Aalu me fail rahe let blaight roog ka ase kare nivaran : आलू की फसल पर इन दिनों लेट ब्लाइट रोग का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। ठंड, नमी और कोहरे वाले मौसम में यह रोग बहुत कम समय में पूरे खेत को अपनी चपेट में ले सकता है। अगर समय पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह बीमारी पत्तियों से लेकर तनों और कंदों तक को खराब कर देती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि किसान लक्षण पहचानकर सही दवाओं का समय पर छिड़काव करें।
क्या है लेट ब्लाइट रोग और क्यों है खतरनाक
लेट ब्लाइट एक फफूंदजनित रोग है, जो विशेष रूप से आलू की फसल में तेजी से फैलता है। अधिक नमी, लगातार ओस गिरना, हल्की बारिश और 10–20 डिग्री सेल्सियस तापमान इस रोग के लिए सबसे अनुकूल स्थिति मानी जाती है। एक बार संक्रमण शुरू होने पर यह 2–3 दिन में ही पूरे खेत में फैल सकता है।

आलू में लेट ब्लाइट के प्रमुख लक्षण
शुरुआत में आलू की पत्तियों के किनारों पर हल्के हरे या भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। धीरे-धीरे ये धब्बे बड़े होकर पत्तियों को झुलसा देते हैं। पत्तियों की निचली सतह पर सफेद फफूंद जैसी परत भी दिखाई दे सकती है। रोग बढ़ने पर तने काले पड़ने लगते हैं और अंत में कंद भी सड़ने लगते हैं, जिससे उपज और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती है।Aalu me fail rahe let blaight roog ka ase kare nivaran
लेट ब्लाइट से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
आलू की फसल में जल निकास की उचित व्यवस्था रखें ताकि खेत में पानी न रुके। संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरक का उपयोग करें, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन रोग को बढ़ावा देती है। रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से हटाकर नष्ट करें और मौसम की लगातार निगरानी करते रहें।
10 दिन के अंतराल पर करें इन दवाओं का छिड़काव
लेट ब्लाइट के प्रभावी नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों द्वारा कुछ फफूंदनाशकों की सलाह दी जाती है। रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही मेलोडी डुओ का छिड़काव बेहद प्रभावी माना जाता है। इसके अलावा किसान रिडोमिल गोल्ड, क्यूरजेट, ब्लॉक्स, मैनकोजेब या क्लोरोथैलोनिल आधारित दवाओं का भी उपयोग कर सकते हैं।
इन दवाओं का छिड़काव 7 से 10 दिन के अंतराल पर करना चाहिए। ध्यान रखें कि दवा की सही मात्रा और साफ पानी का उपयोग करें ताकि दवा का असर बेहतर हो।Aalu me fail rahe let blaight roog ka ase kare nivaran

छिड़काव करते समय रखें ये जरूरी बातें
छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय करें, जब हवा कम हो। पत्तियों के ऊपर और नीचे दोनों सतह पर दवा का समान रूप से पहुंचना जरूरी है। एक ही दवा का बार-बार इस्तेमाल न करें, बल्कि दवाओं को बदल-बदलकर प्रयोग करें, इससे रोग में प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती।
समय पर नियंत्रण से बचाई जा सकती है फसल
लेट ब्लाइट रोग भले ही आलू की फसल के लिए बेहद खतरनाक हो, लेकिन सही समय पर पहचान और 10 दिन के अंतराल पर उचित दवाओं के छिड़काव से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर किसान मौसम की स्थिति पर नजर रखें और सलाह के अनुसार उपचार करें, तो आलू की फसल को इस गंभीर रोग से बचाकर अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है। Aalu me fail rahe let blaight roog ka ase kare nivaran
