Tamatar ki kheti kese kare: टमाटर की खेती भारत में सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली सब्जी खेती में गिनी जाती है। इसकी मांग गांव से लेकर शहरों तक पूरे साल बनी रहती है। सही तकनीक और समय पर देखभाल से किसान कम समय में बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं। टमाटर की खेती छोटे और बड़े दोनों स्तर के किसानों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
• टमाटर एक तेज़ी से तैयार होने वाली नकदी फसल है
• साल में एक से अधिक बार खेती संभव है
टमाटर की खेती के लिए मध्यम गर्म और हल्की ठंडी जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है। बहुत अधिक ठंड, पाला या ज्यादा गर्मी से फूल और फल गिरने की समस्या आती है। अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी टमाटर के लिए सबसे उपयुक्त होती है।
• मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए
• खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए

अच्छी पैदावार के लिए उन्नत और रोग प्रतिरोधक किस्मों का चयन बेहद जरूरी होता है। खुले खेतों के लिए देशी किस्में और अधिक उत्पादन के लिए हाइब्रिड किस्में बेहतर परिणाम देती हैं।
• हाइब्रिड किस्मों में फल एकसमान और आकर्षक होते हैं
• बीज हमेशा प्रमाणित और भरोसेमंद स्रोत से लें
टमाटर की खेती में नर्सरी तैयार करना सबसे पहला और अहम चरण होता है। स्वस्थ नर्सरी से ही मजबूत पौधे मिलते हैं, जिससे आगे चलकर पैदावार बढ़ती है।
• 25–30 दिन में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं
• बीज उपचार करने से शुरुआती रोगों से बचाव होता हैTamatar ki kheti kese kare
खेत की तैयारी के लिए 2–3 बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए। अंतिम जुताई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
• प्रति हेक्टेयर 15–20 टन गोबर की खाद लाभदायक
• रोपाई शाम के समय करना बेहतर रहता है
रोपाई के बाद सही सिंचाई प्रबंधन बहुत जरूरी होता है। जरूरत से ज्यादा या कम पानी देने से फसल प्रभावित हो सकती है।
• 7–10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें
• ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है
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टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए संतुलित खाद और उर्वरक का प्रयोग जरूरी है। मुख्य पोषक तत्वों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है।
• नाइट्रोजन को भागों में देना ज्यादा फायदेमंद
• कैल्शियम और बोरॉन से फल फटना कम होता है
मल्चिंग टमाटर की खेती में काफी लाभकारी तकनीक मानी जाती है। इससे खेत की नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं।
• काली प्लास्टिक मल्च अधिक प्रभावी मानी जाती है
• फल मिट्टी के संपर्क में नहीं आते

टमाटर की फसल में कीट और रोगों पर लगातार नजर रखना जरूरी है। समय रहते नियंत्रण करने से भारी नुकसान से बचा जा सकता है।
• फल छेदक कीट और सफेद मक्खी मुख्य समस्या
• नीम आधारित जैविक उपाय शुरुआती अवस्था में कारगरTamatar ki kheti kese kare
रोपाई के लगभग 60–70 दिन बाद टमाटर की तुड़ाई शुरू हो जाती है। समय पर तुड़ाई करने से बाजार में अच्छा भाव मिलता है।
• नियमित तुड़ाई से उत्पादन बढ़ता है
• ग्रेडिंग और सही पैकिंग से कीमत ज्यादा मिलती है
इस प्रकार सही किस्म का चयन, नर्सरी से लेकर तुड़ाई तक उचित देखभाल और आधुनिक तकनीक अपनाकर टमाटर की खेती को अत्यधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। योजनाबद्ध तरीके से की गई टमाटर की खेती किसानों के लिए भरोसेमंद और स्थायी आय का मजबूत साधन बन सकती है।Tamatar ki kheti kese kare
