सर्दियों में पशुपालकों के लिए बरसीम बना वरदान : भारत में पशुपालन किसानों की आय का एक महत्वपूर्ण साधन है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में जब हरे चारे की कमी हो जाती है, तब पशुओं के पोषण और दूध उत्पादन को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में बरसीम (Berseem) एक ऐसी चारा फसल है, जो पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बरसीम न केवल दूध उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि पशुओं की सेहत, पाचन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है।
बरसीम क्या है और क्यों है खास?
बरसीम एक दलहनी हरी चारा फसल है, जिसे मुख्य रूप से गाय, भैंस, बकरी और भेड़ के लिए उगाया जाता है। यह सर्दियों की प्रमुख चारा फसलों में शामिल है। बरसीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्रोटीन, खनिज तत्व और विटामिन से भरपूर होती है। इसकी पत्तियाँ मुलायम और रसदार होती हैं, जिससे पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं। सर्दियों में पशुपालकों के लिए बरसीम बना वरदान

सर्दियों में बरसीम की उपयोगिता
सर्दियों में सूखा चारा या भूसा अधिक खिलाने से पशुओं में कमजोरी, पाचन समस्या और दूध उत्पादन में गिरावट देखने को मिलती है। बरसीम इस समस्या का स्थायी समाधान है क्योंकि:
- यह ठंडे मौसम में भी तेजी से बढ़ता है
- लंबे समय तक हरा चारा उपलब्ध कराता है
- सूखे चारे की कमी को पूरा करता है
- पशुओं को ठंड से बचाने में मदद करता है
दूध उत्पादन बढ़ाने में बरसीम का योगदान
बरसीम में लगभग 18–22% तक कच्चा प्रोटीन पाया जाता है, जो दूध उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। नियमित रूप से बरसीम खिलाने से:
- दूध की मात्रा में 10 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है
- दूध की गुणवत्ता, फैट और SNF में सुधार आता है
- दूध का स्वाद और रंग बेहतर होता है
- दुग्ध पशु लंबे समय तक अधिक दूध देते हैं
पशुओं की सेहत पर बरसीम का प्रभाव
बरसीम केवल दूध बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पशुओं की संपूर्ण सेहत को भी बेहतर बनाता है।
- पाचन तंत्र मजबूत करता है: हरा और रसीला होने के कारण यह आसानी से पच जाता है
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: नियमित सेवन से पशु कम बीमार पड़ते हैं
- बछड़ों की बढ़वार में सहायक: तेजी से शारीरिक विकास होता है
- प्रजनन क्षमता में सुधार: समय पर हीट और बेहतर गर्भधारण
बरसीम की खेती कैसे करें? (संपूर्ण जानकारी)
बरसीम की खेती करना आसान और लाभकारी है, यदि सही तरीके अपनाए जाएं। सर्दियों में पशुपालकों के लिए बरसीम बना वरदान
बुवाई का समय:
- अक्टूबर से नवंबर सबसे उपयुक्त समय माना जाता है
भूमि की तैयारी:
- दो–तीन जुताई कर खेत को भुरभुरा बनाएं
- जल निकास की अच्छी व्यवस्था रखें
बीज दर:
- 20–25 किलो बीज प्रति हेक्टेयर
सिंचाई:
- पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद
- बाद में 15–20 दिन के अंतराल पर
कटाई:
- पहली कटाई 50–55 दिन में
- इसके बाद हर 25–30 दिन में कटाई
- एक फसल से 5–6 कटाइयाँ आसानी से ली जा सकती हैं | सर्दियों में पशुपालकों के लिए बरसीम बना वरदान
बरसीम खिलाते समय सावधानियां

हालांकि बरसीम बेहद लाभकारी है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- बहुत ज्यादा गीली बरसीम एक साथ न खिलाएं
- सुबह खाली पेट अधिक मात्रा में न दें
- भूसे या सूखे चारे के साथ मिलाकर खिलाना बेहतर रहता है
- फूली हुई या सड़ी बरसीम पशुओं को न खिलाएं
कम लागत में ज्यादा मुनाफा
बरसीम की खेती में लागत कम आती है और उत्पादन अधिक मिलता है। इससे:
- बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती
- दूध उत्पादन की लागत घटती है
- पशुपालन से शुद्ध मुनाफा बढ़ता है
निष्कर्ष
सर्दियों के मौसम में बरसीम वास्तव में पशुपालकों के लिए अमृत समान है। यह हरा चारा दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुओं की सेहत, ताकत और उत्पादकता को भी बेहतर बनाता है। यदि पशुपालक बरसीम की खेती और सही तरीके से इसका उपयोग करें, तो सर्दियों में चारे की समस्या से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है और पशुपालन को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। सर्दियों में पशुपालकों के लिए बरसीम बना वरदान |
