Gehu ki med pr hara dhaniya lgana kyo aavshyak hai : गेहूं की खेती में किसान अक्सर केवल मुख्य फसल पर ध्यान देते हैं और खेत की मेड़ को खाली छोड़ देते हैं, जबकि यही मेड़ अतिरिक्त कमाई, फसल सुरक्षा और मिट्टी संरक्षण का मजबूत साधन बन सकती है। मेड़ पर हरा धनिया लगाना आज के समय में एक स्मार्ट, कम लागत और ज्यादा लाभ देने वाला तरीका माना जा रहा है। नीचे बिंदुओं में इसे पूरी तरह समझाया गया है, ताकि किसान आसानी से इसे अपनाकर फायदा उठा सकें।
1. बिना अतिरिक्त जमीन के अतिरिक्त आमदनी
गेहूं की मेड़ पर हरा धनिया लगाने से किसान को अलग से खेत या जमीन की जरूरत नहीं पड़ती। मेड़ पर उगा धनिया 25–30 दिनों में हरी कटाई के लिए तैयार हो जाता है। इससे गेहूं की फसल के बीच ही किसान को नकद आमदनी मिलने लगती है। खास बात यह है कि इसमें न ज्यादा बीज खर्च होता है और न ही अलग से खाद या पानी की जरूरत पड़ती है।

2. कम खर्च में जल्दी तैयार होने वाली फसल
हरा धनिया कम समय और कम लागत में तैयार होने वाली फसल है। गेहूं की सिंचाई से ही धनिया को पर्याप्त नमी मिल जाती है, जिससे अलग से पानी देने की जरूरत नहीं होती। थोड़ी-सी देखभाल में ही किसान अच्छा उत्पादन ले सकता है, जिससे खेती की कुल लागत कम होती है। Gehu ki med pr hara dhaniya lgana kyo aavshyak hai
3. जंगली और छुट्टा पशुओं से आंशिक सुरक्षा
धनिया की तेज और खास सुगंध कई बार नीलगाय, जंगली सूअर और छुट्टा पशुओं को खेत के अंदर आने से रोकने में मदद करती है। जब मेड़ पर घना हरा धनिया उगा होता है, तो यह एक प्राकृतिक अवरोध की तरह काम करता है। इससे गेहूं की फसल को होने वाला नुकसान कुछ हद तक कम हो जाता है।
4. मेड़ की मिट्टी को मजबूती और कटाव से बचाव
गेहूं की सिंचाई या बारिश के समय मेड़ की मिट्टी बहने का खतरा रहता है। हरे धनिया की जड़ें मिट्टी को पकड़कर रखती हैं, जिससे मेड़ मजबूत बनी रहती है और मिट्टी का कटाव रुकता है। इससे हर साल मेड़ दोबारा बनाने की परेशानी भी कम हो जाती है। Gehu ki med pr hara dhaniya lgana kyo aavshyak hai
5. खरपतवार नियंत्रण और खेत की साफ-सफाई
खाली मेड़ पर अक्सर अनचाही घास और झाड़ियां उग आती हैं, जिन्हें हटाने में समय और मेहनत दोनों लगते हैं। जब मेड़ पर धनिया उगाया जाता है, तो वहां खरपतवार कम पनपते हैं। इससे खेत साफ-सुथरा रहता है और किसान का श्रम भी बचता है।
6. गेहूं की फसल पर कोई नकारात्मक असर नहीं
हरा धनिया गेहूं की फसल के साथ पूरी तरह अनुकूल रहता है। इसकी जड़ें उथली होती हैं, इसलिए यह गेहूं से पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करता। उल्टा, मेड़ पर हरियाली रहने से खेत का माइक्रो-क्लाइमेट बेहतर होता है, जिससे फसल की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है। Gehu ki med pr hara dhaniya lgana kyo aavshyak hai

7. बाजार में हमेशा बनी रहने वाली मांग
हरे धनिया की मांग गांव से लेकर शहर की मंडियों तक हमेशा बनी रहती है, खासकर सर्दियों के मौसम में। किसान मेड़ पर उगे धनिया को स्थानीय बाजार, सब्जी मंडी या सीधे ग्राहकों को बेचकर अतिरिक्त मुनाफा कमा सकता है।
निष्कर्ष
गेहूं की मेड़ पर हरा धनिया लगाना एक छोटा लेकिन बेहद फायदेमंद खेती उपाय है। इससे किसान को अतिरिक्त आमदनी, फसल की आंशिक सुरक्षा, मिट्टी संरक्षण और खेत का बेहतर प्रबंधन जैसे कई लाभ एक साथ मिलते हैं। कम खर्च और ज्यादा फायदे वाला यह तरीका आज के समय में हर गेहूं किसान को जरूर अपनाना चाहिए। Gehu ki med pr hara dhaniya lgana kyo aavshyak hai
