Bajar k mahnege chnae bhil jay,kitchen garden me ugaay postik chana : आज के समय में चना (चना दाल और साबुत चना) हर घर की जरूरत है, लेकिन बाजार में इसके बढ़ते दाम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। ऐसे में अच्छी खबर यह है कि आप अपने किचन गार्डन या घर के आंगन में ही आसानी से पौष्टिक चना उगा सकते हैं। सही तरीके और थोड़ी सी देखभाल से घर पर उगा चना न केवल सस्ता पड़ेगा, बल्कि पूरी तरह शुद्ध और सेहतमंद भी होगा।
चना उगाने के लिए सही मौसम क्यों है जरूरी
चना ठंडी जलवायु की फसल है। इसे सर्दियों के मौसम में उगाना सबसे बेहतर माना जाता है। हल्की ठंड में चने के पौधे अच्छे से बढ़ते हैं और उनमें दाने भरावदार बनते हैं। बहुत ज्यादा गर्मी या नमी चने की बढ़वार को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए सही मौसम का चयन जरूरी है।

किचन गार्डन में मिट्टी कैसी होनी चाहिए
चना उगाने के लिए मिट्टी का भुरभुरा और जल निकास वाला होना बहुत जरूरी है। भारी और पानी रोकने वाली मिट्टी में चने की जड़ें सही से विकसित नहीं हो पातीं। गमले या क्यारी की मिट्टी में थोड़ी सी गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट मिलाने से पौधों को जरूरी पोषण मिलता है और उत्पादन बेहतर होता है।Bajar k mahnege chnae bhil jay,kitchen garden me ugaay postik chana
बीज का चयन और बुवाई की सही विधि
घर पर चना उगाने के लिए बाजार से अच्छे और साबुत चने चुनें। बीज बोने से पहले 8–10 घंटे पानी में भिगो देने से अंकुरण अच्छा होता है। इसके बाद गमले या क्यारी में लगभग 2–3 सेंटीमीटर गहराई पर बीज बो दें। बीजों के बीच थोड़ी दूरी रखें, ताकि पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
सिंचाई का सही तरीका अपनाएं
चना ऐसी फसल है, जिसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें और उसके बाद तभी पानी दें, जब मिट्टी सूखी दिखाई दे। जरूरत से ज्यादा पानी देने पर पौधे पीले पड़ सकते हैं और जड़ सड़ने का खतरा रहता है।
धूप और हवा का रखें ध्यान
चना के पौधों को रोजाना कम से कम 5–6 घंटे की धूप मिलनी चाहिए। किचन गार्डन या गमले को ऐसी जगह रखें, जहां भरपूर धूप और खुली हवा मिले। इससे पौधे मजबूत बनते हैं और दानों का विकास अच्छा होता है।Bajar k mahnege chnae bhil jay,kitchen garden me ugaay postik chana
खाद और पोषण की आसान व्यवस्था
चना दलहनी फसल है, इसलिए इसे ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत नहीं होती। हर 15–20 दिन में हल्की मात्रा में कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट डालना पर्याप्त रहता है। इससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और दाने ज्यादा पौष्टिक बनते हैं।
कीट और रोग से बचाव कैसे करें
घर पर उगाए गए चने में कीट लगने की संभावना कम होती है, फिर भी समय-समय पर पौधों की जांच करते रहें। अगर पत्तियों पर कीड़े दिखें, तो नीम के पानी का हल्का छिड़काव करें। यह एक देसी और सुरक्षित तरीका है।
कटाई का सही समय पहचानें
चना बोने के लगभग 90–110 दिन बाद फसल तैयार हो जाती है। जब पौधे सूखने लगें और फलियां पूरी तरह पक जाएं, तब कटाई करें। कटाई के बाद फलियों को धूप में सुखाकर दाने निकाल लें और सुरक्षित रख लें।Bajar k mahnege chnae bhil jay,kitchen garden me ugaay postik chana

घर पर उगाए चने के फायदे
किचन गार्डन में उगाया गया चना पूरी तरह रसायन मुक्त होता है। इससे आपको शुद्ध प्रोटीन मिलता है और बाजार पर निर्भरता कम होती है। साथ ही यह तरीका खर्च कम करने के साथ आत्मनिर्भरता भी बढ़ाता है।
निष्कर्ष
अगर आप बाजार के महंगे चनों से परेशान हैं, तो किचन गार्डन में चना उगाना एक बेहतरीन विकल्प है। सही मिट्टी, सीमित सिंचाई, धूप और थोड़ी सी देखभाल से आप घर पर ही पौष्टिक, शुद्ध और सस्ता चना उगा सकते हैं। यह न केवल आपकी सेहत के लिए अच्छा है, बल्कि आपकी जेब के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।Bajar k mahnege chnae bhil jay,kitchen garden me ugaay postik chana
