Dupahar me sarso k khat me zink,potash ka kare chidkaav : रबी सीजन में सरसों की फसल किसानों की आमदनी का बड़ा जरिया है। अच्छी पैदावार और ज्यादा तेल प्रतिशत पाने के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन सबसे जरूरी माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगर सरसों के खेत में सही समय पर जिंक और पोटाश का छिड़काव किया जाए, तो दाने भरपूर भरते हैं, दाने का आकार बड़ा होता है और तेल की मात्रा भी स्पष्ट रूप से बढ़ जाती है।
सरसों की फसल में जिंक और पोटाश क्यों है जरूरी
सरसों की फसल में जिंक एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो पौधों की बढ़वार, फूल आने और दाने बनने की प्रक्रिया को मजबूत करता है। जिंक की कमी से पौधे कमजोर रह जाते हैं, फूल झड़ने लगते हैं और दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते। वहीं पोटाश पौधों की जड़ों को मजबूत करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और दानों में तेल निर्माण की प्रक्रिया को तेज करता है। यही कारण है कि जिंक और पोटाश दोनों का संतुलित उपयोग सरसों की पैदावार के लिए बेहद जरूरी है।

दोपहर में छिड़काव करने का क्या है फायदा
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सरसों में जिंक और पोटाश का छिड़काव दोपहर के समय (12 से 3 बजे के बीच) करने से पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। इस समय पत्तियों के रंध्र (स्टोमेटा) अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे पोषक तत्व सीधे पौधे के अंदर पहुंचते हैं और असर जल्दी दिखता है।Dupahar me sarso k khat me zink,potash ka kare chidkaav
जिंक और पोटाश के छिड़काव की सही मात्रा
सरसों की फसल में छिड़काव के लिए जिंक सल्फेट (21%) 0.5 प्रतिशत यानी 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाएं। इसके साथ पोटाश (पोटैशियम नाइट्रेट या पोटैशियम सल्फेट) 1 प्रतिशत यानी 10 ग्राम प्रति लीटर पानी मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। एक एकड़ खेत के लिए सामान्यतः 200 लीटर पानी पर्याप्त रहता है।
छिड़काव का सही समय और अवस्था
सरसों की फसल में पहला छिड़काव फूल आने से पहले और दूसरा छिड़काव फली बनने की अवस्था में करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है। इन दोनों अवस्थाओं में जिंक और पोटाश का छिड़काव करने से दाने अच्छे से भरते हैं और फली झड़ने की समस्या भी कम हो जाती है।Dupahar me sarso k khat me zink,potash ka kare chidkaav

छिड़काव करते समय रखें ये सावधानियां
छिड़काव से पहले दवा को अच्छी तरह घोल लें और साफ पानी का उपयोग करें। बहुत तेज धूप या हवा के समय छिड़काव न करें। कीटनाशक या अन्य दवाओं के साथ बिना सलाह के जिंक-पोटाश न मिलाएं। अगर पहले से किसी बीमारी या कीट का प्रकोप हो, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
सही पोषण से बढ़ेगी उपज और तेल प्रतिशत
अगर किसान सरसों की फसल में समय पर दोपहर के समय जिंक और पोटाश का छिड़काव करते हैं, तो दाने बड़े, चमकदार और भारी बनते हैं। इससे न केवल प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ती है, बल्कि तेल प्रतिशत भी बेहतर होता है। सही तकनीक और संतुलित पोषण अपनाकर किसान सरसों की खेती से शानदार मुनाफा कमा सकते हैं। Dupahar me sarso k khat me zink,potash ka kare chidkaav
