Aalu kisano ko huaa bada nuksaan : देश के कई राज्यों में आलू किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस समय हालात ऐसे हो गए हैं कि आलू की लागत करीब 11 रुपये प्रति किलो आ रही है, जबकि मंडियों में किसानों को सिर्फ 6 से 7 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है। इससे किसानों को प्रति किलो सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
क्यों गिर गए आलू के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार आलू के दाम गिरने के पीछे कई बड़े कारण हैं। इस बार उत्पादन अधिक होने से बाजार में आवक अचानक बढ़ गई है। वहीं, कोल्ड स्टोरेज से भी एक साथ आलू निकाले जाने के कारण सप्लाई ज्यादा हो गई, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा।

इसके अलावा,
- मांग की तुलना में आपूर्ति ज्यादा होना
- निर्यात में कमी
- प्रोसेसिंग यूनिट्स की सीमित खरीद
- सरकारी हस्तक्षेप की कमी
जैसे कारणों से बाजार भाव लगातार नीचे जा रहा है।
किसानों की लागत कितनी आ रही है?
आलू की खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और भंडारण खर्च लगातार बढ़ रहा है। मौजूदा हालात में—
- कुल उत्पादन लागत: लगभग 10–11 रुपये प्रति किलो
- मंडी भाव: 6–7 रुपये प्रति किलो
- नुकसान: 3–5 रुपये प्रति किलो
इस हिसाब से एक एकड़ में किसानों को हजारों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।Aalu kisano ko huaa bada nuksaan
छोटे किसानों पर सबसे ज्यादा असर
इस मूल्य गिरावट का सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है। जिन किसानों के पास कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं है, उन्हें मजबूरी में आलू औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। कई जगह किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
सरकार से किसानों की मांग
आलू उत्पादक किसान सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि—
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया जाए
- सरकारी एजेंसियों के माध्यम से आलू की खरीद हो
- प्रोसेसिंग उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए
- निर्यात को आसान बनाया जाए
किसानों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सीजन में आलू की खेती से किसान दूरी बना सकते हैं।Aalu kisano ko huaa bada nuksaan

आगे क्या करें किसान?
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि किसान—
- एक साथ फसल बेचने के बजाय चरणबद्ध तरीके से बिक्री करें
- कोल्ड स्टोरेज की सामूहिक व्यवस्था अपनाएं
- प्रोसेसिंग किस्मों की खेती पर ध्यान दें
- स्थानीय बाजार और सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने के विकल्प तलाशें
निष्कर्ष
आलू की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। 11 रुपये किलो की लागत पर 7 रुपये तक का बाजार भाव मिलना साफ तौर पर घाटे का सौदा है। यदि जल्द ही सरकारी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाले समय में आलू उत्पादन पर भी देखने को मिल सकता है।Aalu kisano ko huaa bada nuksaan
