Hari mirch ki kheti kese kare: हरी मिर्च की खेती भारत में नकदी फसलों में गिनी जाती है। इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है और सही तकनीक अपनाने पर किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं। हरी मिर्च का उपयोग सब्जी, मसाले और प्रोसेसिंग उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए बाजार में इसकी कीमत स्थिर रहती है। आइए जानते हैं हरी मिर्च की खेती कैसे करें और बेहतर उत्पादन के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
हरी मिर्च के लिए उपयुक्त जलवायु
हरी मिर्च की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसका अच्छा विकास 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर होता है। बहुत अधिक ठंड या पाला फसल को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए सर्दियों में पाले वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी जरूरी होती है।

मिट्टी का चयन और खेत की तैयारी
हरी मिर्च की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है। खेत की तैयारी के लिए 2–3 गहरी जुताई करें, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए। अंतिम जुताई के समय 20–25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं।Hari mirch ki kheti kese kare
उन्नत किस्मों का चयन
अच्छे उत्पादन के लिए उन्नत और रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन बहुत जरूरी है। क्षेत्र और मौसम के अनुसार उपयुक्त किस्म लगाने से पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है। अच्छी किस्मों से हरी मिर्च लंबे समय तक तुड़ाई देती है, जिससे कुल आय बढ़ती है।
नर्सरी तैयार करने की विधि
हरी मिर्च की खेती आमतौर पर नर्सरी से पौध तैयार करके की जाती है। इसके लिए उठी हुई क्यारियां बनाएं और बीजों को बोने से पहले बीज उपचार करें। 25–30 दिन में पौध रोपाई के लिए तैयार हो जाती है। स्वस्थ और रोगमुक्त पौध ही खेत में लगानी चाहिए।Hari mirch ki kheti kese kare
रोपाई का सही समय और तरीका
रोपाई के लिए मौसम के अनुसार समय चुनना जरूरी है। खरीफ, रबी और गर्मी—तीनों मौसम में हरी मिर्च की खेती की जा सकती है। पौध से पौध की दूरी 45–50 सेंटीमीटर और कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर रखें, ताकि पौधों को पर्याप्त जगह और हवा मिल सके।
सिंचाई प्रबंधन
हरी मिर्च की फसल को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, लेकिन खेत में पानी भराव नहीं होना चाहिए। हल्की और समय पर सिंचाई से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। ड्रिप सिंचाई अपनाने से पानी की बचत होती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखी जाती है।Hari mirch ki kheti kese kare

खाद और उर्वरक प्रबंधन
अच्छी पैदावार के लिए संतुलित खाद और उर्वरकों का प्रयोग जरूरी है। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की सही मात्रा देने से पौधों में फूल और फल अधिक आते हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर पत्तियों पर छिड़काव करना फायदेमंद रहता है।
कीट और रोग नियंत्रण
हरी मिर्च में थ्रिप्स, एफिड, फल छेदक और सफेद मक्खी जैसे कीट नुकसान पहुंचाते हैं। समय पर निगरानी और आवश्यकतानुसार जैविक या अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें। रोगों से बचाव के लिए खेत की साफ-सफाई और फसल चक्र अपनाना जरूरी है।Hari mirch ki kheti kese kare
तुड़ाई और उत्पादन
हरी मिर्च की पहली तुड़ाई रोपाई के लगभग 60–70 दिन बाद शुरू हो जाती है। इसके बाद 7–10 दिन के अंतराल पर तुड़ाई की जा सकती है। समय पर तुड़ाई करने से पौधों में नई फलियां तेजी से लगती हैं और कुल उत्पादन बढ़ता है।
निष्कर्ष
हरी मिर्च की खेती कम लागत में लगातार आय देने वाली फसल है। सही किस्म, उचित सिंचाई, संतुलित पोषण और कीट-रोग प्रबंधन अपनाकर किसान अच्छी गुणवत्ता की हरी मिर्च का उत्पादन कर सकते हैं। यदि वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए, तो हरी मिर्च किसानों के लिए मुनाफे का भरोसेमंद साधन बन सकती है।Hari mirch ki kheti kese kare
