अब अरहर की पैदावार में होगा बंपर इजाफा,किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya

अब अरहर की पैदावार में होगा बंपर इजाफा,किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya, जो भारत का पहला पूरी तरह तैयार टेलोमेयर-टू-टेलोमेयर (T2T) जीनोम है। यह उपलब्धि अरहर की लोकप्रिय ‘आशा’ किस्म पर आधारित है और भविष्य में अधिक उपज देने वाली, रोग प्रतिरोधी तथा जलवायु परिवर्तन के अनुकूल नई किस्मों के विकास का रास्ता खोलेगी। ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya की इस सफलता से किसानों की आय बढ़ाने और देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ी उम्मीद जगी है।

क्या है T2T जीनोम और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya जाने के बाद वैज्ञानिकों को अरहर की पूरी आनुवंशिक संरचना (Genetic Structure) बिना किसी गैप के उपलब्ध हो गई है। T2T जीनोम किसी भी फसल के डीएनए का सबसे सटीक और पूर्ण संस्करण माना जाता है, जिससे पौधे के प्रत्येक गुण को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।ICAR के अनुसार, इस जीनोम में लगभग 75.26 करोड़ बेस पेयर शामिल हैं, जिन्हें 92 कॉन्टिग्स में व्यवस्थित किया गया है। इसमें अरहर के सभी 11 गुणसूत्रों की संपूर्ण संरचना दर्ज की गई है। इस जीनोम को NIPB CcT2T 4 नाम दिया गया है और इसे अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस NCBI में भी जमा कराया गया है।

36 हजार से अधिक जीन की हुई पहचान

ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya परियोजना के दौरान वैज्ञानिकों ने 36,557 जीन और 48,008 mRNA कोडिंग सीक्वेंस की पहचान की है। RNA परीक्षण में 99.9 प्रतिशत से अधिक सटीक मिलान प्राप्त हुआ, जिससे यह साबित हुआ कि तैयार किया गया जीनोम अत्यंत विश्वसनीय और पूर्ण है।इस उपलब्धि से वैज्ञानिक उन जीनों की पहचान तेजी से कर पाएंगे जो अधिक उपज, बेहतर पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता और जलवायु सहनशीलता जैसे महत्वपूर्ण गुणों से जुड़े हैं।

अरहर की नई किस्मों के विकास में मिलेगी तेजी

अरहर, जिसे तूर दाल के नाम से भी जाना जाता है, भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है। ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya जाने के बाद अब आधुनिक तकनीकों जैसे मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग, मार्कर असिस्टेड ब्रीडिंग और जीन एडिटिंग के माध्यम से नई और उन्नत किस्मों का विकास पहले की तुलना में अधिक तेजी से किया जा सकेगा।नई किस्में कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देंगी, रोगों का अधिक प्रभाव नहीं होगा और बदलते मौसम की परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार देने में सक्षम होंगी।

किसानों की आय बढ़ाने में होगी मदद

ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। बेहतर बीज उपलब्ध होने से प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ेगा, खेती की लागत कम होगी और फसल की गुणवत्ता भी सुधरेगी। इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस शोध के आधार पर विकसित होने वाली नई अरहर की किस्में किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश में दालों की उपलब्धता भी बढ़ाएंगी।

भारत पहले भी रहा है अग्रणी

अरहर के जीनोम अनुसंधान में भारत पहले भी दुनिया का नेतृत्व कर चुका है। वर्ष 2011 में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NIPB) ने अरहर की ‘आशा’ किस्म का दुनिया का पहला ड्राफ्ट जीनोम तैयार किया था। इसके बाद 2017 में इसका उन्नत संस्करण जारी किया गया।अब ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya जाने के बाद भारत ने इस अनुसंधान को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर भारतीय कृषि अनुसंधान की क्षमता को भी दर्शाती है।

दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम

भारत सरकार वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन चला रही है। ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya की उपलब्धि इस मिशन को मजबूत आधार प्रदान करेगी। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी वैज्ञानिकों से बिना GMO तकनीक के अधिक उत्पादन देने वाली दलहन किस्में विकसित करने पर जोर दिया था।इस नई तकनीक के माध्यम से भविष्य में ऐसी अरहर की किस्में विकसित होंगी जो जलवायु परिवर्तन का सामना करने के साथ-साथ किसानों को अधिक लाभ भी देंगी।

भविष्य में क्या होंगे फायदे?

ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya की सफलता केवल अरहर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अन्य दलहनी फसलों के अनुसंधान को भी नई दिशा मिलेगी। इससे बेहतर गुणवत्ता वाले बीज, अधिक उत्पादन, पोषणयुक्त दालें और मजबूत खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।आने वाले समय में इस वैज्ञानिक उपलब्धि के आधार पर विकसित नई अरहर की किस्में किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने और भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ICAR Ne Arhar Ka T2T Genome Tayar Kiya भारत की कृषि विज्ञान यात्रा का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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