Pyaz-lahsun par kit-rogo ka hamla,samay rhate apnay bachav k ye uapy : प्याज और लहसुन रबी सीजन की प्रमुख नकदी फसलें हैं, जिनसे किसानों को अच्छी आमदनी होती है। लेकिन जरा-सी लापरवाही पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है। इस समय मौसम में उतार-चढ़ाव, नमी और तापमान के कारण कीट और रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। अगर सही समय पर पहचान और बचाव नहीं किया गया, तो उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता भी बुरी तरह प्रभावित होती है।
प्याज-लहसुन में कीट-रोग क्यों तेजी से फैलते हैं
इन फसलों की जड़ और पत्तियां कोमल होती हैं, जिस कारण कीट आसानी से हमला कर देते हैं। अधिक नमी, बार-बार सिंचाई, खेत में जलभराव और असंतुलित खाद प्रबंधन रोगों को बढ़ावा देता है। साथ ही लगातार एक ही फसल बोने से मिट्टी में रोगजनक सक्रिय हो जाते हैं।

प्याज-लहसुन के प्रमुख कीट और उनके लक्षण
प्याज और लहसुन में थ्रिप्स जैसे कीट पत्तियों का रस चूस लेते हैं, जिससे पत्तियां मुड़ने लगती हैं और सफेद-सी धारियां दिखने लगती हैं। इल्ली और अन्य कीट पौधों की बढ़वार रोक देते हैं, जिससे कंद का आकार छोटा रह जाता है। समय पर नियंत्रण न हो तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है। Pyaz-lahsun par kit-rogo ka hamla,samay rhate apnay bachav k ye uapy
रोगों का प्रकोप और पहचान
इन फसलों में झुलसा रोग, सड़न और फफूंद जनित बीमारियां आम हैं। रोग लगने पर पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे पौधे को घेर लेते हैं। जड़ सड़न की स्थिति में पौधे अचानक मुरझाकर गिरने लगते हैं।
खेत की तैयारी से ही करें रोग-कीट से बचाव
बुवाई या रोपाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें और पुरानी फसल के अवशेष हटा दें। इससे कीटों और रोगाणुओं का जीवन चक्र टूटता है। अच्छी जल निकास वाली जमीन में खेती करने से सड़न और फफूंद रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है। Pyaz-lahsun par kit-rogo ka hamla,samay rhate apnay bachav k ye uapy
संतुलित खाद और सिंचाई है सबसे बड़ा बचाव
जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने से कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। इसलिए संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग करें। सिंचाई हमेशा जरूरत के अनुसार करें और खेत में पानी रुकने न दें। सही पोषण और नमी संतुलन से पौधे मजबूत रहते हैं।

जैविक और देसी उपाय अपनाएं
नीम आधारित घोल या जैविक घोल का छिड़काव करने से कीटों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यह तरीका फसल और मिट्टी दोनों के लिए सुरक्षित रहता है। रोग की शुरुआती अवस्था में देसी उपाय ज्यादा कारगर साबित होते हैं।
समय-समय पर खेत की निगरानी जरूरी
हर 3–4 दिन में खेत का निरीक्षण करें। जैसे ही पत्तियों में असामान्य रंग, धब्बे या कीट दिखाई दें, तुरंत उपाय करें। शुरुआती स्तर पर नियंत्रण करने से नुकसान बहुत कम होता है।
निष्कर्ष
प्याज और लहसुन की फसल में कीट-रोगों का हमला किसानों के लिए बड़ा खतरा है, लेकिन सही समय पर सावधानी और बचाव के उपाय अपनाकर इससे पूरी तरह बचा जा सकता है। खेत की साफ-सफाई, संतुलित खाद-सिंचाई, जैविक उपाय और नियमित निगरानी से फसल सुरक्षित रहती है और अच्छी पैदावार व बेहतर मुनाफा सुनिश्चित किया जा सकता है। Pyaz-lahsun par kit-rogo ka hamla,samay rhate apnay bachav k ye uapy
