गेहूं में पीला रतुआ फैलने की आशंका: वैज्ञानिकों ने फसल बचाने के लिए दी अहम सलाह Gehu me pila ratuaa felne ki aashanka

गेहूं में पीला रतुआ फैलने की आशंका: वैज्ञानिकों ने फसल बचाने के लिए दी अहम सलाह Gehu me pila ratuaa felne ki aashanka

Gehu me pila ratuaa felne ki aashanka : देश के कई गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज के साथ पीला रतुआ रोग के फैलने की आशंका बढ़ गई है। ठंडी रातें, सुबह का कोहरा और दिन में हल्की धूप इस रोग के लिए अनुकूल वातावरण बना रही हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को समय रहते सावधानी बरतने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी है, ताकि गेहूं की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।

पीला रतुआ रोग क्या है?

पीला रतुआ गेहूं की एक खतरनाक फफूंद जनित बीमारी है, जिसे येलो रस्ट भी कहा जाता है। यह रोग पत्तियों पर पीली धारियों या पीले चूर्ण के रूप में दिखाई देता है। शुरुआत में यह हल्का नजर आता है, लेकिन समय पर नियंत्रण न किया जाए तो पूरी फसल को प्रभावित कर सकता है और उत्पादन में भारी गिरावट ला सकता है।

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किन परिस्थितियों में तेजी से फैलता है रोग?

वैज्ञानिकों के अनुसार पीला रतुआ मुख्य रूप से ठंडे और नमी वाले मौसम में तेजी से फैलता है। जब तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है और हवा में नमी अधिक होती है, तब यह रोग तेजी से पनपता है। घना कोहरा, लगातार सिंचाई और खेत में पानी का ठहराव भी इसके फैलाव को बढ़ावा देता है।Gehu me pila ratuaa felne ki aashanka

गेहूं की फसल में कैसे पहचानें पीला रतुआ?

इस रोग की पहचान आसान है, बशर्ते किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें। पत्तियों पर लंबी पीली धारियां दिखना, उंगलियों से छूने पर पीला पाउडर लगना और धीरे-धीरे पत्तियों का सूखना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ज्यादा प्रकोप होने पर पौधों की बढ़वार रुक जाती है और बालियों का विकास प्रभावित होता है।

पीला रतुआ से होने वाला नुकसान

यदि समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो पीला रतुआ गेहूं की पैदावार को 30 से 50 प्रतिशत तक घटा सकता है। दाने सिकुड़ जाते हैं, वजन कम हो जाता है और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इसका सीधा असर किसान की आमदनी पर पड़ता है।Gehu me pila ratuaa felne ki aashanka

वैज्ञानिकों की सलाह: ऐसे बचाएं गेहूं की फसल

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि रोग दिखाई देते ही तुरंत उपचार शुरू कर देना चाहिए। सबसे पहले रोगग्रस्त खेत में संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग करें और नाइट्रोजन की अधिकता से बचें। रोग की शुरुआती अवस्था में प्रोपिकोनाजोल, टेबुकोनाजोल या हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशकों का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करें। आवश्यकता पड़ने पर 10 से 12 दिन बाद दोबारा छिड़काव किया जा सकता है।

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रोकथाम के लिए जरूरी एहतियात

पीला रतुआ से बचाव के लिए किसानों को पहले से ही सतर्क रहना जरूरी है। रोग प्रतिरोधी गेहूं की किस्मों का चयन करें, खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था रखें और अत्यधिक घनी बुवाई से बचें। इसके अलावा, नियमित खेत निरीक्षण और समय पर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेना फसल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

पीला रतुआ गेहूं की फसल के लिए एक गंभीर खतरा है, लेकिन सही समय पर पहचान और वैज्ञानिक तरीकों से नियंत्रण कर किसान अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। मौसम की स्थिति पर नजर रखें, खेत का नियमित निरीक्षण करें और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही तुरंत उचित कदम उठाएं, ताकि पैदावार और मुनाफा दोनों सुरक्षित रह सकें। Gehu me pila ratuaa felne ki aashanka

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