Mitti parikshan kese kare : अच्छी फसल और ज्यादा पैदावार का सीधा संबंध मिट्टी की सेहत से होता है। अक्सर किसान मेहनत तो पूरी करते हैं, लेकिन सही जानकारी के बिना खाद और उर्वरक डालने से अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता। यही वजह है कि आज के समय में Soil Test (मिट्टी परीक्षण) को खेती की पहली और सबसे जरूरी सीढ़ी माना जाता है। सही तरीके से मिट्टी की जांच कर लेने से न केवल लागत कम होती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिलता है।
मिट्टी परीक्षण क्या होता है?
मिट्टी परीक्षण वह वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें खेत की मिट्टी की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि उसमें कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किस तत्व की कितनी कमी या अधिकता है। मिट्टी के pH मान, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी मिलने से किसान सही मात्रा में खाद का उपयोग कर सकता है। Mitti parikshan kese kare

मिट्टी परीक्षण क्यों जरूरी है?
अधिकांश किसान अंदाजे से उर्वरक डाल देते हैं, जिससे कभी-कभी फसल को नुकसान भी हो जाता है। मिट्टी परीक्षण से यह समस्या दूर होती है। इससे पता चलता है कि खेत की मिट्टी किस फसल के लिए उपयुक्त है और किस प्रकार की खाद की जरूरत है। सही जानकारी के आधार पर खेती करने से लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और लंबे समय तक अच्छी पैदावार मिलती है।
मिट्टी परीक्षण करने का आसान तरीका
मिट्टी परीक्षण करना बेहद आसान है और इसे कोई भी किसान कर सकता है। सबसे पहले खेत के अलग-अलग हिस्सों से मिट्टी का नमूना लेना जरूरी होता है। खेत के कोने, बीच और अन्य स्थानों से लगभग 15–20 सेंटीमीटर गहराई तक मिट्टी लें। सभी नमूनों को मिलाकर छाया में सुखाएं और फिर साफ थैली में भर लें। Mitti parikshan kese kare
इसके बाद इस नमूने को नजदीकी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला या कृषि विभाग के केंद्र पर जमा कर दें। कई जगह सरकारी स्तर पर यह जांच बहुत कम शुल्क या मुफ्त में भी की जाती है। कुछ किसान Soil Test Kit के जरिए खेत पर ही प्राथमिक जांच भी कर सकते हैं।
मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट कैसे समझें?
मिट्टी परीक्षण के बाद मिलने वाली रिपोर्ट में मिट्टी का pH मान और पोषक तत्वों की स्थिति दी होती है। यदि pH अधिक या कम हो, तो सुधार के उपाय भी बताए जाते हैं। रिपोर्ट में यह भी लिखा होता है कि किस फसल के लिए कितनी मात्रा में खाद और उर्वरक डालना सही रहेगा। किसान अगर इस रिपोर्ट के अनुसार खेती करता है, तो उत्पादन में साफ फर्क दिखाई देता है। Mitti parikshan kese kare
मिट्टी परीक्षण से कैसे बढ़ती है पैदावार?
जब मिट्टी की सही जरूरत के अनुसार खाद दी जाती है, तो पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है। इससे फसल जल्दी बढ़ती है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और दाने या फल का आकार और वजन भी बेहतर होता है। कई किसानों का अनुभव है कि मिट्टी परीक्षण अपनाने से 20–30 प्रतिशत तक पैदावार में बढ़ोतरी देखी गई है।

कितने समय में कराना चाहिए मिट्टी परीक्षण?
विशेषज्ञों के अनुसार हर 2–3 साल में एक बार मिट्टी परीक्षण जरूर कराना चाहिए। अगर किसान फसल चक्र बदलता है या किसी खास फसल की खेती करता है, तो परीक्षण और भी जरूरी हो जाता है। इससे मिट्टी की सेहत लंबे समय तक बनी रहती है।
निष्कर्ष
अगर आप सच में अपनी फसल की पैदावार बढ़ाना चाहते हैं, तो Soil Test को नजरअंदाज न करें। यह एक छोटा-सा कदम है, लेकिन इसके फायदे बहुत बड़े हैं। सही मिट्टी परीक्षण से न सिर्फ खेती की लागत कम होगी, बल्कि आपकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन भी कई गुना बेहतर हो जाएगा। आज के आधुनिक खेती के दौर में मिट्टी की जांच कर खेती करना ही समझदारी है। Mitti parikshan kese kare
