Jal bachat k liye kare low tannal takniki se kare sabji utpadhan: पानी की बढ़ती कमी और सिंचाई लागत में इजाफा आज किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे समय में लो टनल तकनीक (Low Tunnel Technology) सब्जी उत्पादन के लिए एक स्मार्ट और जल-संरक्षण आधारित समाधान बनकर सामने आई है। इस तकनीक से न सिर्फ कम पानी में बेहतर उत्पादन मिलता है, बल्कि सब्जियों की गुणवत्ता और बाजार कीमत भी बढ़ जाती है।
क्या है लो टनल तकनीक
लो टनल तकनीक में खेत में सब्जियों की क्यारियों पर लोहे या प्लास्टिक के हूप लगाकर उन पर पारदर्शी पॉलीथीन शीट ढक दी जाती है। यह संरचना जमीन के काफी करीब होती है, इसलिए इसे लो टनल कहा जाता है। इसके अंदर का तापमान और नमी नियंत्रित रहती है, जिससे फसल तेजी से बढ़ती है और पानी का नुकसान कम होता है।

कैसे होती है जल की बचत
लो टनल तकनीक में पॉलीथीन कवर की वजह से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। खुले खेत की तुलना में वाष्पीकरण बहुत कम होता है, जिससे बार-बार सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। ड्रिप सिंचाई के साथ इस तकनीक को अपनाने पर 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है। Jal bachat k liye kare low tannal takniki se kare sabji utpadhan
किन सब्जियों के लिए है उपयुक्त
लो टनल तकनीक से टमाटर, खीरा, मिर्च, भिंडी, तरबूज, खरबूज, लौकी, तोरई जैसी सब्जियों का उत्पादन सफलतापूर्वक किया जा सकता है। खास बात यह है कि इससे ऑफ-सीजन सब्जी उत्पादन भी संभव हो जाता है, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।
उत्पादन और आय में बढ़ोतरी
लो टनल के अंदर अनुकूल वातावरण मिलने से पौधों की बढ़वार तेज होती है और फूल-फल आने की प्रक्रिया जल्दी शुरू हो जाती है। इससे फसल समय से पहले तैयार होती है और उत्पादन भी बढ़ता है। कम पानी, कम कीट-रोग और बेहतर गुणवत्ता के कारण किसानों की कुल आय में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है। Jal bachat k liye kare low tannal takniki se kare sabji utpadhan

लागत और रख-रखाव
लो टनल तकनीक की शुरुआती लागत मध्यम होती है और छोटे-सीमांत किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं। पॉलीथीन शीट और हूप्स को 2–3 साल तक उपयोग किया जा सकता है। सही समय पर वेंटिलेशन देना और तापमान पर नजर रखना जरूरी होता है, ताकि फसल को नुकसान न पहुंचे।
किसानों के लिए क्यों जरूरी
जल संकट के इस दौर में लो टनल तकनीक खेती को टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभाती है। इससे पानी की बचत के साथ-साथ रासायनिक दवाओं का उपयोग भी कम होता है और पर्यावरण संतुलन बना रहता है। कम संसाधनों में ज्यादा मुनाफा चाहने वाले किसानों के लिए यह तकनीक एक बेहतर विकल्प है।
निष्कर्ष
यदि किसान जल बचत के साथ सब्जी उत्पादन से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो लो टनल तकनीक को अपनाना एक समझदारी भरा कदम है। यह तकनीक न सिर्फ खेती की लागत घटाती है, बल्कि बदलते मौसम और पानी की कमी के बीच किसानों को सुरक्षित और लाभकारी खेती का रास्ता भी दिखाती है। Jal bachat k liye kare low tannal takniki se kare sabji utpadhan
