Ganne me ho rhi red rot bimari ka kese kare nivaran: सर्दियों का मौसम गन्ना किसानों के लिए इस बार बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। एक ओर जहां कड़ाके की ठंड, कोहरा और पाला गन्ने की बढ़वार को रोक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रेड रॉट (लाल सड़न) बीमारी तेजी से फैलकर फसल को भारी नुकसान पहुंचा रही है। कई क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर असर देखा जा रहा है, जिससे किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे में समय रहते सही उपाय अपनाकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
रेड रॉट बीमारी क्या है और क्यों है खतरनाक
रेड रॉट गन्ने की सबसे घातक बीमारियों में से एक मानी जाती है। यह मुख्य रूप से फफूंद जनित रोग है, जो बीज गन्ने, संक्रमित मिट्टी और सिंचाई के पानी के जरिए फैलता है। सर्दियों में जब नमी अधिक रहती है और तापमान कम होता है, तब यह बीमारी तेजी से पैर पसारती है। इस रोग से प्रभावित गन्ना अंदर से सड़ने लगता है, जिससे पूरा खेत धीरे-धीरे बर्बाद हो सकता है।

रेड रॉट बीमारी के प्रमुख लक्षण
रेड रॉट से प्रभावित गन्ने की पत्तियां ऊपर से पीली पड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे सूख जाती हैं। गन्ने को चीरने पर अंदर का गूदा लाल रंग का दिखाई देता है और उसमें से बदबू आती है। कई बार गूदे में सफेद धब्बे भी नजर आते हैं। यदि समय रहते पहचान न हो तो पूरा खेत इस बीमारी की चपेट में आ सकता है।Ganne me ho rhi red rot bimari ka kese kare nivaran
ठंड और मौसम से गन्ने को कैसे हो रहा है नुकसान
सर्दियों में लगातार कोहरा, पाला और कम तापमान गन्ने की वृद्धि को रोक देता है। पाले के कारण पत्तियां झुलस जाती हैं और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे गन्ने में शर्करा की मात्रा घटती है और उत्पादन कम हो जाता है। अधिक ठंड के समय सिंचाई न होने या गलत समय पर सिंचाई करने से भी जड़ें कमजोर हो जाती हैं, जिससे फसल रोगों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बन जाती है।
रेड रॉट और ठंड से बचाव के कारगर उपाय
गन्ने को रेड रॉट बीमारी से बचाने के लिए सबसे पहले स्वस्थ और रोगमुक्त बीज गन्ने का चयन करें। बुवाई से पहले बीज गन्ने को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करना बेहद जरूरी है। खेत में जल निकास की अच्छी व्यवस्था रखें, ताकि पानी भराव न हो और नमी नियंत्रित रहे। रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से निकालकर नष्ट कर दें, जिससे संक्रमण आगे न फैले।Ganne me ho rhi red rot bimari ka kese kare nivaran

ठंड और पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहता है, क्योंकि इससे खेत का तापमान कुछ हद तक नियंत्रित होता है। पाले की आशंका होने पर खेत के चारों ओर धुआं करना भी एक पारंपरिक और कारगर उपाय माना जाता है। संतुलित मात्रा में पोटाश का प्रयोग करने से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ठंड का असर कम होता है।
समय पर निगरानी है सबसे जरूरी
गन्ना किसानों के लिए इस मौसम में नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करना बेहद जरूरी है। जैसे ही रेड रॉट या ठंड से नुकसान के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तुरंत कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर उचित कदम उठाएं। सही समय पर अपनाए गए उपाय न केवल फसल को बचा सकते हैं, बल्कि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को बनाए रखने में भी मददगार साबित होते हैं।
अगर किसान सतर्क रहकर वैज्ञानिक तरीकों से गन्ने की देखभाल करें, तो सर्दियों में होने वाली इस दोहरी मार से फसल को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।Ganne me ho rhi red rot bimari ka kese kare nivaran
