Pea Farming: सर्दियों में मटर की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी आमदनी देने वाली सब्जी फसल है। मटर ठंडे मौसम की फसल जरूर है, लेकिन जब तापमान बहुत ज्यादा गिर जाता है और पाला पड़ता है, तब फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि किसान कुछ वैज्ञानिक और व्यवहारिक तरीकों को अपनाएं, तो पाले और कड़ाके की ठंड का असर लगभग खत्म किया जा सकता है और फसल से ज्यादा उत्पादन व बेहतर गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है।
ठंड और पाले का मटर की फसल पर क्या असर पड़ता है
मटर का पौधा सामान्य ठंड को सहन कर लेता है, लेकिन जब तापमान शून्य के आसपास पहुंच जाता है, तब पौधों की कोशिकाओं में जमा पानी जमने लगता है। इससे पत्तियां झुलस जाती हैं, पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फूल झड़ने लगते हैं। पाले की मार से फलियों का विकास भी रुक सकता है, जिससे सीधा असर पैदावार पर पड़ता है।

उन्नत किस्म और सही बुवाई समय क्यों है जरूरी
मटर की अच्छी फसल के लिए सबसे पहला कदम सही किस्म का चुनाव है। ठंड सहन करने वाली किस्में मजबूत तना और जड़ें विकसित करती हैं, जिससे वे कम तापमान को झेल पाती हैं। वहीं, समय पर बुवाई करने से पौधों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है। मजबूत पौधे पाले का मुकाबला कमजोर पौधों की तुलना में बेहतर ढंग से करते हैं।Thand or paale ka bhi nhi hoga matar par asar
सिंचाई से पाले का असर कैसे होता है कम
जब खेत में नमी बनी रहती है, तो जमीन से निकलने वाली गर्मी वातावरण में फैलती है। यही गर्मी रात के समय पाले से फसल की रक्षा करती है। पाले की संभावना होने पर हल्की सिंचाई करने से खेत का तापमान कुछ डिग्री तक संतुलित रहता है। इससे पाला जमने की संभावना कम हो जाती है और पौधों की कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं।
जैविक खाद से पौधों की ताकत बढ़ाने का तरीका
गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक घोल पौधों को धीरे-धीरे पोषण देते हैं। इससे मटर के पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनमें ठंड सहन करने की क्षमता बढ़ती है। जैविक खाद मिट्टी की संरचना भी सुधारती है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पौधों को पाले से प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है।Thand or paale ka bhi nhi hoga matar par asar
पाले से बचाव के पारंपरिक लेकिन असरदार उपाय
कई किसान रात के समय खेत की मेड़ों पर सूखी पत्तियां या घास जलाकर हल्का धुआं करते हैं। धुआं वातावरण में एक परत बना देता है, जिससे तापमान अचानक नीचे नहीं गिरता। वहीं, छोटे खेतों में पौधों को सूखी घास या पॉलिथीन शीट से ढकना भी पाले से बचाव का कारगर तरीका है।
संतुलित पोषण से कैसे बढ़ती है फलियों की संख्या
मटर की फसल में संतुलित मात्रा में पोषक तत्व मिलने से पौधों में ज्यादा फूल आते हैं और फूल झड़ने की समस्या कम होती है। इससे फलियों की संख्या बढ़ती है और दाने भी भरावदार बनते हैं। ठंड के मौसम में पोषण संतुलन बिगड़ने पर पौधे कमजोर हो जाते हैं, इसलिए खाद प्रबंधन बेहद जरूरी है।Thand or paale ka bhi nhi hoga matar par asar

मौसम की जानकारी और समय पर निर्णय का महत्व
आजकल मौसम पूर्वानुमान आसानी से उपलब्ध है। किसान यदि पहले से ही ठंड और पाले की चेतावनी पर नजर रखें, तो समय रहते सिंचाई, ढकने और अन्य बचाव उपाय अपना सकते हैं। समय पर लिया गया निर्णय फसल को बड़े नुकसान से बचा सकता है और उत्पादन स्थिर बनाए रखता है।
निष्कर्ष
मटर की खेती में ठंड और पाले से घबराने की जरूरत नहीं है। सही किस्म का चयन, समय पर बुवाई, हल्की सिंचाई, जैविक खाद का उपयोग और पारंपरिक बचाव उपाय अपनाकर किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। यही सरल लेकिन प्रभावी फॉर्मूला अपनाकर किसान मटर की अच्छी पैदावार और ज्यादा मुनाफा आसानी से हासिल कर सकते हैं।Thand or paale ka bhi nhi hoga matar par asar
