Kam lagat me karni hai bampar kamai to kare stroberi ki in kismo ki kheti : आज के समय में किसान पारंपरिक फसलों से हटकर ऐसी खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें कम समय में ज्यादा मुनाफा मिले। इन्हीं फसलों में स्ट्रॉबेरी एक ऐसी फल फसल है, जिसने किसानों की आमदनी बढ़ाने में बड़ा रोल निभाया है। होटल, बेकरी, आइसक्रीम, जूस और दवाइयों में इस्तेमाल होने के कारण स्ट्रॉबेरी की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक बनी रहती है।
स्ट्रॉबेरी की खेती क्यों है फायदेमंद?
स्ट्रॉबेरी की खेती कम अवधि की होती है और इसकी बाजार कीमत भी अच्छी मिलती है। सही किस्म और तकनीक अपनाने पर किसान 3–4 महीने में ही शानदार कमाई कर सकता है। यह फसल छोटे खेत, पॉलीहाउस और नेट हाउस में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है।

स्ट्रॉबेरी की बंपर कमाई देने वाली प्रमुख किस्में
कैमरोज़ा (Camarosa)
यह स्ट्रॉबेरी की सबसे लोकप्रिय किस्मों में से एक है। इसके फल बड़े, चमकदार और स्वाद में बेहतरीन होते हैं। यह किस्म लंबी दूरी तक ढुलाई के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है, इसलिए निर्यात में इसकी भारी मांग रहती है।
स्वीट चार्ली (Sweet Charlie)
इस किस्म के फल जल्दी तैयार हो जाते हैं और स्वाद में काफी मीठे होते हैं। कम समय में उत्पादन देने के कारण यह किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।Kam lagat me karni hai bampar kamai to kare stroberi ki in kismo ki kheti
विंटर डॉन (Winter Dawn)
यह किस्म भारत की जलवायु के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है। इसके फल गहरे लाल रंग के और आकर्षक होते हैं। उत्पादन ज्यादा और लागत कम होने से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है।
फेस्टिवल (Festival)
यह किस्म एकसमान आकार और बेहतर गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट के लिए यह किस्म बेहद उपयुक्त है।
स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु
स्ट्रॉबेरी के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है। 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में इसका विकास बेहतर होता है। ज्यादा गर्मी और जलभराव से फसल को नुकसान हो सकता है, इसलिए ड्रिप सिंचाई का उपयोग ज्यादा फायदेमंद रहता है।Kam lagat me karni hai bampar kamai to kare stroberi ki in kismo ki kheti
कम लागत में ज्यादा उत्पादन कैसे लें?
स्ट्रॉबेरी की खेती में मल्चिंग बहुत जरूरी होती है, इससे नमी बनी रहती है और फल जमीन से संपर्क में नहीं आते। ड्रिप सिंचाई से पानी और खाद की बचत होती है। पॉलीहाउस या लो-टनेल तकनीक अपनाने पर ऑफ-सीजन उत्पादन भी लिया जा सकता है, जिससे बाजार में ऊंचे दाम मिलते हैं।

लागत और कमाई का अनुमान
सामान्य रूप से स्ट्रॉबेरी की खेती में प्रति एकड़ 1.5 से 2.5 लाख रुपये तक की लागत आती है। सही प्रबंधन और बाजार मिलने पर 5 से 8 लाख रुपये प्रति एकड़ तक की आमदनी संभव है। ऑफ-सीजन और पॉलीहाउस खेती में यह मुनाफा और भी ज्यादा हो सकता है।
स्ट्रॉबेरी की खेती में जरूरी सावधानियां
हमेशा प्रमाणित नर्सरी से ही पौधे खरीदें। जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें। कीट-रोग की नियमित निगरानी करें। फल तुड़ाई के बाद सही पैकिंग और ठंडी जगह पर भंडारण करें ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
निष्कर्ष
स्ट्रॉबेरी की खेती आज किसानों के लिए कम लागत में बंपर कमाई का बेहतरीन विकल्प बन चुकी है। सही किस्म का चयन, आधुनिक तकनीक और बाजार से जुड़ाव के साथ किसान इस फसल से देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी पहचान बना सकते हैं। अगर आप खेती से ज्यादा मुनाफा चाहते हैं, तो स्ट्रॉबेरी की खेती जरूर अपनाएं।Kam lagat me karni hai bampar kamai to kare stroberi ki in kismo ki kheti
