Muli ki fasal ko bachana hai to rahe satarak : मूली की खेती कम समय में तैयार होने वाली और जल्दी मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है, लेकिन अगर इसमें रोग लग जाएं तो पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा रहता है। कई बार किसान थोड़ी सी लापरवाही के कारण अच्छी खासी उपज खो बैठते हैं। इसलिए जरूरी है कि मूली में लगने वाले प्रमुख रोगों की समय पर पहचान और उनका सही समाधान किया जाए।
मूली की फसल में रोग लगने के मुख्य कारण
मूली में रोग लगने का सबसे बड़ा कारण असंतुलित सिंचाई, जलभराव, संक्रमित बीज, ज्यादा नमी और लगातार एक ही खेत में मूली की खेती करना होता है। ठंड और कोहरे के मौसम में फंगल और बैक्टीरियल रोग तेजी से फैलते हैं, जिससे जड़ और पत्तियां दोनों प्रभावित होती हैं।

जड़ सड़न रोग से कैसे बचाएं
यह मूली की सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है। इस रोग में मूली की जड़ अंदर से सड़ने लगती है और बाहर से देखने पर पौधा अचानक मुरझा जाता है।
बचाव के लिए खेत में जल निकास अच्छा रखें और ज्यादा पानी न भरने दें। बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशक से उपचारित करें। रोग दिखने पर सिंचाई कम कर दें और जरूरत अनुसार अनुशंसित दवा का छिड़काव करें। Muli ki fasal ko bachana hai to rahe satarak
पत्ती धब्बा रोग का समाधान
इस रोग में पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे बनने लगते हैं, जिससे पत्तियां सूख जाती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती है।
इसके नियंत्रण के लिए खेत में हवा का अच्छा संचार रखें और पौधों की उचित दूरी बनाए रखें। रोग की शुरुआत में जैविक या अनुमोदित फफूंदनाशक का छिड़काव करने से अच्छा परिणाम मिलता है।
सफेद जंग रोग से रहें सतर्क
सफेद जंग रोग में पत्तियों के नीचे सफेद फफोले जैसे उभार दिखाई देते हैं, जो बाद में फट जाते हैं। इससे पत्तियां खराब हो जाती हैं और जड़ की बढ़वार प्रभावित होती है।
बचाव के लिए रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से हटा दें। संतुलित खाद का प्रयोग करें और जरूरत पड़ने पर सही समय पर दवा का छिड़काव करें।
मोजैक रोग से फसल को नुकसान
मोजैक रोग वायरस के कारण होता है, जिसमें पत्तियों पर हरे-पीले रंग की चित्तियां दिखाई देती हैं। यह रोग माहू जैसे रस चूसने वाले कीटों से फैलता है।
इससे बचाव के लिए माहू पर नियंत्रण जरूरी है। खेत को साफ रखें और रोगग्रस्त पौधों को नष्ट कर दें, ताकि बीमारी आगे न फैले। Muli ki fasal ko bachana hai to rahe satarak

रोगों से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
स्वस्थ और प्रमाणित बीज का ही चयन करें।
खेत में फसल चक्र अपनाएं और बार-बार एक ही खेत में मूली न उगाएं।
सिंचाई संतुलित रखें और जलभराव से बचें।
समय-समय पर खेत का निरीक्षण करते रहें, ताकि रोग की पहचान शुरुआती अवस्था में हो सके।
निष्कर्ष
अगर किसान मूली की फसल में लगने वाले रोगों को समय रहते पहचान लें और सही उपाय अपनाएं, तो भारी नुकसान से बचा जा सकता है। संतुलित खेती, साफ-सफाई और समय पर उपचार से मूली की फसल स्वस्थ रहती है और किसान को बेहतर पैदावार के साथ अच्छा मुनाफा मिलता है। Muli ki fasal ko bachana hai to rahe satarak
