Chemical khad ki ab jarurat nahi..gaay k gobar se bnay khad : आज के समय में बढ़ती लागत और मिट्टी की सेहत बिगड़ने से किसान केमिकल खाद से दूरी बनाना चाहते हैं। ऐसे में घन जीवामृत एक सस्ता, प्राकृतिक और बेहद असरदार विकल्प बनकर सामने आया है। देसी गाय के गोबर से तैयार होने वाला घन जीवामृत मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, फसल को पोषण देता है और उत्पादन में साफ बढ़ोतरी करता है।
घन जीवामृत क्या है?
घन जीवामृत एक ठोस जैविक खाद है, जिसे देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और कुछ प्राकृतिक तत्वों से तैयार किया जाता है। इसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव मिट्टी को जीवंत बनाते हैं, जिससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।

घन जीवामृत बनाने की सामग्री
घन जीवामृत बनाने के लिए देसी गाय का ताजा गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन या दाल का आटा और थोड़ी सी खेत की मिट्टी की जरूरत होती है। ये सभी सामग्री आसानी से गांव में उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे इसकी लागत लगभग नाममात्र रहती है।Chemical khad ki ab jarurat nahi..gaay k gobar se bnay khad
घन जीवामृत बनाने की विधि
सबसे पहले छायादार जगह पर साफ जमीन पर गाय का ताजा गोबर फैलाएं। इसमें गोमूत्र, गुड़ और बेसन अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद खेत की मिट्टी डालकर मिश्रण को अच्छे से गूंथ लें। अब इस मिश्रण को 2–3 दिन तक छाया में सूखने दें। सूखने के बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर घन जीवामृत तैयार कर लें।
घन जीवामृत का उपयोग कैसे करें?
घन जीवामृत का उपयोग बुवाई से पहले या खड़ी फसल में किया जा सकता है। खेत तैयार करते समय इसे मिट्टी में मिला दें या फिर कतारों में डालकर हल्की सिंचाई कर दें। यह धीरे-धीरे घुलकर मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाता है और फसल को लंबे समय तक पोषण देता है।
किन फसलों में है ज्यादा फायदेमंद?
घन जीवामृत का उपयोग गेहूं, धान, चना, सरसों, सब्जियां, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों में किया जा सकता है। नियमित उपयोग से मिट्टी की संरचना सुधरती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।Chemical khad ki ab jarurat nahi..gaay k gobar se bnay khad
घन जीवामृत के प्रमुख फायदे
यह खाद पूरी तरह प्राकृतिक होती है, जिससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है। रासायनिक खाद पर खर्च कम होता है, जिससे खेती की लागत घटती है। फसलों की जड़ें मजबूत होती हैं और रोगों के प्रति सहनशक्ति बढ़ती है। लंबे समय तक खेत की उत्पादकता बनी रहती है और पैदावार में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

कितनी मात्रा में करें इस्तेमाल?
आमतौर पर 100–200 किलो घन जीवामृत प्रति एकड़ पर्याप्त होता है। फसल और मिट्टी की स्थिति के अनुसार मात्रा में थोड़ा बदलाव किया जा सकता है। बेहतर परिणाम के लिए इसे अन्य प्राकृतिक तरीकों जैसे जीवामृत या मल्चिंग के साथ भी अपनाया जा सकता है।
निष्कर्ष
घन जीवामृत किसानों के लिए एक सस्ता, टिकाऊ और भरोसेमंद विकल्प है, जो केमिकल खाद पर निर्भरता को कम करता है। देसी गाय के गोबर से बना यह प्राकृतिक खाद मिट्टी को जीवंत बनाता है और फसलों में बंपर पैदावार देने में मदद करता है। अगर किसान इसे नियमित रूप से अपनाएं, तो खेती ज्यादा सुरक्षित, लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बन सकती है।Chemical khad ki ab jarurat nahi..gaay k gobar se bnay khad
