पपीता और धनिया की मिश्रित खेती कैसे करें: कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली तकनीक

पपीता और धनिया की मिश्रित खेती कैसे करें: कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली तकनीक


पपीता और धनिया की मिश्रित खेती कैसे करें
: पपीता और धनिया की मिश्रित खेती आज के समय में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पपीता एक लंबी अवधि की फल फसल है, जबकि धनिया बहुत कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसल। जब इन दोनों फसलों को एक ही खेत में सही तकनीक से उगाया जाता है, तो किसान को नियमित आय, बेहतर भूमि उपयोग और कम जोखिम का फायदा मिलता है। यही कारण है कि पपीता–धनिया मिश्रित खेती को एक स्मार्ट और लाभकारी खेती मॉडल माना जाता है। पपीते की खेती में शुरुआती 2–3 महीनों तक पौधों के बीच काफी खाली जगह रहती है। यही खाली जगह धनिया की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है। धनिया जल्दी तैयार होकर खेत से निकल जाता है और तब तक पपीते के पौधे भी बड़े हो जाते हैं, जिससे दोनों फसलें एक-दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचातीं।

पपीता और धनिया की मिश्रित खेती कैसे करें


पपीता और धनिया की मिश्रित खेती के फायद
इस मिश्रित खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान को पपीते की फसल तैयार होने तक इंतजार नहीं करना पड़ता। धनिया 30–40 दिनों में तैयार हो जाता है, जिससे तुरंत नकद आमदनी मिल जाती है। इसके अलावा धनिया जमीन को ढककर रखता है, जिससे खरपतवार कम उगते हैं और मिट्टी की नमी बनी रहती है। एक ही खेत से दो फसलें लेने पर लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। साथ ही, यदि किसी कारण से पपीते की फसल में नुकसान हो जाए, तो धनिया से होने वाली आय किसान के लिए सहारा बनती है।


खेत और मिट्टी की तैयारी
पपीता और धनिया की मिश्रित खेती के लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत में पानी भरने की समस्या नहीं होनी चाहिए, क्योंकि पपीता जलभराव को बिल्कुल सहन नहीं करता। खेत की 2–3 गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बना लें और प्रति हेक्टेयर 10–15 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद मिला दें। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और दोनों फसलों की जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं।


बुवाई और रोपाई का सही तरीका
सबसे पहले पपीते की नर्सरी तैयार की जाती है और लगभग 30–35 दिन के स्वस्थ पौधों को खेत में रोपा जाता है। पपीते की रोपाई आमतौर पर फरवरी–मार्च या जुलाई–अगस्त में की जाती है। पौधों की दूरी 6×6 फीट या 8×8 फीट रखनी चाहिए। पपीते की रोपाई के 7–10 दिन बाद, जब पौधे जम जाएं, तब पपीते की कतारों के बीच धनिया की बुवाई कर दी जाती है। धनिया की लाइन से लाइन दूरी लगभग 25–30 सेमी रखना सही रहता है। इससे दोनों फसलों को पर्याप्त पोषक तत्व और जगह मिलती है।

पपीता और धनिया की मिश्रित खेती कैसे करें
पपीता और धनिया की मिश्रित खेती कैसे करें


खाद, उर्वरक और सिंचाई प्रबंधन
पपीते को नियमित पोषण की जरूरत होती है, इसलिए संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देना जरूरी है। वहीं धनिया के लिए हल्की मात्रा में नाइट्रोजन पर्याप्त रहती है। यदि ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था हो तो यह मिश्रित खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है, क्योंकि इससे पानी और खाद दोनों की बचत होती है। सिंचाई करते समय इस बात का ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो। धनिया को हल्की और नियमित सिंचाई चाहिए, जबकि पपीते को 7–10 दिन के अंतराल पर पानी देना पर्याप्त होता है।


रोग–कीट प्रबंधन और देखभाल
पपीता और धनिया की मिश्रित खेती में रोग और कीटों का प्रकोप तुलनात्मक रूप से कम देखा जाता है, फिर भी समय-समय पर निगरानी जरूरी है। पपीते में तना सड़न और माहू जैसे कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि धनिया में पत्ती धब्बा रोग देखने को मिलता है। जैविक खेती करने वाले किसान नीम तेल या जैविक कीटनाशकों का उपयोग कर सकते हैं, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और लागत भी कम होती है।


कटाई, उत्पादन और मुनाफा
धनिया की हरी पत्ती 30–40 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। एक हेक्टेयर क्षेत्र से 60–80 क्विंटल तक हरा धनिया आसानी से प्राप्त किया जा सकता है, जिससे अच्छी अतिरिक्त आय होती है। वहीं पपीते के पौधे 8–10 महीनों में फल देना शुरू कर देते हैं और एक पौधे से 30–50 किलो तक फल मिल सकता है। अगर कुल मुनाफे की बात करें तो धनिया से मिलने वाली शुरुआती आय और पपीते से होने वाली मुख्य आय मिलाकर किसान प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ कमा सकता है।


निष्कर्ष
पपीता और धनिया की मिश्रित खेती उन किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है, जो कम समय में नियमित आय चाहते हैं और साथ ही लंबी अवधि की फसल से बड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं। सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद, उचित सिंचाई और थोड़ी सी देखभाल से यह खेती मॉडल किसानों की आमदनी को दोगुना करने में मदद कर सकता है।पपीता और धनिया की मिश्रित खेती कैसे करें

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