Zin aditade sarso ko milne wali hai manjuri: सरसों देश की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है और लाखों किसान इसकी खेती से अपनी आजीविका चलाते हैं। अब खेती के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जीन एडिटेड सरसों को मंजूरी मिलने की तैयारी है, जिससे सरसों की खेती पहले से कहीं ज्यादा उन्नत, सुरक्षित और लाभकारी बन सकती है। इस नई तकनीक से न केवल पैदावार बढ़ेगी, बल्कि फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होगी।
जीन एडिटिंग क्या है और यह सरसों में कैसे काम करेगी
जीन एडिटिंग एक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें पौधे के अपने ही जीन में बेहद सूक्ष्म बदलाव किए जाते हैं। इसमें बाहर से किसी दूसरे जीव का जीन नहीं डाला जाता, बल्कि पौधे के अंदर मौजूद गुणों को ही बेहतर बनाया जाता है। सरसों में जीन एडिटिंग के जरिए ऐसे जीन को मजबूत किया गया है, जो अधिक उत्पादन, बेहतर तेल गुणवत्ता और रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं।Zin aditade sarso ko milne wali hai manjuri

संस्थाएं वर्तमान में 40 से ज्यादा फसलों पर शोध कर रही हैं
भारत जल्द ही कई जीन-एडिटेड फसल वेराइटीज को रिलीज करने की तैयारी में है. ICAR के तहत राज्य समर्थित संस्थाएं वर्तमान में 40 से ज्यादा फसलों पर शोध कर रही हैं, जिनमें 24 खेत फसलें और 17 बागवानी फसलें शामिल हैं, जैसे दालें, टमाटर, तंबाकू और केले. प्लांट जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट ने CRISPR/Cas9 तकनीक से ट्रांसजीन-मुक्त भारतीय सरसों (ब्रासिका ज्यून्सिया) की नई लाइन ‘वरुणा’ विकसित की है. इसमें ग्लुकोसिनोलेट की मात्रा को बीज और तेल में कम किया गया है ताकि सरसों की स्वाद और पौधों की मजबूती बनी रहे. पूरे पौधे में इसका असर नहीं डाला गया. यह जीन-एडिटेड सरसों की किस्म अभी अंतिम जांच प्रक्रिया में है, जिसे ICAR के अंतर्गत चल रहे ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत देखा जा रहा है.Zin aditade sarso ko milne wali hai manjuri
19 फीसदी अधिक पैदावार हासिल की गई है
दो जीन-एडिटेड चावल की किस्में- पुसा राइस DST1 और DRR धान 100- मई में जारी की गईं. इन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) और भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (IIRR) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. ICAR के महानिदेशक मंंगी लाल जाट ने इसे ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया और कहा कि आने वाले सालों में कई और जीन-एडिटेड फसलें रिलीज होंगी. पुसा राइस DST1 में वैज्ञानिकों ने वह जीन हटाया है जो पौधे की तनाव सहनशीलता को कमजोर बनाता था, जिससे सूखा सहन क्षमता बढ़ गई है. वहीं DRR धान 100 व्यापक रूप से उगाई जाने वाली साम्बा महसूरी किस्म से संबंधित है. CRISPR तकनीक से इसमें OsCKX2 जीन को एडिट कर 19 फीसदी अधिक पैदावार हासिल की गई है.पारंपरिक और जीन एडिटेड सरसों में क्या फर्क होगाZin aditade sarso ko milne wali hai manjuri
पारंपरिक सरसों की किस्में मौसम, कीट और रोगों पर काफी हद तक निर्भर रहती हैं। कई बार बीमारी लगने से पूरी फसल प्रभावित हो जाती है। वहीं जीन एडिटेड सरसों को इस तरह विकसित किया गया है कि वह सामान्य रोगों और कीटों के प्रति ज्यादा सहनशील हो। इससे किसानों को कीटनाशकों पर कम खर्च करना पड़ेगा और फसल का नुकसान भी घटेगा।
पैदावार में कैसे होगी बढ़ोतरी
जीन एडिटेड सरसों में पौधों की बढ़वार तेज होगी और फलियों की संख्या भी अधिक होगी। मजबूत तना और बेहतर जड़ प्रणाली के कारण पौधे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाएंगे। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा और प्रति हेक्टेयर पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।Zin aditade sarso ko milne wali hai manjuri
रोग प्रतिरोधक क्षमता से किसानों को क्या फायदा
सरसों की फसल में झुलसा रोग, कीट आक्रमण और अन्य बीमारियां अक्सर नुकसान का कारण बनती हैं। जीन एडिटेड किस्मों में इन रोगों के खिलाफ प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित की गई है। इससे फसल स्वस्थ रहेगी, उत्पादन स्थिर रहेगा और किसानों की लागत भी कम होगी।
तेल गुणवत्ता और किसानों की आय में सुधार
जीन एडिटेड सरसों का एक बड़ा फायदा इसका बेहतर तेल कंटेंट माना जा रहा है। उच्च गुणवत्ता वाला तेल न केवल बाजार में अच्छी कीमत दिलाएगा, बल्कि देश में खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।Zin aditade sarso ko milne wali hai manjuri

पर्यावरण और टिकाऊ खेती के लिए फायदेमंद
चूंकि जीन एडिटेड सरसों में कीटनाशकों और रासायनिक दवाओं की जरूरत कम होगी, इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित साबित होगी। मिट्टी की सेहत बेहतर रहेगी और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा, जो लंबे समय में किसानों और प्रकृति दोनों के लिए फायदेमंद है।
किसानों के लिए क्या बदल जाएगा
मंजूरी मिलने के बाद किसानों को ऐसी सरसों की किस्में मिलेंगी, जो कम जोखिम और ज्यादा लाभ देंगी। मौसम की मार और रोगों का डर कम होगा, जिससे किसान आत्मविश्वास के साथ खेती कर सकेंगे। इससे सरसों की खेती फिर से किसानों की पहली पसंद बन सकती है।
निष्कर्ष
जीन एडिटेड सरसों को मिलने वाली मंजूरी खेती के क्षेत्र में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। बेहतर पैदावार, मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता, कम लागत और ज्यादा मुनाफा—ये सभी फायदे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएंगे। आने वाले समय में यह तकनीक सरसों की खेती को नई दिशा देने के साथ-साथ देश की तिलहन उत्पादन क्षमता को भी नई ऊंचाई तक ले जा सकती है।Zin aditade sarso ko milne wali hai manjuri
