E-Vikas System : खेती के मौसम में समय पर खाद न मिलना किसानों के लिए हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। बुवाई के समय लंबी कतारें, खाद की कमी, जरूरत से कम या ज्यादा वितरण और कालाबाजारी जैसी परेशानियों से किसान जूझते रहे हैं। लेकिन अब ई-विकास प्रणाली के लागू होने से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। इस डिजिटल प्रणाली के जरिए खाद वितरण न केवल आसान हुआ है, बल्कि हजारों किसानों को इसका सीधा लाभ भी मिल रहा है।
क्या है ई-विकास प्रणाली?
ई-विकास प्रणाली एक डिजिटल और पारदर्शी खाद वितरण व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसल और भूमि के अनुसार सही मात्रा में खाद उपलब्ध कराना है। इस प्रणाली में किसान का पंजीकरण, उसकी जमीन का रिकॉर्ड, बोई गई फसल और खाद वितरण का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सरकारी सब्सिडी वाली खाद सही किसान तक पहुंचे और किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो। E-Vikas System

पहले किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था?
ई-विकास प्रणाली से पहले खाद वितरण में कई तरह की अव्यवस्थाएं थीं। कई बार किसानों को खाद के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। कुछ जगहों पर एक ही किसान को बार-बार खाद मिल जाती थी, जबकि कई किसान खाली हाथ लौट जाते थे। कालाबाजारी और फर्जी बिक्री की शिकायतें भी आम थीं। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति बेहद परेशान करने वाली थी। E-Vikas System
ई-विकास प्रणाली से कैसे बदली तस्वीर?
ई-विकास प्रणाली के लागू होने के बाद खाद वितरण पूरी तरह डेटा आधारित हो गया है। अब किसान जब खाद लेने जाता है, तो उसकी पहचान और विवरण सिस्टम में तुरंत सत्यापित हो जाते हैं। इसके बाद उसे उसकी फसल और भूमि के अनुसार ही खाद दी जाती है। इससे खाद का सही और संतुलित वितरण संभव हो पाया है।
इस डिजिटल सिस्टम से खाद दुकानदारों की मनमानी पर भी रोक लगी है। हर बोरी का रिकॉर्ड ऑनलाइन होने के कारण कालाबाजारी पर काफी हद तक नियंत्रण हुआ है। साथ ही सरकार को भी यह पता रहता है कि किस क्षेत्र में कितनी खाद की जरूरत है। E-Vikas System
हजारों किसानों को मिला सीधा फायदा
ई-विकास प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि हजारों किसान अब बिना परेशानी और बिना समय गंवाए खाद प्राप्त कर पा रहे हैं। उन्हें बार-बार दुकान के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और न ही लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता है। किसान अब समय पर बुवाई और फसल प्रबंधन की योजना बेहतर तरीके से बना पा रहे हैं।
कई किसानों का कहना है कि इस प्रणाली के बाद खाद को लेकर अनिश्चितता काफी हद तक खत्म हो गई है और खेती से जुड़ा तनाव भी कम हुआ है।
खेती और उत्पादन पर क्या पड़ेगा असर?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ई-विकास प्रणाली से खाद का संतुलित उपयोग बढ़ेगा। जब किसान को जरूरत के अनुसार खाद मिलेगी, तो लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। इसका सीधा असर किसानों की आय पर भी देखने को मिलेगा। E-Vikas System

पोर्टल पर पंजीयन कराना जरूरी
कृषि विभाग द्वारा सभी किसानों से अपील की गई है कि वे https://etoken.mpkrishi.org/ पोर्टल पर अपना पंजीयन अवश्य कराएं, ताकि उन्हें उनकी निर्धारित भूमि के रकबे के अनुसार उर्वरक समय पर मिल सके।आगे क्या हैं संभावनाएं?
आने वाले समय में ई-विकास प्रणाली को और बेहतर बनाने की तैयारी है। इसमें मोबाइल ऐप, SMS अलर्ट और रियल-टाइम स्टॉक जानकारी जैसी सुविधाएं जोड़ी जा सकती हैं, ताकि किसान घर बैठे ही खाद की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त कर सकें। E-Vikas System
निष्कर्ष
ई-विकास प्रणाली ने खाद वितरण व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया है। अब खाद लेने में होने वाली परेशानी काफी हद तक दूर हो चुकी है और हजारों किसान इसका लाभ उठा रहे हैं। अगर इस प्रणाली को प्रभावी तरीके से और व्यापक स्तर पर लागू किया गया, तो यह किसानों के लिए खाद से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान साबित हो सकती है। E-Vikas System
