Maharashtra Natural Farming Scheme : महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत घटाने और मिट्टी व पर्यावरण की सेहत सुधारने के उद्देश्य से रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार की योजना के अनुसार अगले 2 वर्षों में लगभग 25 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाया जाएगा। यह पहल न केवल किसानों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि टिकाऊ और सुरक्षित कृषि व्यवस्था को भी मजबूती देगी।

क्या है प्राकृतिक खेती और क्यों है जरूरी
प्राकृतिक खेती ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें रासायनिक खाद, कीटनाशक और खरपतवार नाशक का उपयोग नहीं किया जाता। इसमें देशी गाय के गोबर-गोमूत्र, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। Maharashtra Natural Farming Scheme
लगातार रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरता घटने, उत्पादन लागत बढ़ने और फसल गुणवत्ता खराब होने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। प्राकृतिक खेती इन सभी समस्याओं का समाधान मानी जा रही है।
महाराष्ट्र सरकार की 25 लाख हेक्टेयर योजना
सरकार की इस योजना का लक्ष्य है कि चयनित जिलों और क्लस्टरों में चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती को अपनाया जाए। इसके तहत किसानों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का फोकस उन क्षेत्रों पर रहेगा जहां रासायनिक इनपुट का अत्यधिक उपयोग हुआ है और भूमि की सेहत कमजोर हो चुकी है। Maharashtra Natural Farming Scheme
किसानों को क्या-क्या फायदे मिलेंगे
इस योजना से किसानों को कई स्तरों पर लाभ होगा।
- खेती की लागत में भारी कमी आएगी क्योंकि महंगी खाद और कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता में सुधार होगा, जिससे लंबे समय तक उत्पादन स्थिर रहेगा।
- स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिलेगा, जिसकी बाजार में मांग अधिक रहती है।
- प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों को बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। Maharashtra Natural Farming Scheme
प्रशिक्षण और जागरूकता पर जोर
सरकार केवल योजना घोषित करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांव-गांव में प्रशिक्षण कार्यक्रम, डेमो प्लॉट और किसान कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। अनुभवी प्राकृतिक किसानों और कृषि विशेषज्ञों की मदद से नए किसानों को मार्गदर्शन दिया जाएगा ताकि वे बिना जोखिम के इस बदलाव को अपना सकें।

पर्यावरण और भविष्य की खेती पर असर
प्राकृतिक खेती से भूमि, जल और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। भूजल प्रदूषण कम होगा और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी। यह कदम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में भी सहायक साबित हो सकता है।
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यही मॉडल महाराष्ट्र की खेती को टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाएगा। Maharashtra Natural Farming Scheme
निष्कर्ष
महाराष्ट्र का यह फैसला खेती की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है। अगर यह योजना ज़मीन पर प्रभावी रूप से लागू होती है, तो राज्य न केवल प्राकृतिक खेती में अग्रणी बनेगा, बल्कि देशभर के किसानों के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा।
रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर यह बदलाव किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण—तीनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। Maharashtra Natural Farming Scheme.
