यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो इसका असर चीनी उद्योग, गन्ना किसानों और इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी इकाइयों पर देखने को मिल सकता है।

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