Jeai ki nai kism se hoga prati akad 90 kwintal hara chara: देश में बढ़ते पशुपालन के साथ हरे चारे की कमी किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। खासकर सर्दियों में जब हरा चारा सीमित हो जाता है, तब दूध उत्पादन और पशुओं की सेहत दोनों पर असर पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के रूप में वैज्ञानिकों द्वारा जई (ओट्स) की एक नई उन्नत किस्म विकसित की गई है, जो कम समय में अधिक हरा चारा देने में सक्षम है। इस किस्म से किसान प्रति एकड़ करीब 80 से 90 क्विंटल तक हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं, जिससे पशु आहार की किल्लत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
क्यों खास है जई की यह नई किस्म
नई विकसित जई किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका तेज़ विकास और अधिक उत्पादन क्षमता है। यह किस्म ठंडे मौसम में भी अच्छी बढ़वार करती है और कम पानी में बेहतर परिणाम देती है। पारंपरिक किस्मों की तुलना में इसमें पत्तियां अधिक चौड़ी और रसीली होती हैं, जिससे हरे चारे की गुणवत्ता बेहतर होती है। इसका सेवन करने से दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन बढ़ता है और उनकी सेहत भी सुधरती है।जई की नई किस्म विकसित, अब पशु आहार की किल्लत खत्म.. प्रति एकड़ 90 क्विंटल होगा हरा चारा Jeai ki nai kism se hoga prati akad 90 kwintal hara chara

प्रति एकड़ 90 क्विंटल तक हरा चारा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से खेती करने पर इस नई जई किस्म से प्रति एकड़ 80 से 90 क्विंटल तक हरा चारा आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। अगर समय पर सिंचाई और संतुलित खाद प्रबंधन किया जाए, तो उत्पादन और भी बेहतर हो सकता है। यह उन किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जो डेयरी या पशुपालन को अपनी आय का मुख्य साधन बनाए हुए हैं।
खेती का सही समय और विधि
जई की इस नई किस्म की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से नवंबर के बीच माना जाता है। अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे बेहतर रहती है। खेत की तैयारी के समय एक गहरी जुताई के बाद 2–3 हल्की जुताई करें, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। बुवाई कतारों में करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और कटाई में भी सुविधा रहती है।Jeai ki nai kism se hoga prati akad 90 kwintal hara chara
कम लागत में अधिक मुनाफा
इस किस्म की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसकी खेती में लागत अपेक्षाकृत कम आती है। बीज की मात्रा सीमित होती है और रोग-कीटों का प्रकोप भी कम देखने को मिलता है। इससे दवाइयों पर होने वाला खर्च घट जाता है। कम लागत और अधिक हरा चारा मिलने के कारण किसानों को सीधा आर्थिक लाभ होता है।
दूध उत्पादन पर सकारात्मक असर
जई का हरा चारा पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो दुधारू पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद है। इस नई किस्म का हरा चारा खिलाने से पशुओं का पाचन सुधरता है और दूध उत्पादन में स्पष्ट बढ़ोतरी देखी जाती है।Jeai ki nai kism se hoga prati akad 90 kwintal hara chara

पशुपालकों के लिए बड़ी राहत
जई की यह नई किस्म उन पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जो सालभर हरे चारे की कमी से जूझते हैं। अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और कम लागत के कारण यह किस्म तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें, तो न सिर्फ पशु आहार की समस्या दूर होगी बल्कि उनकी आमदनी में भी अच्छी बढ़ोतरी होगी।
निष्कर्ष
जई की नई उन्नत किस्म ने हरे चारे की कमी को दूर करने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है। प्रति एकड़ 90 क्विंटल तक हरा चारा देने वाली यह किस्म पशुपालकों के लिए बड़ी राहत है और आने वाले समय में डेयरी सेक्टर को भी मजबूती प्रदान करेगी। Jeai ki nai kism se hoga prati akad 90 kwintal hara chara
